योग से निरोग की राह: व्हीट एलर्जी,कैंसर, हार्ट डिजीज जैसी गंभीर चुनौतियों पर जीत,नियमित अभ्यास ने बदली तकदीर – Ludhiana News

योग से निरोग की राह: व्हीट एलर्जी,कैंसर, हार्ट डिजीज जैसी गंभीर चुनौतियों पर जीत,नियमित अभ्यास ने बदली तकदीर – Ludhiana News




भास्कर न्यूज. लुधियाना। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर शहर में ऐसे कई प्रेरणादायक उदाहरण सामने आए हैं, जिन्होंने यह साबित किया है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली की एक प्रभावी पद्धति भी है। आधुनिक जीवनशैली, तनाव, अनियमित खानपान और बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के बीच कई लोगों ने योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर गंभीर बीमारियों से लड़ने की शक्ति हासिल की है। शहर में ऐसे लोग मौजूद हैं, जिन्होंने व्हीट एलर्जी, आईबीएस, कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करते हुए योग और प्राणायाम के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। गंभीर बीमारी से खुद को किया ठीक, अब दूसरों को दे रही हूं जीवनदान साल 2017-18 के दौरान मैं गंभीर व्हीट एलर्जी (गेहूं से एलर्जी) और आईबीएस की समस्या का शिकार हो गई थी। मेरी हालत बहुत खराब हो चुकी थी। करीब नौ महीने तक मैं इस समस्या से जूझती रही। चिकित्सकों ने बताया कि मेरी एलर्जी वैल्यू सामान्य स्तर से कई गुना अधिक पहुंच चुकी है। डॉक्टरों ने यहां तक कह दिया था कि मैं भविष्य में गेहूं से बनी चीजें नहीं खा पाऊंगी। इसके बाद मैंने योग का सहारा लिया। करीब एक वर्ष तक लगातार श्वसन क्रियाएं, कपालभाति, अनुलोम-विलोम, सूर्यभेदी और चंद्रभेदी प्राणायाम का अभ्यास किया। नियमित अभ्यास और दृढ़ संकल्प का परिणाम यह रहा कि मेरी सेहत में लगातार सुधार होने लगा। आज 49 वर्ष की आयु में मैं सामान्य रूप से गेहूं से बनी चीजें खा पा रही हूं। मैं पेशे से ज्योतिषी हूं, लेकिन ठीक होते ही मैंने योग को समाजसेवा का माध्यम बना लिया। आज सराभा नगर पार्क में पिछले कई वर्षों से निशुल्क योग कक्षाएं चला रही हूं। मेरी कक्षाओं में प्रतिदिन 25 से 35 महिलाएं और बच्चे भाग लेते हैं। -दीपिका शर्मा, मॉडल ग्राम हार्ट वर्किंग 60 से घटकर 24% रह गई डॉक्टर बोले ‘क्रैश हो सकता है दिल’ दो वर्ष पहले मुझे हृदय से जुड़ी गंभीर बीमारी हो गई थी। मेरी हार्ट वर्किंग कैपेसिटी 60 प्रतिशत से घटकर केवल 24 प्रतिशत रह गई थी और दिल में पानी भरने की समस्या भी हो गई थी। स्थिति बेहद गंभीर थी। हालांकि मैं पिछले 25 वर्षों से योग कर रहा हूं, लेकिन बीमारी के बाद मैंने योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बना लिया। बीमारी के बाद मैंने अनुलोम-विलोम और कपालभाति के अभ्यास की अवधि और अनुशासन दोनों बढ़ा दिए। इसका मुझे बड़ा फायदा भी मिला। लगातार दो वर्षों तक नियमित योग और प्राणायाम से आज मैं सामान्य जीवन जी रहा हूं। वर्ष 2017 में मुझे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का भी सामना करना पड़ा था। उस दौरान भी योग ने मुझे मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाए रखा। मेरा मानना है कि योग ने मुझे कठिन परिस्थितियों से लड़ने का आत्मविश्वास दिया और स्वस्थ जीवन की ओर लौटने में मदद की। -नरेश गुप्ता, रखबाग



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