कैप्टन ने ढिल्लों को BJP प्रधान बनाने का विरोध किया: बोले- राजनीतिक क्षमता नहीं, जाखड़-शर्मा को हटाना गलत, कांग्रेस में राय ली जाती थी – Ludhiana News
पूर्व CM कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जट्टसिख नेता केवल ढिल्लों को पंजाब BJP का प्रदेश प्रधान बनाने का विरोध किया है। कैप्टन ने इस फैसले पर नाराजगी भी जताई है। एक इंटरव्यू में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजनीतिक क्षमता के मामले में वे पंजाब भाजपा का नेतृत्व करने के लिए सही विकल्प नहीं हैं। कैप्टन ने कहा कि केवल ढिल्लो को प्रधान बनाने के लिए उन्हें पूछा तक नहीं गया। ढिल्लो मेरे पुराने मित्र हैं, लेकिन दोस्ती होना अपनी जगह है और राजनीतिक क्षमता अपनी जगह है। उन्होंने कहा कि सुनील जाखड़ और अश्वनी शर्मा को हटाने की जरूरत नहीं थी। दोनों अच्छे ढंग से काम कर रहे थे। कैप्टन ने कहा कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब ढिल्लों सक्रिय जरूर थे, लेकिन जमीन (फील्ड) पर उनका प्रदर्शन वैसा नहीं रहा, जैसा होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि मुझे दरकिनार किए जाने पर लगा झटका लगा है। कांग्रेस में मेरी राय ली जाती थी। कांग्रेस और भाजपा की कार्यसंस्कृति की तुलना करते हुए कैप्टन ने कहा कि मैं कांग्रेस में तीन बार अध्यक्ष रहा और वहां हमेशा मुझसे सलाह ली जाती थी। लेकिन भाजपा में पूरी तरह अलग संस्कृति है। यहां बस फैसला ऊपर से आता है, किसी से पूछा नहीं जाता। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सुनील जाखड़ और अश्वनी शर्मा जैसे पुराने और मजबूत स्तंभों को पद से क्यों हटाया गया। दलितों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण
कैप्टन ने कहा कि यह फैसला अभी दो दिन पहले हुआ है, आने वाले दिनों में इसके परिणाम दिखेंगे, लेकिन लंबे समय से राजनीति में जुड़े लोग निश्चित रूप से इससे प्रभावित और आहत हैं। भाजपा द्वारा आगामी चुनावों के मद्देनजर किए गए जातिगत कार्ड (जाट सिख चेहरे की नियुक्ति) पर टिप्पणी करते हुए कैप्टन ने कहा, “अंत में वोटिंग पैटर्न मायने रखता है। दलितों की भूमिका पंजाब में बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन पार्टी को जाति या समुदाय के आधार पर संकीर्ण सोच रखने के बजाय यह सोचना चाहिए कि पंजाब की भलाई के लिए क्या सही है।” अकाली दल से गठबंधन की वकालत
कैप्टन ने एक बार फिर दोहराया कि वे पंजाब की स्थिरता और सुरक्षा के लिए भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच गठबंधन के पक्ष में हैं। उन्होंने हाल ही में नगर निकाय चुनावों में भाजपा के खराब प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि बिना जमीनी बुनियाद मजबूत किए पार्टी अकेले चुनाव नहीं जीत सकती। वहीं, सूबे की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि ‘आप’ सरकार चलाना नहीं जानती। दिल्ली से अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया फाइलें साइन करते हैं और पंजाब के विधायकों की कोई भूमिका नहीं है। हम इस खबर को अपडेट कर रहे हैं…
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