लेदर कॉम्प्लेक्स, सर्जिकल कॉम्प्लेक्स और गदईपुर-मंड-धोगड़ी इंडस्ट्री जोन भी इस कानून में शामिल – Jalandhar News



प्रवीण पर्व | जालंधर पंजाब सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने और उद्योगपतियों को वर्षों पुरानी प्रशासनिक जटिलताओं से मुक्ति दिलाने के लिए ‘पंजाब साझा बुनियादी ढांचा (नियमन एवं रखरखाव) संशोधन विधेयक 2026’ को पंजाब विधानसभा के कार्यवाही एजेंडे में शामिल कर लिया है। इस विधेयक पर सदन में विस्तृत चर्चा होना अभी बाकी है। इस नए संशोधन के लागू होने से जहां नगर निगमों के दोहरे कर के झंझट और संपत्ति कर का बोझ खत्म होगा, वहीं अब औद्योगिक क्षेत्रों के रखरखाव की कमान सीधे उद्योगपतियों की अपनी संस्थाओं के पास होगी। उद्योगपतियों और विशेष समिति के बीच किसी भी प्रकार के विवाद, खातों की जांच या चुनाव प्रक्रिया के निरीक्षण के लिए डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में ‘जिला निगरानी प्राधिकरण’ के गठन का प्रावधान है। इसमें जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक सहयोग करेंगे। किन पर लागू: जालंधर में लेदर कॉम्प्लेक्स, सर्जिकल कॉम्प्लेक्स, ओल्ड फोकल पॉइंट और गदईपुर-मंड-धोगड़ी इंडस्ट्री जोन भी इस कानून में शामिल हैं। अभी तक इनकी देखरेख नगर निगम व पंजाब स्मॉल इंडस्ट्री एंड एक्सपोर्ट कॉर्पोरेशन करती थी। संपत्ति कर से पूर्ण मुक्ति: नगर निगम सीमा में आने वाली औद्योगिक इकाइयों को अब अलग से संपत्ति कर देने की जरूरत नहीं होगी। इसके बदले एकमुश्त सेवा शुल्क लिया जाएगा, जो संपत्ति कर के स्थान पर ही माना जाएगा। इससे दोहरे कर की मार झेल रहे कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी। बिजली बिल के साथ सेवा शुल्क की वसूली: सेवा शुल्क की वसूली के लिए उद्योगपतियों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। पंजाब राज्य पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड हर महीने बिजली के बिल के साथ ही तय आधार दर के आधार पर इस शुल्क को वसूल करेगा। रखरखाव की कमान उद्योगपतियों की विशेष समिति के पास: औद्योगिक क्षेत्रों की सड़कों, स्ट्रीट लाइट, सफाई, कचरा प्रबंधन और सुरक्षा का जिम्मा सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत उद्योगपतियों की अपनी प्रबंधकीय समिति के पास होगा। फंड बंटवारे का पारदर्शी ढांचा: बिलों से वसूले गए सेवा शुल्क में से पावर कॉर्पोरेशन 3% प्रशासनिक शुल्क रखेगा। बाकी बचे फंड का 90% हिस्सा सीधे संबंधित क्षेत्र की विशेष समिति को रखरखाव के लिए दिया जाएगा, जबकि 10% हिस्सा संबंधित सक्षम प्राधिकरण को बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए मिलेगा। इमरजेंसी के लिए फंड: विशेष समिति को मिलने वाले फंड में से 5% प्रशासनिक कार्यों पर खर्च नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही कम से कम 10% फंड रिजर्व रखा जाएगा, जो आपातकालीन जरूरतों और बड़े विकास कार्यों के लिए सुरक्षित रहेगा। क्लस्टरों और बाहरी औद्योगिक क्षेत्रों का दायरा विस्तार: यह कानून केवल सरकारी अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आवास, स्थानीय निकाय और अधिसूचित औद्योगिक पार्कों के बाहर स्थापित स्वीकृत औद्योगिक समूहों पर भी लागू होगा। जल आपूर्ति और सीवरेज सरकारी संस्थाओं के पास: साझा बुनियादी ढांचे के तहत सड़कें, लाइटें, सुरक्षा और कूड़ा प्रबंधन उद्यमियों की कमेटी यानी स्पेशल पर्पज व्हीकल के पास रहेगा। हालांकि, जल आपूर्ति और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन संबंधित सक्षम सरकारी प्राधिकरण के अधीन ही रहेगा।



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