लुधियाना के रसूखदार नहीं देते वाटर-सीवर बिल: आरटीआई से खुलासा; नगर निगम ZONE-D में 56,681 डिफाल्टरों पर 87.44 करोड़ रुपए बकाया – Ludhiana News

लुधियाना के रसूखदार नहीं देते वाटर-सीवर बिल:  आरटीआई से खुलासा; नगर निगम ZONE-D में 56,681 डिफाल्टरों पर 87.44 करोड़ रुपए बकाया – Ludhiana News




लुधियाना शहर के पॉश एरिया में रहने वाले रसूखदारी वाटर-सीवर के बिल जमा नहीं करवाते हैं। नगर निगम के अफसर भी इन रसूखदारों से बकाया वाटर-सीवर के बिल वसूलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। बिल जमा न करवाने पर नगर निगम के ZONE-D दफ्तर ने इस एरिया के 56681 वाटर-सीवर कनेक्शनों को डिफॉल्टर घोषित कर दिया है। नगर निगम जोन डी की ओएंडएम ब्रांच ने 56681 कनेक्शनों पर 87.44 करोड़ रुपए बिल बकाया है। बिल जमा न रकवाने वालों में बीआरएस नगर, सराभा नगर, गुरदेव नगर, मॉडल टाउन इलाकों के कई लोग शामिल हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब आरटीआई एक्टिविस्ट रोहित सभ्रवाल ने नगर निगम के चारों जोनों से वाटर-सीवर के डिफॉल्टरों की जानकारी मांगी थी। नगर निगम ने अभी तक सिर्फ जोन-डी की रिपोर्ट ही रोहित सभ्रवाल को दी है। चौकानें वाली बात यह है कि जोन डी में वाटर-सीवरेज के बिलों का यह बकाया एक दो साल नहीं बल्कि कई सालों का है। 87.44 करोड़ में से 44.49 करोड़ रुपए 2022 से पहले का है और 42.92 करोड़ रुपए 2022 से दो जून 2024 तक का है। आरटीआई से मिली सूची की अहम बातें, जानिए…. वसूली के लिए बनाई थी स्पेशल कंपनी नगर निगम के पास मुलाजिमों को समय पर सेलरी देने के लिए पैसे नहीं होते और करोड़ों रुपए नगर निगम लोगों से वसूल नहीं कर पा रहा है। वाटर-सीवर की वसूली को लेकर निगम अफसर हमेशा से शिथिल रहे हैं। इसीलिए वसूली तेज करने के लिए नगर निगम ने 2022 में ‘लुधियाना अर्बन वॉटर वेस्टवॉटर मैनेजमेंट लिमिटेड’ (LUWWML) नाम की एक विशेष कंपनी का गठन किया गया ताकि समय पर बिलों की वसूली हो। लेकिन यह कंपनी भी निगम अफसरों के पद्चिह्नों पर चलती रही और चार साल में ही कंपनी भी 42.92 करोड़ रुपए वसूल नहीं कर पाई। घरेलू ही नहीं, कमर्शियल डिफाल्टरों पर भी मेहरबान है निगम रोहित सभ्रवाल का कहना है कि गरीब इलाकों में अगर किसी का पानी-सीवर का बिल बकाया तो तो निगम अफसर तुरंत कनैक्शन बंद करने पहुंच जाते हैं। जोन डी एरिया में ज्यादातर पॉश एरिया हैं ऐसे में नगर निगम भी इनसे बिल वसूलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है। लुधियाना के पॉश एरिया में चलने वाले कमर्शियल संस्थान भी पानी-सीवर का बिल जमा नहीं कर रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि अफसर निजी स्वार्थ के लिए पानी-सीवर का बिल वसूल नहीं कर रहे। एक्टिविस्ट बोले- बाकी तीन जोनों का डेटा छुपा रहा निगम सिर्फ एक ज़ोन की अधूरी रिपोर्ट मिलने के बाद आरटीआई एक्टिविस्ट रोहित सभ्रवाल ने एक बार फिर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने निगम कमिश्नर और संबंधित अधिकारियों को दोबारा एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने साफ तौर पर मांग की है कि उन्हें बाकी बचे तीन जोनों (ज़ोन ए, बी और सी) की भी पूरी और विस्तृत जानकारी तुरंत मुहैया करवाई जाए। उन्होंने कहा कि निगम अफसर बाकी तीन जोनों का डेटा छुपा रहे हैं। रोहित सभरवाल का कहना है कि जब सिर्फ एक ज़ोन-डी में ही डिफाल्टरों का आंकड़ा 56 हजार के पार है और बकाया राशि 87.44 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, तो पूरे लुधियाना शहर का कुल आंकड़ा बहुत ज्यादा हो सकता है। अंदेशा जताया जा रहा है कि अगर चारों जोनों का कुल बकाया जोड़ा जाए, तो यह राशि 150 करोड़ से भी ज्यादा होगी। लापरवाह अफसरों की जिम्मेदारी फिक्स करने की मांग रोहित सभ्रवाल ने अपने पत्र में केवल डेटा ही नहीं मांगा, बल्कि उन्होंने नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों से उन लापरवाह अफसरों की जवाबदेही तय करने को कहा है जिनकी नाक के नीचे सालों से यह रिकवरी रुकी हुई है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले में ‘जिम्मेदारी फिक्स’ की जाए कि आखिर किस अधिकारी की ड्यूटी के दौरान कितनी राशि पेंडिंग रही।



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