पठानकोट में होने वाली ईसाई चंगाई सभा का विरोध शुरू: इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर अखवाना में 11 जून को होने वाली चंगाई सभा के विरोध में उतरी पंचायतें और हिंदू संगठन, डीसी को सौंपा मांगपत्र – Pathankot News
जिला पठानकोट के गांव अखवाना स्थित इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर में ईसाई समुदाय की ओर से 11 जून को आयोजित होने वाली चंगाई सभा का पहले ही विरोध शुरू हो गया है। चंगाई सभा के विरोध में आज विभिन्न हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों ने रोष प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने जिला पठानकोट प्रशासन से इस होने वाले ईसाई समुदाय के कार्यक्रम पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। इस संबंध में डिप्टी कमिश्नर पठानकोट को एक पत्र लिखा गया है। जिसमें संभावना जताई गई है कि इस सभा में लोगों को लालच देकर धर्म परिवर्तन करवाया जाएगा।
कई सरपंचों, धार्मिक संगठनों ने सौंपा डीसी को मांग पत्र
सोमवार को इलाके के कई सरपंचों, धार्मिक व सामाजिक संगठनों की ओर से डीसी दफ्तर पहुंच मांग पत्र सौंपा। जिसमें गांव झझेली सरपंच अनीता देवी, गांव काहनपुर सरपंच राकेश कुमार, समाज सेविका अखवाना सुमन ठाकुर, पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष जगमोहन जग्गा, भगवाधारी परिवार के मनदीप सिंह, समाज सेवक एडवोकेट संजीव मन्हास, राजपूत सभा के शिवा काटल, विश्व हिंदू परिषद के विभाग मंत्री अजय शर्मा, जिला मंत्री पिंटू जसरोटिया, बजरंग दल पठानकोट जिला संयोजक विशाल चौहान समेत 150 से ज्यादा लोगों के हस्ताक्षर मौजूद हैं।
हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों की मुख्य आपत्तियां:
धर्म परिवर्तन की आशंका: हिंदू संगठनों का आरोप है कि इस चंगाई सभा की आड़ में क्षेत्र के भोले-भाले लोगों को प्रलोभन देकर उनका धर्म परिवर्तन करवाया जा सकता है।
क्षेत्र की डेमोग्राफी (आबादी): पत्र में बताया गया कि यह पूरा इलाका हिंदू बाहुल्य क्षेत्र है और यहाँ स्थानीय स्तर पर ईसाई समुदाय की गिनती न के बराबर है। ऐसे में इस शांतमय क्षेत्र में चंगाई सभा करवाने का कोई औचित्य नहीं बनता।
शांति भंग होने का खतरा: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बाहर से ईसाई समुदाय के लोगों को यहाँ लाकर इस क्षेत्र की शांति को भंग करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी चिंता और असंतोष व्याप्त है।
प्रशासन से मांग और आगामी रणनीति:
हिंदू संगठनों और स्थानीय निवासियों ने जिला पठानकोट प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि 11 जून को होने वाले इस कार्यक्रम को करवाने की मंजूरी न दी जाए। यदि प्रशासन की ओर से इसकी अनुमति पहले ही दी जा चुकी है, तो उसे तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए।
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