लुधियाना जेल में हवालाती की मौत, कोर्ट ने रोका पोस्टमार्टम: रिटायर्ड मेजर की कोठी पर कब्जा करने के आरोप में था बंद, शव लेने नहीं पहुंचे वारिस – Ludhiana News

लुधियाना जेल में हवालाती की मौत, कोर्ट ने रोका पोस्टमार्टम:  रिटायर्ड मेजर की कोठी पर कब्जा करने के आरोप में था बंद, शव लेने नहीं पहुंचे वारिस – Ludhiana News




पंजाब की लुधियाना सेंट्रल जेल से बंद एक विचाराधीन कैदी (हवालाती) सुखविंदर सिंह की मौत हो गई। जेल प्रशासन ने सुखविंदर का शव सिविल अस्पताल की मॉर्चरी में रखवाया और इसकी सूचना इलाका मजिस्ट्रेट की कोर्ट में दी। सेंट्रल जेल के सुपरिंटेंडेंट ने हवालाती के शव का पोस्टमार्टम करवाने की अनुमति मांगी थी। जेल सुपरिंटेंडेंट के आवेदन के बाद इलाका मजिस्ट्रेट सिविल अस्पताल की मॉर्चरी में देर रात पहुंचे और उन्होंने शव का पोस्टमार्टम करने पर रोक लगा दी। दरअसल, हवालाती का कोई भी रिश्तेदार या परिवार का सदस्य सामने नहीं आया है। हवालाती की मौत नौ जून को हुई और उन्होंने इस संबंध में संबंधित थाने को भी सूचना दे दी।इसके बावजूद हवालाती के परिजन कोई भी नहीं पहुंचे। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास करनबीर सिंह बत्रा ने शव के पोस्टमार्टम पर 72 घंटे के लिए रोक लगा दी है। अदालत ने पुलिस और जेल प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस दौरान हर हाल में मृतक के परिजनों की तलाश की जाए, ताकि उनकी मौजूदगी में ही आगे की कार्रवाई हो सके। जेल में सुबह बिगड़ी तबीयत, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया जेल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक हवालाती की पहचान सुखविंदर सिंह के रूप में हुई है, जो मूल रूप से जिला गुरदासपुर के बटाला के अंतर्गत आते गांव किला लाल सिंह का रहने वाला था। वह लुधियाना के थाना डिवीजन नंबर 5 में दर्ज एक आपराधिक मामले में पिछले साल मई महीने से लुधियाना सेंट्रल जेल में बंद था। 9 जून 2026 की सुबह करीब 06:35 बजे जेल के अंदर सुखविंदर सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ गई। बैरक में मौजूद अन्य बंदियों और जेल वार्डन ने तुरंत इसकी सूचना जेल के मेडिकल स्टाफ को दी। उसे तुरंत जेल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। अदालत ने क्यों रोका पोस्टमार्टम, वजह जानिए… किस मामले में कैद था आरोपी, पूरा मामला जानिए… प्रॉपर्टी विवाद से जुड़ा था मामला: जिस सुखविंदर सिंह की जेल में मौत हुई है, वह लुधियाना के एक बेहद चर्चित और हाई-प्रोफाइल प्रॉपर्टी विवाद व हमले के मामले में सह-आरोपी था। यह पूरा विवाद लुधियाना के मुख्य बस स्टैंड रोड पर स्थित अशोक नगर की एक बेशकीमती कोठी से जुड़ा हुआ था। दिल्ली के बुजुर्ग मालिक की कोठी पर नजर: एफआईआर के मुताबिक इस संपत्ति के असली मालिक भारतीय सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी मेजर सुरिंदरपाल सिंह गिल हैं, जो वर्तमान में दिल्ली में रहते हैं। यह प्रॉपर्टी उन्हें वर्ष 1952 में आवंटित हुई थी। मेजर गिल ने अपनी कोठी की देखभाल के लिए शंभू नाम का एक माली-सह-नौकर रखा हुआ था, जो अपनी पत्नी कंचन और बच्चों के साथ वहीं रहता था। 15 गुंडों के साथ जबरन घुसपैठ: 26 अप्रैल 2025 की रात करीब 10:15 बजे, 10 से 15 अज्ञात बदमाशों ने इस कोठी पर कब्जा करने की नीयत से हथियारों के साथ ‘क्रिमिनल ट्रेसपास’ किया। इन बदमाशों ने केयरटेकर शंभू के परिवार को बंधक बना लिया, उनके घर का सारा सामान तहस-नहस कर दिया और शंभू व उसकी पत्नी के साथ बुरी तरह मारपीट की। पुलिस के सामने लगाए ताले भी तोड़ डाले: वारदात के बाद पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए 28 अप्रैल 2025 को एक एफआईआर दर्ज की। इसके बाद मेजर गिल दिल्ली से लुधियाना पहुंचे और पुलिस की मौजूदगी में कोठी के मुख्य गेट पर दो मजबूत ताले लगा दिए। लेकिन आरोपियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने पुलिस के सामने लगाए गए उन दोनों तालों को भी कटर से काट दिया और दोबारा कब्जा करने की कोशिश की। जब मेजर गिल अपनी बेटी दिवस गिल और दामाद ब्रिन देसाई के साथ दोबारा वहां पहुंचे, तो ताले टूटे देख उनके होश उड़ गए। इसके बाद पुलिस ने वर्तमान मुख्य मुकदमा दर्ज किया, जिसमें सुखविंदर सिंह को 3 मई 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। आरोपी पर लगी थीप ये धाराएं : लुधियाना पुलिस के थाना डिवीजन नंबर 5 ने इस मामले में सुखविंदर सिंह और उसके साथियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत बेहद गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया था। आरोपी पर धारा 333( जबरन किसी की संपत्ति में घुसकर तोड़फोड़ और कब्जा करने का प्रयास करना), धारा 191(3) व 190: (घातक हथियारों के साथ गैर-कानूनी रूप से इकट्ठा होना और दंगा भड़काना ), धारा 351(2) ( किसी को जान से मारने की नीयत से आपराधिक रूप से डराना और धमकाना।), धारा 324(4) (धारदार या खतरनाक हथियारों से किसी को गंभीर चोट पहुंचाना ) केस दर्ज किया था। जमानत के लिए हाईकोर्ट तक गया था सुखविंदर जेल में बंद रहने के दौरान सुखविंदर सिंह ने अपनी रिहाई के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी थी। लुधियाना की सेशन कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उसने अपने वकील के माध्यम से पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसे वहां से भी राहत नहीं मिली थी।



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