पंजाब में ड्रग सेंसस पर विवाद: शिक्षक बोले-गांवों में सम्मानजनक व्यवहार नहीं मिल रहा,विरोध से बढ़ी मुश्किलें – Ludhiana News

पंजाब में ड्रग सेंसस पर विवाद:  शिक्षक बोले-गांवों में सम्मानजनक व्यवहार नहीं मिल रहा,विरोध से बढ़ी मुश्किलें – Ludhiana News




पंजाब सरकार की ओर से शुरू की गई राज्य की पहली ‘ड्रग एंड सोशियो-इकोनॉमिक सेंसस’ (नशा एवं सामाजिक-आर्थिक जनगणना) को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सर्वेक्षण का जिम्मा संभाल रहे शिक्षकों का कहना है कि उन्हें गांवों में लोगों के विरोध, अपमानजनक टिप्पणियों और सवालों का सामना करना पड़ रहा है। नाम ना छापने की शर्त पर शिक्षकों के कहा कि कई जगह लोग सर्वे में सहयोग नहीं कर रहे हैं। खासकर उन इलाकों में, जहां परंपरागत रूप से कांग्रेस या शिरोमणि अकाली दल का प्रभाव रहा है, वहां उन्हें “विहले लोक” (खाली बैठे लोग) और “सरकारी प्रचारक” कहकर संबोधित किया जा रहा है। सर्वे के दौरान सामाजिक प्रतिष्ठा हो रही प्रभावित एक शिक्षक ने बताया कि वे पढ़ाने का काम करते हैं, लेकिन सर्वे के दौरान उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है। लोगों का व्यवहार ऐसा है जैसे वे किसी राजनीतिक दल का प्रचार करने आए हों। योजनाओं से जुड़े सवालों पर उठे सवाल राज्य सरकार ने यह सर्वे नशे की समस्या की वास्तविक स्थिति जानने के उद्देश्य से शुरू किया है। हालांकि, शिक्षकों का कहना है कि प्रश्नावली में बड़ी संख्या में सवाल सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े हैं। इनमें मुफ्त बिजली, तीर्थ यात्रा योजना, स्वास्थ्य बीमा, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और आम आदमी क्लीनिक जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसी वजह से विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अपनी योजनाओं पर जनता की राय जानने और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। शिक्षकों ने उठाया कानूनी सवाल बरनाला के एक शिक्षक ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के सेवा एवं आचरण नियम स्पष्ट रूप से किसी राजनीतिक दल के प्रचार या उससे जुड़ाव की अनुमति नहीं देते। ऐसे में यदि सर्वे के दौरान सरकार की योजनाओं पर प्रतिक्रिया ली जा रही है तो यह कानूनी रूप से उचित है या नहीं, इस पर सवाल खड़े होते हैं। गांवों में विरोध से बढ़ी परेशानी मोगा जिले के एक शिक्षक ने बताया कि कई गांवों में उन्हें सम्मानजनक व्यवहार नहीं मिल रहा। लोग उन्हें देखकर तंज कसते हैं और कहते हैं कि “लो, फिर आ गए विहले लोक।” शिक्षकों का कहना है कि सर्वे का काम उनके लिए चुनौतीपूर्ण बन गया है और उन्हें मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उधर, सरकार का कहना है कि यह सर्वे राज्य में नशे की समस्या की जमीनी हकीकत जानने और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का व्यापक आकलन करने के लिए कराया जा रहा है।



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