मजीठा गेट पर बिक्रम मजीठिया के पोस्टरों पर चर्चा: अकाली समर्थक नेता के प्रति वफादारी बता रहे हैं, विरोधी बोले- कानूनी जवादेही होनी चाहिए – Amritsar News
शिरोमणि अकाली दल के कद्दावर और वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के हक में मजीठा गेट इलाके में लगाए गए पोस्टरों ने पंजाब की सियासत में एक बार फिर नई चर्चा छेड़ दी है। इन पोस्टरों के सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में राजनीतिक गहमागहमी का माहौल है और सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष व आम जनता के बीच इस पर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुल मिलाकर, मजीठा गेट के इन विवादित पोस्टरों ने एक बार फिर अकाली दल और विरोधी दलों को आमने-सामने ला खड़ा किया है। जहां अकाली समर्थक इसे अपने नेता के प्रति अटूट वफादारी और एकजुटता का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं विरोधी इसे कानूनी जवाबदेही से जोड़कर देख रहे हैं। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में जांच की आंच और पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियां क्या नया मोड़ लेती हैं। समर्थकों की दलील: “कानूनी प्रक्रिया से पहले किसी को दोषी मानना गलत” इलाके के कुछ स्थानीय नेताओं और नागरिकों का मानना है कि किसी भी नेता के खिलाफ मामला दर्ज होने का मतलब यह नहीं कि वह दोषी साबित हो गया है। समर्थकों का कहना है कि मुश्किल समय में समाज और पार्टी को अपने नेता के साथ खड़ा होना चाहिए और कानून को अपना काम करने देना चाहिए। इंसान से गलतियां हो सकती हैं, लेकिन अदालत के फैसले से पहले किसी को भी कसूरवार ठहराना न्यायसंगत नहीं है। लोगों ने यह भी याद दिलाया कि मजीठा क्षेत्र सदियों से आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल रहा है। इसलिए इन राजनीतिक पोस्टरों या मामलों का सामाजिक शांति पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ना चाहिए। राजनीतिक विरोधियों का रुख: “विरोध जायज, लेकिन यह व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं” विपक्षी खेमे के कुछ नेताओं ने इस पर सधी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यदि यह पोस्टर अकाली दल के कार्यकर्ताओं या समर्थकों द्वारा लगाए गए हैं, तो यह लोकतंत्र में उनकी राजनीतिक अभिव्यक्ति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि कहा कि राजनीतिक मतभेदों को कभी भी व्यक्तिगत दुश्मनी का रूप नहीं लेना चाहिए और कानून के सामने हर नागरिक बराबर है, इसलिए सभी को कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करना होगा। “सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ जैसे आरोपों की हो रही जांच” स्थानीय नेता/राजनीतिक विश्लेषक जसवंत सिंह का कहना है कि सरकार पूरी निष्पक्षता से अपनी जिम्मेदारी निभा रही है। यदि किसी मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज हुई है, तो उसकी बारीकी से जांच और आगामी कार्रवाई पूरी तरह से कानून के दायरे में ही की जा रही है। जसवंत सिंह ने दावा किया कि मजीठिया से जुड़े मामलों में सरकारी रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ आदि की जांच एजेंसियां अपने स्तर पर रही हैं। पूर्ववर्ती कार्यकालों में कई लोगों को राजनीतिक द्वेष के कारण परेशानियां झेलनी पड़ी थीं। अअब पुराने मामले परत-दर-परत बाहर आ रहे हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि वे कानून व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखें और किसी भी मामले का अंतिम फैसला अदालतों व जांच एजेंसियों पर ही छोड़ दें।
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