चंडीगढ़ पीजीआई में हीटवेव से बचाव पर मंथन: विशेषज्ञ बोले- घर के अंदर की गर्मी भी बन रही खतरा,बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को खतरा – Chandigarh News
बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ रहे हीटवेव के खतरे को देखते हुए पीजीआई चंडीगढ़ के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग और स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ने विश्व हीट एक्शन डे और पर्यावरण दिवस-2026 पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस साल का विषय “इंडोर हीट” यानी घरों के अंदर बढ़ती गर्मी रहा। कार्यक्रम में स्वास्थ्य, पर्यावरण और मौसम विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार अग्रवाल ने कहा कि गर्मी से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को कम करने के लिए वैज्ञानिक शोध और सफल उपायों को लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। स्थानीय स्तर पर किए गए शोध भविष्य में बेहतर तैयारी और बचाव में मदद करेंगे। आईएमडी चंडीगढ़ के निदेशक सुरेंद्र पाल ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में हीटवेव वाले दिनों की संख्या चार गुना बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि समय पर मौसम की जानकारी और चेतावनी लोगों की जान बचा सकती है। इसके लिए मौसम विभाग सचेत और मौसम मोबाइल ऐप के जरिए अलर्ट जारी कर रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को खतरा पीजीआई के प्रो. रविंद्र खाईवाल ने कहा कि लोग हीटवेव को केवल बाहर की समस्या समझते हैं, जबकि घरों के अंदर भी तापमान लंबे समय तक बहुत ज्यादा रह सकता है। इसका सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों और गरीब परिवारों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अधिक पेड़-पौधे लगाने और बेहतर शहर योजना से गर्मी का असर कम किया जा सकता है। डॉ. आशीष बेहरा ने बताया कि ज्यादा गर्मी से शरीर में पानी की कमी, थकान, चक्कर आना, मांसपेशियों में दर्द, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज करवाना चाहिए। मिलकर काम करने की जरूरत डॉ. बिजया के. पाधी ने कहा कि हीटवेव से बचाव के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, मौसम विभाग, नगर योजनाकार, सरकार और स्थानीय समुदायों को मिलकर काम करना होगा। विशेषज्ञों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। इससे बचने के लिए घरों में बेहतर वेंटिलेशन, कूल रूफ, हरियाली बढ़ाने, हीट अलर्ट सिस्टम और लोगों को जागरूक करने जैसे कदम उठाने की जरूरत है, ताकि गर्मी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
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