पंजाब में 8वीं पास बना रिसर्चर: फरीदकोट के निंदर को कल्चरल मिनिस्ट्री से फैलोशिप, जज के अर्दली रहे; CU बठिंडा में गेस्ट प्रोफैसर भी – Jalandhar News

पंजाब में 8वीं पास बना रिसर्चर:  फरीदकोट के निंदर को कल्चरल मिनिस्ट्री से फैलोशिप, जज के अर्दली रहे; CU बठिंडा में गेस्ट प्रोफैसर भी – Jalandhar News




पंजाब के फरीदकोट के रहने वाले और 8वीं पास निंदर घगियाणवी पंजाबी गायकी के 125 साल के सफर पर रिसर्च करेंगे। संस्कृति मंत्रालय के संगठन सेंटर फॉर कल्चरल रिसोर्सेज एंड ट्रेनिंग (CCRT) नई दिल्ली ने उनको फैलोशिप दी है। 20 जून 2026 को इसकी घोषणा की गई है। 70 किताबें लिख चुके घगियाणवी पंजाबी साहित्य के दिग्गज राम सरूप अणखी और दलीप कौर टिवाणा के बाद तीसरे पंजाबी हैं जिनको ये फैलोशिप मिली है। अगले 2 साल रिसर्च के लिए भारत सरकार उनको 20 हजार रुपए प्रति महीना भी देगी।
फरीदकोट में ही जज के अर्दली रह चुके घगियाणवी की किताब मै सां जज दा अर्दली को वर्ल्ड वाइड पहचान मिली। इस किताब ने साहित्य जगत का ध्यान उनकी तरफ खींचा। 8वीं पास होने के बावजूद उनकी किताबें कई यूनिवर्सिटी के सिलेबस का हिस्सा हैं। इसके अलावा वह सेंट्रल यूनिवर्सिटी बठिंडा में बतौर गेस्ट प्रोफैसर भी पढ़ाते हैं।
2 साल के प्रोजेक्ट के लिए मिलेगी वित्तीय सहायता
इस सीनियर फैलोशिप के तहत भारत सरकार द्वारा निंदर घगियाणवी को अगले 2 साल की अवधि के लिए 20 हजार रुपए प्रति माह की वित्तीय सहायता (स्टाइपेंड) प्रदान की जाएगी। इस अवधि के दौरान वे एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम करेंगे, जिसका नाम ‘पंजाबी गायकी के 125 साल’ है। इसके तहत वे पंजाबी लोक संगीत, लोक गायकों और गायकी के सवा सौ साल के इतिहास व विकास पर दस्तावेज तैयार करेंगे। अर्दली से प्रोफेसर बनने तक का सफर राइटर्स इन रेजीडेंट पद पर रहने वाले पहले पंजाबी लेखक
निंदर घगियाणवी ने लाल चंद यमला जट और सुरिंदर कौर जैसे अमर पंजाबी गायकों की जीवनियां लिखकर पंजाब की अमीर सांस्कृतिक विरासत को नष्ट होने से बचाया और उसे सहेजा है। आज देश के कई छात्र उनकी किताबों पर पीएचडी (Ph.D) रिसर्च कर रहे हैं। उनकी इसी अद्वितीय योग्यता के कारण वे सेंट्रल यूनिवर्सिटी पंजाब में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के तौर पर भी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा वे महाराष्ट्र की महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी यूनिवर्सिटी में राइटर्स इन रेजीडेंट के पद पर रहने वाले पहले पंजाबी लेखक भी हैं। पंजाब सरकार के भाषा विभाग द्वारा उन्हें शिरोमणि साहित्यकार (2020) के सर्वोच्च पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *