पंजाब में BJP ने जट्टसिख को प्रधान क्यों बनाया: हिंदुओं की पार्टी का ठप्पा हटाया, 69 सीटों पर नजर; क्या ढिल्लों CM चेहरा भी होंगे – Chandigarh News
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले BJP ने पहली बार जट्टसिख चेहरे को पार्टी कमान सौंप दी। हिंदू चेहरे सुनील जाखड़ को हटाकर केवल सिंह ढिल्लों को राज्य का नया प्रधान बना दिया। इस फैसले से न केवल BJP ने हिंदुओं की पार्टी के ठप्पे को दूर करने की
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धर्म और क्षेत्र से बढ़कर BJP ने इस फैसले से जातीय समीकरण में भी गोटियां फिट करने की कोशिश की। इस फैसले के बाद एक्सपर्ट मान रहे हैं कि भाजपा पंजाब को हलके में नहीं ले रही बल्कि बंगाल स्टाइल में आक्रामक स्टाइल से चुनाव में उतरने वाली है। इसी वजह से भाजपा के फैसले के तुरंत बाद कांग्रेस और AAP से तीखे रिएक्शन आए।
BJP के इस फैसले के जरिए चुनाव में क्या करना चाहती है?, जट्टसिख को कमान सौंपने से BJP को चुनाव में क्या फायदा होने वाला है, इस बारे में दैनिक भास्कर ने पंजाब की सियासत को करीब से देखने वाले 4 एक्सपर्ट्स से बात की। उनकी क्या राय, जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
सवाल: BJP ने जट्टसिख चेहरा ही प्रधान क्यों बनाया, विरोधियों पर इसका क्या असर होगा? सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद बातिश कहते हैं- किसान आंदोलन के वक्त अकाली दल से गठजोड़ टूटने के बाद पंजाब में भाजपा के पास कोई बड़ा सिख चेहरा नहीं था। कांग्रेस से कैप्टन अमरिंदर समेत कई बड़े नेता आए जरूर लेकिन कोई बड़े पद नहीं मिले। दूसरे दलों से भाजपा में कई सिख चेहरे आए। वह जानते थे कि पंजाब में सिर्फ पॉलिटिक्स नहीं बल्कि फीलिंग्स भी मायने रखती हैं। इसीलिए चुनाव से पहले किसी सिख को प्रधान बनाने के लिए आवाज उठ रही थी।
इसका सबसे बड़ा मैसेज ये जाएगा कि BJP सिर्फ हिंदुओं की पार्टी नहीं है। सिख बाहुल्य स्टेट पंजाब में वह सिखों को ही तरजीह दे रही है। इस फैसले से BJP ने विरोधियों के उन्हें सिर्फ हिंदुओं की पार्टी का नैरेटिव बनाने का मुद्दा छीन लिया। जट्टसिख को कमान की वजह ये भी है कि विरोधी दल इसका विरोध नहीं कर सकते।
कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर राजा वड़िंग, अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल और CM भगवंत मान भी जट्टसिख कम्युनिटी से आते हैं। राज्य में भले ही पारंपरिक तौर पर जट्टसिख कम्युनिटी की गिनती 21% हो लेकिन सत्ता की चाबी इन्हीं के पास होती है। इनकी अगुआई में ही चुनाव जीते गए और ज्यादातर जट्टसिख ही सीएम भी बने। कांग्रेस ने जरूर 2022 में दलित समुदाय से आते चरणजीत चन्नी की अगुआई में चुनाव लड़ा लेकिन सरकार नहीं बना पाई और 18 सीटों पर सिमट गए।

सवाल: क्या केवल ढिल्लों को भाजपा का CM चेहरा भी मान लें? सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद बातिश कहते हैं- अभी ये कहना तो जल्दबाजी है लेकिन BJP ने संगठन की कमान एक सिख को देकर पंजाबियों को ये मैसेज जरूर दिया कि अगर उनकी सरकार बनती है तो इस सूरत में सिख ही मुख्यमंत्री होगा, कोई हिंदू नहीं। भाजपा के खिलाफ विरोधी इसका प्रचार कर सिखों में BJP के खिलाफ माहौल जरूर बना सकते थे। इसे भाजपा ने खत्म कर दिया है।
भाजपा ने सिखों को मैसेज दे दिया है कि अगर वह वोट दें तो फिर पंजाब की अगुआई किसी सिख चेहरे को देने में उन्हें कोई एतराज नहीं होगा। हालांकि भाजपा सीएम चेहरा किसी को नहीं बनाएगी क्योंकि इससे केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू, पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, राणा गुरमीत सोढ़ी, सुनील जाखड़, अश्वनी कुमार जैसे चेहरों की नाराजगी का रिस्क रहेगा।
सवाल: केवल ढिल्लों को ही क्यों चुना गया, उनके जरिए BJP क्या कामयाबी देख रही? PAU के पूर्व VC डॉ. किरपाल सिंह औलख कहते हैं- पंजाब में हमेशा जट्टसिखों की सत्ता रही है। भाजपा ने भी वही रास्ता पकड़ा है। ढिल्लों बरनाला से 2 बार विधायक रहे और वह सबसे ज्यादा सीटों वाले मालवा क्षेत्र से आते हैं। यही वजह है कि भाजपा ने सावधानी से केवल ढिल्लों को जिम्मेदारी सौंपकर सबसे ज्यादा सीटों वाले मालवा को टारगेट किया।
ढिल्लों कारोबारी भी हैं, पेप्सिको को पंजाब में लाने का क्रेडिट भी उन्हें जाता है। उनसे जुड़ी कोई बड़ी कॉन्ट्रोवर्सी भी नहीं है। कांग्रेस पृष्ठभूमि के चलते उनके विपक्ष के कई बड़े नेताओं से अच्छे संबंध भी हैं।
सवाल: केवल ढिल्लों क्या किसानों-कट्टर सिखों को साध पाएंगे? सीनियर जर्नलिस्ट एस. पुरुषोत्तम कहते हैं- केवल ढिल्लों की छवि अच्छी है। वह प्रयोगवादी नेता हैं। दूसरा, जट्ट होने के चलते किसानों से वह सीधे जुड़े हैं। कट्टर सिखों में भी उनकी छवि बढ़िया है। उनका पूरा पॉलिटिकल करियर व ज्यादातर कारोबार पंजाब का ही है। ऐसे में वह जब भाजपा के लिए समर्थन जुटाने जाएंगे तो बिल्कुल उनकी बात सुनी जाएगी।
यह भी नहीं भूलना चाहिए कि पंजाब में कट्टर सिखों से जुड़ा सबसे बड़ा मुद्दा बंदी सिखों का है। जो सजा पूरी करने के बाद भी जेल में हैं। अगर भाजपा ने वह दांव चल दिया तो चुनाव में उसका भी इंपैक्ट नजर आएगा। भाजपा एक तरफ यहां सिखों से जुड़ने की कोशिश करेगी और दूसरी तरफ विरोधियों के लिए ED-CBI चलती रहेगी।

सवाल: AAP और CM भगवंत मान पर यह फैसला कितना असर डालेगा? सीनियर जर्नलिस्ट डॉ. भूपिंदर सिंह कहते हैं- पंजाब चुनाव में 117 में से 69 विधानसभा सीटों वाला मालवा सभी पार्टियों के लिए अहम है। इस बात को AAP भी जानती है। इसीलिए CM भगवंत मान समेत 16 मंत्रियों में से 10 मंत्री मालवा इलाके से आते हैं। भाजपा सारे गुणा-गणित से पंजाब इलेक्शन की स्ट्रेटजी पर काम कर रही है।
मालवा पर पकड़ बनाने के लिए ढिल्लों को प्रधान बनाने से पहले बरनाला से कारोबारी राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत साहनी को पार्टी में शामिल कर चुके हैं। इसके जरिए भाजपा 2 काम कर रही है। एक तरफ ज्यादा सीटों वाले मालवा में अपना आधार बढ़ा रही है तो दूसरी तरफ AAP को घर में ही घेरने की रणनीति बना रही है क्योंकि सीएम भी खुद मालवा के संगरूर जिले से आते हैं।

सवाल: क्या BJP पंजाब में सिर्फ जट्टसिखों की ही राजनीति करेगी? सीनियर जर्नलिस्ट डॉ. भूपिंदर सिंह कहते हैं- नहीं, यही आपको समझना होगा। भाजपा बड़ी प्लानिंग से चुनाव की वर्किंग कर रही है। पंजाब में वोट बैंक किसी का भी ज्यादा हो, जट्टसिख कम्युनिटी उन्हें प्रभावित करती है। यही बात भाजपा भी समझ गई और अगुआई उन्हें दे दी।
करीब 32% वोट बैंक को भाजपा पहले ही टारगेट कर चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कुछ समय पहले रविदासिया समाज के सबसे बड़े डेरा सचखंड बल्लां आना इसी का हिस्सा है। वह पहले PM थे जो डेरे में पहुंचे तो उससे निश्वित तौर पर समाज में BJP के प्रति अच्छा मैसेज जाएगा। आप ऐसे समझिए, कि जातीय समीकरण के लिहाज से जो समुदाय जिस चीज से संतुष्ट है या जो चाहता है, भाजपा उसे वह दे रही है।
सवाल: क्या केवल ढिल्लों को प्रधान बनाने के पीछे कैप्टन अमरिंदर सिंह हैं? मीडिया से बात करते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खुद इसका जवाब दिया कि उन्होंने ढिल्लों को रिकमेंड नहीं किया था। ये पार्टी का अपना फैसला है। इसके पीछे हरियाणा CM नायब सैनी की सिफारिश जरूर मानी जा रही है। जब भी चुनाव होते हैं तो फिर स्टेट लीडरशिप से ज्यादा वर्किंग भाजपा के सीनियर नेता खुद करते हैं। PM मोदी चेहरा बनते हैं। गृहमंत्री अमित शाह पूरी स्ट्रेटजी बनाकर उसे लागू करते हैं। ऐसे में राज्य के नेता सिर्फ अपनी ड्यूटी निभाते हैं।



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