पठानकोट में किसान का 22 वर्षीय बेटा बना लेफ्टिनेंट: सेना में भर्ती होने का पिता का सपना बेटे ने पूरा कर दिखाया, रोजाना 8-10 घंटे पढ़ाई कर हासिल किया मुकाम – Pathankot News
जिला पठानकोट के गांव करोली के 22 वर्षीय अनुराग चौहान ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। अनुराग के पिता खुद आर्मी में भर्ती होना चाहते थे। लेकिन, हालात के चलते नहीं बन पाए। अब बेटे के तन पर सजी वर्दी देख पिता का कहना है कि उनका अधूरा सपना अनुराग में पूरा कर दिखाया है।
अनुराग ने रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई कर ये मुकाम हासिल किया है। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) देहरादून से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 13 जून को उन्हें भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त हुआ। गांव पहुंचने पर परिजनों, ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पठानकोट के मामून से पास की प्राथमिक शिक्षा
अनुराग चौहान ने बताया कि उन्होंने अपनी दसवीं कक्षा मॉडर्न सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मामून से 96 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके बाद उनका चयन महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट, मोहाली में हुआ, जहां उन्होंने दो वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त कर 12वीं की परीक्षा 87 प्रतिशत अंकों के साथ पास की।
इसके उपरांत उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की परीक्षा पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण कर एनडीए में प्रवेश प्राप्त किया।
13 जून को मिला कमीशन
चौहान ने बताया कि तीन वर्षों का एनडीए प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वर्ष 2025 में पास आउट हुए और फिर एक वर्ष का प्रशिक्षण भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून में प्राप्त किया। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद 13 जून 2026 को उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन मिला।
माता-पिता, शिक्षकों को सफलता का श्रेय
अनुराग ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और स्कूल को दिया। उन्होंने बताया कि सफलता प्राप्त करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। वह अक्सर रात 2 से 3 बजे तक पढ़ाई करते थे और एनडीए की तैयारी के दौरान प्रतिदिन 8 से 10 घंटे अध्ययन को देते थे।
युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि यदि जीवन में कोई लक्ष्य निर्धारित किया है तो पूरी लगन और समर्पण के साथ उस पर फोकस करें तथा मंजिल हासिल होने तक पीछे न हटें।
पिता खुद सेना में होना चाहते थे भर्ती
इस अवसर पर अनुराग के पिता शीश पाल सिंह ने कहा कि बेटे की उपलब्धि पर उन्हें बेहद गर्व है। उन्होंने बताया कि वह पहले निजी नौकरी करते थे और वर्तमान में खेतीबाड़ी कर रहे हैं। उनका स्वयं का सपना सेना में भर्ती होने का था, लेकिन कुछ कारणों से वह इसे पूरा नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि अनुराग ने उनकी अधूरी इच्छा को पूरा कर दिया है।
देर रात तक पढ़ता था अनुराग
शीश पाल सिंह ने बताया कि अनुराग बचपन से ही मेहनती था। कई बार जब वह देर रात उठते थे तो उन्हें लगता था कि अनुराग सो रहा होगा, लेकिन वह पढ़ाई में जुटा होता था। उन्होंने कहा कि बेटे की मेहनत और समर्पण का ही परिणाम है कि आज वह भारतीय सेना में अधिकारी बना है।
अनुराग की इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है और ग्रामीणों ने इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बताया है।
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