हिमाचल में एंट्री टैक्स के विरोध में चक्का जाम: रोपड़ में विभिन्न यूनियनों ने बॉर्डरों प्रदर्शन किया, दोनों ओर लगी वाहनों की लंबी कतारें – Ropar (Rupnagar) News
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बाहरी राज्यों के व्यावसायिक वाहनों पर लगाए गए नए एंट्री टैक्स (प्रवेश कर) के खिलाफ पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। विभिन्न ट्रांसपोर्ट, टैक्सी और किसान यूनियनों के आह्वान पर आज पंजाब-हिमाचल सीमा पर स्थित ढेरोवाल बैरियर समेत लगभग 55 सीमावर्ती क्षेत्रों (बॉर्डर्स) पर उग्र प्रदर्शन और चक्का जाम किया गया। चक्का जाम के कारण सीमा के दोनों ओर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं, जिससे आम जनता और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यूनियन नेताओं ने कहा कि अगर हिमाचल सरकार ने अपने फैसले को नहीं बदला तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा। गौरतलब है कि कुछ समय पहले हिमाचल सरकार ने बाहरी राज्यों से हिमाचल आने वाले कामर्शियल वाहनों पर टैक्स लगाने का नियम पास किया था। इसके विरोध में ट्रक ऑपरेटर, टैक्सी यूनियनों के साथ किसान संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। इसके खिलाफ सुबह 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक चले इस 4 घंटे के देशव्यापी चक्का जाम आयोजन किया गया।
आपातकालीन सेवाओं को छूट, सीमा पर लगा जाम ट्रक ऑपरेटरों, टैक्सी यूनियनों और किसान संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से किए गए इस प्रदर्शन के दौरान पंजाब और हरियाणा से सटे हिमाचल के सभी 55 एंट्री पॉइंट्स पर आवाजाही पूरी तरह ठप रही। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने मानवीय आधार पर केवल एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को ही निकलने की अनुमति दी। अन्य सभी व्यावसायिक और निजी वाहनों के पहिये जहां के तहां थमे रहे। एक देश, फिर बार-बार टैक्स क्यों ढेरोवाल बैरियर पर धरने पर बैठे यूनियन नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए हिमाचल सरकार के इस फैसले को असंवैधानिक करार दिया। उनका कहना है कि जब पूरा देश एक है और ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की बात की जाती है, तो एक राज्य से दूसरे राज्य में प्रवेश करने के लिए व्यावसायिक वाहनों से इस तरह का टैक्स वसूलने का क्या औचित्य है? यह सीधे तौर पर ट्रांसपोर्टर्स और आम जनता की जेब पर डाका है। सरकार पर ‘अड़ियल रवैये’ और भाईचारा बिगाड़ने का आरोप नेताओं ने आरोप लगाया कि इस टैक्स के विरोध में सरकार को पहले भी चेतावनी दी गई थी, लेकिन सरकार के अड़ियल रवैये के कारण उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार अपनी आर्थिक नाकामियों को छिपाने के लिए ऐसे जनविरोधी फैसले ले रही है। सरकार के इस कदम से पंजाब व हिमाचल के लोगों में अनावश्यक तनाव पैदा हो रहा है, जबकि दोनों राज्यों का भाईचारा ऐतिहासिक और अटूट है। आगे उग्र आंदोलन की चेतावनी प्रदर्शनकारी नेताओं ने हिमाचल प्रदेश सरकार को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि इस ‘काले कानून’ और एंट्री टैक्स के फैसले को तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में यह संघर्ष और अधिक तेज होगा। यूनियनों ने अनिश्चितकालीन चक्का जाम और हिमाचल की आर्थिक नाकेबंदी तक की चेतावनी दी है।
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