कास्टिंग इंडस्ट्री को 30 सितंबर तक नई टेक्नोलॉजी इंस्टाल करनी होगी – Jalandhar News

कास्टिंग इंडस्ट्री को 30 सितंबर तक नई टेक्नोलॉजी इंस्टाल करनी होगी – Jalandhar News



भास्कर न्यूज | जालंधर शहर में प्रदूषण रोकने के लिए कास्टिंग इंडस्ट्री को 30 सितंबर तक नई टेक्नोलॉजी इंस्टाल करनी होगी। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य में चल रही इंडक्शन फर्नेस इकाइयों यानी लोहा व स्टील गलाने वाली मिलों से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए एक बड़ा और कड़ा आदेश जारी किया था। अब इसकी डेडलाइन नजदीक आने के बाद जालंधर की इंडस्ट्री के लोग नई टेक्नोलॉजी को समझने में व्यस्त हैं। अब केवल अंतिम 4 महीने ही हर इंडस्ट्री के पास हैं, जब डेडलाइन से पहले नए उपकरण लगाने होंगे। फैक्ट्रियों के भीतर और हवा में फैलने वाले सेकेंडरी एमिशन को रोकने के लिए नया सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए बाकायदा 30 सितंबर की डेडलाइन तय की गई है। अगर इस तारीख तक नया सिस्टम नहीं लगा, तो उद्योगों को प्रदूषण बोर्ड से मिलने वाली कॉन्सेप्ट टू ऑपरेट यानी फैक्ट्री चलाने की मंजूरी नहीं मिलेगी। सबसे पहले समझें, आखिर क्या होता है सेकेंडरी एमिशन जिसके लिए यह आदेश आया? उ.अब तक की स्थिति (प्राइमरी एमिशन) : पंजाब की फर्नेस इकाइयां 2018 के नियमों के तहत साइड सेक्शन हुड सिस्टम चलाती हैं, जो केवल भट्टी में लोहा पिघलने के दौरान धुआं रोकता है। इसे प्राइमरी एमिशन कहते हैं। प्र. दिक्कत कहां आ रही थी? उ. भट्टी से पिघला लोहा सांचे में डालते समय भारी मात्रा में जहरीला धुआं और कण निकलते हैं, जिसे मौजूदा सिस्टम रोक नहीं पाता। यही सेकेंडरी एमिशन है, जो पूरी फैक्ट्री और बाहर प्रदूषण फैलाता है। प्र. सरकार और प्रदूषण बोर्ड ने इसका क्या समाधान निकाला है? उ. पीपीसीबी ने पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी से तकनीकी समाधान तैयार कराया है। इसके तहत मौजूदा फैक्ट्रियों को तीन तय तकनीकों में से एक चुनकर रेट्रो-फिटिंग करनी होगी। प्र. डाग हाउस एमिशन कंटोनमेंट सिस्टम लगाना है? उ. नई फैक्ट्रियों (ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स) के लिए केवल डॉग हाउस सिस्टम अनिवार्य है, जो प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों तरह के धुएं को पूरी तरह सोख लेगा। प्र. जालंधर की फर्नेस इंडस्ट्री पर इसका क्या और कैसा असर पड़ेगा? जालंधर पंजाब का प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, इसलिए यहाँ के स्क्रैप और स्टील फर्नेस उद्योगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। प्र. डिजाइन और तकनीकी बदलाव कितने संभव? उ. मौजूदा फर्नेस इकाइयों को अपनी फैक्ट्रियों के डिजाइन में बदलाव कर चंडीगढ़ स्थित पीएससीएसटी से विशेष डिजाइन पास करवाना होगा। प्र. सख्त प्रक्रिया? उ. अब फर्नेस इकाई चलाने की मंजूरी रिन्यू कराने या नई लेने के लिए आवेदन के साथ काम पूरा करने का टाइमलाइन शेड्यूल देना होगा। प्र. एडवांस पेमेंट की शर्त, सिर्फ कागजी दावा नहीं चलेगा? उ. उद्योगपतियों को मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के वर्क ऑर्डर की कॉपी और 10% एडवांस पेमेंट की रसीद बोर्ड के पास जमा करानी होगी, तभी फाइल आगे बढ़ेगी। प्र. बड़ी इकाईयो के लिए नियम क्या हैं? उ. सालाना 60,000 मीट्रिक टन से अधिक क्षमता वाली या विस्तार कर रही इकाइयों को बिना सेकेंडरी सिस्टम के पर्यावरण मंजूरी नहीं मिलेगी। प्र. जालंधर में इसकी निगरानी कौन करेगा? उ. बोर्ड ने इसकी सीधी निगरानी और जिम्मेदारी क्षेत्रीय अधिकारियों को सौंपी है। प्र. नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर बोर्ड आने वाले दिनों में सख्ती से तालाबंदी या पेनल्टी की कार्रवाई भी कर सकता है। उ. अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि 30 सितंबर 2026 तक सभी इकाइयां इसे अपना लें, अन्यथा उल्लंघन पर तालाबंदी या पेनल्टी होगी।



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