पठानकोट चुनाव में बहुमत से 3 सीट दूर भाजपा: भाजपा बना सबसे बड़ा दल, कांग्रेस को 18 सीटों का नुक्सान, त्रिशंकु नतीजों से दिलचस्प हुई मेयर पद की दौड़ – Pathankot News

पठानकोट चुनाव में बहुमत से 3 सीट दूर भाजपा:  भाजपा बना सबसे बड़ा दल, कांग्रेस को 18 सीटों का नुक्सान, त्रिशंकु नतीजों से दिलचस्प हुई मेयर पद की दौड़ – Pathankot News




पठानकोट नगर निगम चुनाव के नतीजों ने शहर की राजनीति को बेहद दिलचस्प मोड़ पर ला खड़ा किया है। भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर सामने आई है, लेकिन स्पष्ट बहुमत से अभी भी तीन सीटें दूर है। ऐसे में शहरवासियों को नया मेयर मिलने के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है। सुजानपुर की तर्ज पर पठानकोट की जनता ने भी इस बार किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया। 50 वार्डों वाले निगम हाउस में भाजपा ने 22 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल का दर्जा हासिल किया, लेकिन अपना मेयर बनाने के लिए उसे अभी तीन और पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा।
कांग्रेस को लगा भारी झटका, ‘आप’ बनी किंगमेकर
वहीं, पिछले निगम चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस को इस बार बड़ा झटका लगा है। पिछली बार कांग्रेस ने 50 में से 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा को 12 और शिअद को 1 सीट मिली थी। हालांकि, बाद में कांग्रेस के चार पार्षद आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। इस बार कांग्रेस केवल 18 सीटों पर सिमट गई, जिससे उसे 19 सीटों का भारी नुकसान उठाना पड़ा।
दूसरी ओर, पहली बार निगम की सभी 50 सीटों पर चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी (आप) को 10 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। इनमें से दो सीटें भोआ हल्के के अधीन आती हैं। हालांकि ‘आप’ सत्ता से दूर जरूर रह गई है, लेकिन अब नगर निगम की सत्ता की कुंजी उसी के हाथ में मानी जा रही है।
शहर में राजनीतिक गतिविधियां होंगी तेज
चुनाव नतीजों के बाद शहर के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। यदि भाजपा या कांग्रेस निगम हाउस में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती हैं, तो उन्हें ‘आप’ का समर्थन हासिल करना पड़ सकता है। यही कारण है कि आने वाले दिनों में शहर के अंदर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
दिग्गजों की हार-जीत और नए समीकरण
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद शहर में राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अब सभी की निगाहें नगर निगम में बनने वाले नए राजनीतिक समीकरणों और मेयर पद पर टिकी हुई हैं।
वार्ड नंबर-21 और 35 की चर्चा: वार्ड नंबर-21 में ‘आप’ के हलका इंचार्ज विभूति शर्मा के बेटे विश्वकीर्ति ने भाजपा के बड़े नेता ठाकुर शमशेर सिंह को हराया।
हालांकि, वार्ड नंबर-20 में आप हलका इंचार्ज विभूति शर्मा की पत्नी कोमल के हाथ इस बार निराशा लगी, लेकिन बेटे ने इसकी भरपाई कर दी। वहीं, वार्ड नंबर-35 से मार्केट कमेटी के चेयरमैन व ‘आप’ के वरिष्ठ नेता विकास सैनी को हार का सामना करना पड़ा। इस वार्ड से कांग्रेस के लक्की पहलवान ने बाजी मारी। भोआ हलके में मंत्री कटारूचक्क ने 4 सीट जीत रिकॉर्ड बनाया
वार्ड नं. 23 में भाजपा रमेश शर्मा जीत नहीं सके, यहां पर उन्हें कांग्रेस के पवन कुमार लंबड़ ने 93 वोट से हराया। भाजपा ने भी अपना पुराना प्रदर्शन दोहराते हुए वार्ड नं. 9 में भाजपा के नमन महाजन, 10 में मित्री शर्मा, 11 में कुलदीप कुमार, 15 में नरेंद्र निंदो, 17 में नरेंद्र काला, 25 में हरीशपाल बिट्टू, 26 में ओमेश हंसराज, 27 में राकेश, 29 में तरसेम लाल, 31 में राकेश कुमार, 32 में रिंपी पुरी, 33 में राकेश कुमार, 34 में रितु ने जीत दर्ज की गई।
