PACL ग्रुप की 1595.85 करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच: ईडी ने 14 प्रॉपर्टी को किया अटैच, सीबीआई भी दर्ज कर चुकी है केस – Chandigarh News
देश के सबसे बड़े निवेश घोटालों में से एक प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पर्ल ग्रुप की PACL निवेश धोखाधड़ी मामले में 1595.85 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। ED के दिल्ली जोनल कार्यालय ने पंजाब के रामनगर में स्थित ‘ज्ञान सागर एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट’ की 14 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त (Provisionally Attach) कर लिया है। ED की इस नई कार्रवाई के साथ ही इस पूरे मामले में अब तक देश और विदेश में कुल 28,626 करोड़ की चल-अचल संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ से तैयार की प्रॉपर्टी ED की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के मुताबिक, ज्ञान सागर एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की जमीन और वहां खड़ा किया गया पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ (अपराध की कमाई) से तैयार किया गया था। इस ट्रस्ट को खड़ा करने के लिए M/s PACL लिमिटेड के उन पैसों को डायवर्ट किया गया था, जो कंपनी ने देश भर के भोले-भाले निवेशकों से धोखाधड़ी कर जुटाए थे। क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ फर्जीवाड़ा? PACL और उसकी सहयोगी कंपनियों ने कृषि भूमि की बिक्री और विकास के नाम पर देश भर के लाखों निवेशकों से ₹48,000 करोड़ से अधिक की भारी-भरकम रकम अवैध रूप से जुटाई थी। निवेशकों को ‘कैश डाउन पेमेंट’ और ‘किस्त भुगतान योजनाओं’ का लालच दिया गया। उनसे भ्रामक समझौतों, पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। न जमीन मिली, न पैसा ज्यादातर मामलों में निवेशकों को कभी जमीन का कब्जा नहीं दिया गया। आज भी निवेशकों के करीब ₹48,000 करोड़ बकाया हैं। इस महाघोटाले को छिपाने के लिए कई फर्जी (Front) और शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI ने दर्ज की थी FIR इस मामले की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज की गई FIR से हुई थी। सीबीआई इस मामले में 33 अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। ED ने वर्ष 2016 में जांच शुरू की थी और 2018 से 2026 के बीच कई अभियोजन शिकायतें दर्ज की हैं, जिनका माननीय विशेष PMLA अदालत ने संज्ञान लिया है।
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