पटना साहिब जत्थेदार ने की पूर्व-जत्थेदार पर कार्रवाई की मांग: श्री अकाल तख्त को लिखा लेटर, बोले- सिख सिद्धांतों और मर्यादा का उल्लंघन किया – Amritsar News




पटना साहिब स्थित तख्त श्री हरिमंदिर जी के जत्थेदार ज्ञानी रंजीत सिंह ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह मांग ज्ञानी रघबीर सिंह द्वारा एक दुनियावी जांच एजेंसी (एसआईटी) के समक्ष बयान देने के बाद की गई है। पत्र में कहा गया है कि विभिन्न समाचार चैनलों की रिपोर्टों के अनुसार, ज्ञानी रघबीर सिंह ने एक दुनियावी जांच एजेंसी के सामने बयान दिए हैं। जत्थेदार रंजीत सिंह के अनुसार, यह कार्य श्री अकाल तख्त साहिब की पवित्र परंपराओं, सिख सिद्धांतों और उसकी मर्यादा का उल्लंघन है। कहा- सिख संगत की भावनाएं आहत हुई ज्ञानी रंजीत सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि श्री अकाल तख्त साहिब दुनियाभर के सिखों के लिए सर्वोच्च धार्मिक संस्था है। यहां से जारी होने वाला प्रत्येक हुक्म और संदेश सिख पंथ के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि इस घटना से दुनियाभर की सिख संगत की भावनाएं आहत हुई हैं और इसे एक गंभीर चूक माना जाना चाहिए। उन्होंने जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज से अपील की है कि ज्ञानी रघबीर सिंह के विरुद्ध पंथक मर्यादा के अनुसार तत्काल उचित कार्रवाई की जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को चुनौती देने का दुस्साहस न कर सके। खुद को बताया गुरु पंथ का सेवक पत्र के अंत में, ज्ञानी रंजीत सिंह ने स्वयं को “गुरु पंथ का सेवक” बताते हुए श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानी रघुबीर सिंह को अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल से कोई परेशानी है तो वो उनके खिलाफ पर्सनल केस करें, लेकिन ऐसे पंथ की मर्यादा को भंग नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि वो श्री अकाल तख्त साहिब से विनती करते हैं इस मामले में ज्ञानी रघबीर सिंह को श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब किया जाए ओर उन्हें ओर उनके साथियों को पंथ से हमेशा हमेशा के लिये निकाल दिया जाए। वहीं ज्ञानी रघबीर सिंह को बेरी साहिब पर बांध कर सजा दी जाए, ताकि कोई आगे से श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा को भंग न कर सके।



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