37 में पूर्व पार्षद सुरेश कुमार शर्मा पिंटू और 39 में विजय चूनी ने जीत हासिल कर निगम में वापसी की। 40 में नेहा अंदोत्रा और 41 में कुलदीप सिंह मन्हास विजेता रहे। 13 में कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए हरिंद्र सिंह सन्नी कलेयर का करिश्मा नहीं चला और वह विकास शर्मा से 198 वोट से हारे। इधर, भोआ हलके में कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने 5 में से 4 सीट जीतकर रिकॉर्ड बनाया है। यहां वार्ड-42 से आप की वीना कुमारी, 43 से बलजिंद्र कौर, 45 से हरीश कुमार गोरखा जीते।
वार्ड 1 में देर रात तक चला सियासी ड्रामा
वार्ड नं. 1 में सुबह से रात तक चले सियासी ड्रामा में आखिरकार भाजपा के बलविंद्र बिल्ला को 2 वोट से विजेता घोषित किया गया। यहां पर शुरुआती रुझानों में आप के बागी दीप मेहरा आगे चल रहे थे, लेकिन बाद में जतिन वालिया आगे चले गए। लीड तीसरे राउंड में बलविंद्र बिल्ला खींचकर ले गए। यहां पर दोपहर में 12 वोट से बलविंद्र बिल्ला आगे चल रहे थे और रिकाउंटिंग कराई गई जिसमें दीप मेहरा को बढ़त मिलने के बाद बार बार रिकाउंटिंग की मांग उठी जिस पर काउंटिंग को रोक दिया गया। यहां पर पंजाब भाजपा के प्रधान अश्वनी शर्मा भी अड़ गए।
देर रात तक सियासी ड्रामा चलता रहा। रात साढ़े 8 बजे बलविंद्र को 2 वोट से विजेता घोषित किया गया। बलविंद्र को 634, दीप मेहरा को 632 वोट और तीसरे नंबर रही हरप्रीत कौर को 603 मिले। इस बीच मतगणना केंद्र से बाहर आकर आप के कैंडिडेट हरप्रीत कौर वालिया के पति जतिन वालिया ने अपनी पार्टी के नेताओं पर पैसे लेकर हराने के आरोप लगाए और कहा कि धक्केशाही को नहीं चलने दिया गया तो भाजपा को समर्थन दिया गया और सच्चाई की जीत हुई है।
बेबी की सबसे बड़ी 1349 वोट से जीत
चुनाव में सबसे बड़ी जीत कांग्रेस की प्रत्याशी बेबी के नाम रही। उन्होंने वार्ड नंबर 22 से 1349 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज कर प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ दिया। वार्ड 48 से खड़ी कांग्रेस के पूर्व पार्षद नितिन महाजन लाडी की पत्नी की शैली महाजन ने 1094 वोटों के मार्जिन से अपनी सीट जीती। चुनाव से पहले आप छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए वार्ड नं. 4 से कांग्रेसी नेता गौरव वडैहरा की पत्नी प्रिया वडैहरा 872 से जीतीं।
सबसे छोटी जीत, वार्ड 45 में 1 वोट से हुआ फैसला
जीत का सबसे कम अंतर वार्ड नंबर 45 में देखने को मिला। यहाँ मुकाबला इतना कड़ा था कि हार-जीत का फैसला केवल 1 वोट से हुआ। पहले कांग्रेस की शालू भट्टी आगे चल रही थी, लेकिन रिकाउंटिंग में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी हरीश गोरखा 1 वोट से जीते। इसके अलावा वार्ड 46 में 22 वोट और वार्ड 2 में 26 वोटों का मामूली अंतर रहा।
सुजानपुर में भी आजाद उम्मीदवार “किंगमेकर”
सुजानपुर नगर काउंसिल का परिणाम बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला सामने आया है। 15 वार्डों वाली नगर काउंसिल में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिसके चलते अब सत्ता की चाबी तीन आजाद उम्मीदवारों के हाथ में आ गई है। जारी परिणामों के अनुसार आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और भाजपा तीनों दलों ने 4-4 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि 3 सीटों पर आजाद उम्मीदवार विजयी रहे हैं। ऐसे में नगर काउंसिल का प्रधान कौन बनेगा, इसका फैसला अब आजाद पार्षदों के समर्थन पर निर्भर करेगा।
राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस की संभावित बढ़त को लेकर हो रही है, क्योंकि स्थानीय कांग्रेसी विधायक का भी एक वोट रहेगा। इसी कारण कांग्रेस खेमे को सत्ता गठन की दौड़ में थोड़ा मजबूत माना जा रहा है। हालांकि भाजपा और आप भी आजाद उम्मीदवारों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार सुजानपुर में जनता ने किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत देने के बजाय “संतुलित जनादेश” दिया है। अब आने वाले दिनों में जोड़-तोड़, बैठकों और समर्थन के समीकरणों पर सबकी नजर रहेगी। तीन आजाद उम्मीदवारों का फैसला ही तय करेगा कि आखिर सुजानपुर नगर काउंसिल की सत्ता किस दल के हाथ में जाएगी।



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