दल-खालसा के अमृतसर बंद को मिला सभी समुदायों का समर्थन: जून 1984 के घल्लूघारे की 42वीं बरसी पर शांतिपूर्ण मार्च निकाला – Amritsar News
अमृतसर में जून 1984 की घटनाओं की याद में दल खालसा द्वारा बंद का आह्वान किया गया, जिसे शहरवासियों का व्यापक समर्थन मिला। संगठन के नेताओं ने बताया कि पिछले लगभग 15 वर्षों से अमृतसर के लोग इस बंद में लगातार सहयोग देते आ रहे हैं।
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जून 1984 पंजाब के इतिहास का संवेदनशील अध्याय: मान सिंह
दल खालसा के नेता मान सिंह ने कहा कि जून 1984 पंजाब के इतिहास का एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसे लोग आज भी नहीं भूले हैं। उन्होंने कहा कि हर वर्ष इन घटनाओं को याद करते हुए बंद का आयोजन किया जाता है और इस बार भी शहर के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
मान सिंह के अनुसार, इस बंद को विभिन्न समुदायों का भी समर्थन मिला। हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोगों ने भी सहयोग देकर भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग अपने इतिहास और विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बंद के दौरान शहर के अधिकांश बाजार पूरी तरह बंद रहे। हालांकि कुछ बैंक और अन्य संस्थान खुले दिखाई दिए, जिनसे भी सहयोग की अपील की गई। संगठन का कहना है कि बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किया गया।
दल खालसा ने स्पष्ट किया कि अस्पताल, एंबुलेंस सेवाएं, चिकित्सा सुविधाएं और सार्वजनिक परिवहन जैसी आवश्यक सेवाओं को बंद से बाहर रखा गया था, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
42वीं बरसी पर 6 जून को निकाला गया मार्च
वहीं, जून 1984 के घल्लूघारे की 42वीं बरसी के अवसर पर 6 जून को एक मार्च भी निकाला गया। दल खालसा के महासचिव रणजीत सिंह टांडा ने कहा कि यह कार्यक्रम श्री दरबार साहिब पर हुई सैन्य कार्रवाई के विरोध और उसमें मारे गए लोगों की स्मृति को समर्पित है। उन्होंने अमृतसर के लोगों का शांतिपूर्ण सहयोग के लिए धन्यवाद करते हुए भविष्य में भी इसी तरह समर्थन मिलने की उम्मीद जताई।

