रॉयल एस्टेट ग्रुप के दो प्रमोटर गिरफ्तार: ₹32.67 करोड़ चेक बाउंस और फंड डायवर्जन मामला, कुछ दिन पहले पंजाब-चंडीगढ़ में हुई थी रेड – Chandigarh News
मोहाली-जीरकपुर क्षेत्र में रॉयल एस्टेट ग्रुप के प्रमोटर प्रवीण कंसल और नीरज कंसल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार देर शाम दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई हाल ही में पंजाब, चंडीगढ़ और जीरकपुर में समूह से जुड़े ठिकानों पर हुई छापेमारी के बाद की गई है। ED ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की है। ED की जांच मेसर्स चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड (CRCPL)) और रॉयल एस्टेट ग्रुप से जुड़े वित्तीय लेन-देन को लेकर चल रही है। कुछ दिन पहले एजेंसी ने जीरकपुर स्थित समूह के मुख्य कार्यालय समेत निदेशकों और सहयोगियों के घरों पर तलाशी अभियान चलाया था। पंजाब पुलिस ने दर्ज किया था मामला जांच एजेंसी के अनुसार मामला पंजाब पुलिस द्वारा 19 जुलाई 2025 को एसएएस नगर (मोहाली) में दर्ज FIR पर आधारित है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 420 और 120-बी के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए थे। GMADA को भुगतान में डिफॉल्ट का आरोप जांच में सामने आया कि कंपनी मोहाली के कराला गांव में एक आवासीय कॉलोनी विकसित कर रही थी। आरोप है कि कंपनी ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) के प्रति अपनी वैधानिक देनदारियों का भुगतान नहीं किया और 32.67 करोड़ रुपए के चेक जारी किए, जो बाद में बाउंस हो गए। ED का दावा है कि कंपनी पर GMADA की बड़ी बकाया राशि थी। इसके बावजूद परियोजना से जुड़े फंड को अन्य संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर किया गया। जांच में कई संदिग्ध अंतर-कंपनी लेन-देन और फंड की लेयरिंग के संकेत भी मिले हैं। वहीं फर्जी दस्तावेज के जरिए गमाडा से सीएलयू लेने का मामला भी सामने आया है। कई ठिकानों पर छापेमारी ED ने प्रवीण कंसल, नीरज कंसल, दलजीत सिंह, अनुराग मिधा, लियाकत अली, सुमित बंसल और अन्य संबंधित व्यक्तियों व संस्थाओं से जुड़े परिसरों पर तलाशी ली। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्तियों से जुड़े कागजात जब्त किए गए। रियल एस्टेट सेक्टर पर बढ़ी निगरानी मोहाली-जीरकपुर क्षेत्र में पिछले कुछ समय से रियल एस्टेट परियोजनाओं में देरी, वित्तीय अनियमितताओं और विकास प्राधिकरणों के बकाया भुगतान को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे मामलों पर एजेंसियों की निगरानी बढ़ गई है और कई परियोजनाएं जांच के दायरे में हैं।
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