पंचकूला तहसीलदार विक्रम सिंगला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज: करप्शन केस में दूसरी बार फंसे, 95 दिन जेल में बिताने पर मिली थी बेल – Panchkula News
पंचकूला के रायपुर रानी क्षेत्र में पर्ल ग्रुप (पीजीएफ/पीएसीएल) की अटैच जमीन बेचने के मामले में तहसीलदार विक्रम सिंगला की अग्रिम जमानत याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश बिक्रमजीत अरोड़ा की कोर्ट में उन्होंने 20 मई को अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी। कोर्ट के समक्ष बचाव पक्ष के वकील दलील देते हुए कहा कि इसी जमीन व इसी तहसील से जुड़ा एक केस पहले भी विजिलेंस ने रजिस्टर किया था। आरोपी जांच में शामिल होने के लिए तैयार है, इसलिए किसी प्रकार की गिरफ्तार की जरूरत नहीं है। पूर्व में दर्ज किए गए केस व वर्तमान केस को एक साथ चलाया जाएगा, क्योंकि एक ही तहसील से संबंधित दोनों केस हैं। कोर्ट ने दलीलों को खारिज करते हुए तहसीलदार विक्रम सिंगला की अग्रिम जमानत याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया। अब तहसीलदार विक्रम सिंगला को विजिलेंस गिरफ्तार करने का प्रयास करेगी। पर्ल गुप जमीन से जुड़ा है मामला पंचकूला के रायपुर रानी क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और जांच एजेंसियों की रोक के बावजूद 17.55 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। मामले में तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला, कानूनगो दीपक कुमार, पटवारी नरेंद्र कुमार डबास और जमीन मालिक सुरमुख सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया है। पर्ल ग्रुप और उसकी सहयोगी कंपनियों की संपत्तियां निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए जांच एजेंसियों द्वारा पहले ही अटैच की जा चुकी थीं। इन संपत्तियों की बिक्री, म्यूटेशन और रजिस्ट्रेशन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाई गई थी। इसके बावजूद रायपुर रानी तहसील में संबंधित अधिकारियों ने कथित मिलीभगत से जमीन की रजिस्ट्री और इंतकाल मंजूर कर दिए। पटवारी ने गलत तरीके से बनाया दस्तावेज जांच में सामने आया कि, सुरमुख सिंह निवासी फतेहगढ़ साहिब, पंजाब की ओर से दी गई जीपीए के आधार पर हरदीप सिंह ने 22 दिसंबर 2025 को एसडीएम पंचकूला को आवेदन देकर राजस्व रिकॉर्ड से बंदी आदेश हटाने की मांग की थी। इसके बाद पटवारी नरेंद्र कुमार ने तहसीलदार विक्रम सिंगला के साथ मिलकर रिपोर्ट नंबर 232 दर्ज की और जमीन को बंदी आदेश से मुक्त दिखा दिया। बाद में कानूनगो दीपक कुमार ने संबंधित प्रक्रिया को तस्दीक कर दिया। 2 जनवरी 2026 को हुई करोड़ों की रजिस्ट्री रिपोर्ट के अनुसार, 2 जनवरी 2026 को रजिस्ट्री नंबर 1491 और 1492 दर्ज की गईं। इनमें सुरमुख सिंह ने कुनाल छिलाना और सौरभ के नाम कुल 17.55 एकड़ जमीन करीब 4.20 करोड़ रुपए में बेच दी। इसके बाद 9 जनवरी को इंतकाल दर्ज हुआ और 17 जनवरी को कानूनगो तथा तहसीलदार द्वारा मंजूर भी कर दिया गया। जांच एजेंसियों ने यह भी पाया कि इससे पहले भी संबंधित जमीन को लेकर शिकायतें और पत्राचार हुए थे। SDM पंचकूला ने तहसीलदार रायपुर रानी से स्पष्टीकरण मांगा था। हिसार निवासी एक शिकायतकर्ता ने भी ऐसी जमीनों की बिक्री रोकने का अनुरोध किया था, लेकिन अधिकारियों ने कथित तौर पर अनदेखी की। सरकार से मिली अभियोजन की अनुमति विजिलेंस जांच में मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 संशोधित 2018 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2) के तहत बनता पाया गया। इसके बाद धारा 17-ए के तहत कार्रवाई के लिए सरकार से अनुमति मांगी गई थी। मुख्य सचिव हरियाणा और DGP विजिलेंस की ओर से अनुमति मिलने के बाद अब आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी है। पहले भी जेल जा चुका विक्रम सिंगला हरियाणा के पंचकूला में PACL (पर्ल्स) ग्रुप की अटैच जमीन के सौदे में गड़बड़ी और रिश्वत लेने के आरोपों में तहसीलदार विक्रम सिंगला पहले भी जेल जा चुके हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिक्रमजीत अरोड़ा की कोर्ट ने करीब 3 महीने की न्यायिक हिरासत के बाद राहत देते हुए सख्त शर्तों के साथ बेल मंजूर की। विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो, पंचकूला में 30 जनवरी 2026 को दर्ज FIR में आरोप है कि तहसीलदार रहते हुए विक्रम सिंगला ने PACL ग्रुप की अटैच जमीन की अवैध रजिस्ट्री कराई। यह जमीन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत ट्रांसफर पर रोक के बावजूद शाहपुर गांव (रायपुर रानी) में बेची गई।
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