ननकाना साहिब के लिए भारत से भेजी गई गोल्डन-फाइबर पालकी-साहिब: अमृतसर स्थित अटारी-वाघा सीमा पर दिखा धार्मिक आस्था और सेवा का अनूठा संगम – Amritsar News

ननकाना साहिब के लिए भारत से भेजी गई गोल्डन-फाइबर पालकी-साहिब:  अमृतसर स्थित अटारी-वाघा सीमा पर दिखा धार्मिक आस्था और सेवा का अनूठा संगम – Amritsar News




प्रथम पातशाही श्री गुरु नानक देव जी के जन्मस्थान गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब, पाकिस्तान के लिए भारत से एक सुंदर गोल्डन फाइबर पालकी साहिब अटारी-वाघा सीमा मार्ग के जरिए पाकिस्तान भेजी गई। इस अवसर पर धार्मिक श्रद्धा और भारत-पाकिस्तान की साझा सिख विरासत का अनूठा दृश्य देखने को मिला। जानकारी के अनुसार, यह पालकी साहिब संत महापुरुष बाबा दर्शन सिंह कुल्ली वालों की प्रेरणा से उनके सेवादार बाबा गुरदेव सिंह कुल्ली वालों द्वारा तैयार करवाई गई है। पालकी साहिब को विशेष रूप से पाकिस्तान के सिंध प्रांत निवासी भाई महेश सिंह की मांग पर तैयार कराया गया, ताकि इसे गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब में सुशोभित किया जा सके। कस्टम और बीएसएफ ने पूरी की प्रक्रिया पालकी साहिब को अमृतसर स्थित अटारी स्थित इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) के माध्यम से पाकिस्तान रवाना किया गया। इस दौरान भारतीय कस्टम विभाग के कमिश्नर ए. पी. चौधरी, सुपरिंटेंडेंट अशोक कुमार तथा बीएसएफ अधिकारियों ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराईं। भारतीय कस्टम अधिकारियों ने पालकी साहिब को पाकिस्तान कस्टम विभाग को सौंपने की प्रक्रिया संपन्न करवाई। इस मौके पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के जत्था लीडर भाई भूपिंदर सिंह भलवान ने कहा कि वाघा सीमा पर रमेश सिंह अरोड़ा तथा भाई महेश सिंह के सहयोगियों को यह पालकी साहिब औपचारिक रूप से सौंप दी जाएगी। प्रेम, भाईचारे और सेवा का संदेश धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं—प्रेम, भाईचारे और मानव सेवा—का प्रतीक बताया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस प्रकार के प्रयास दोनों देशों के बीच धार्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।



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