मोहाली में कनाडा भेजने के नाम पर 13 लाख ठगे: यूपी का युवक हुआ शिकार, जाली पासपोर्ट रिक्वेस्ट दिखाई, चंडीगढ़ में बायोमेट्रिक्स करवाए – Mohali News

मोहाली में कनाडा भेजने के नाम पर 13 लाख ठगे:  यूपी का युवक हुआ शिकार, जाली पासपोर्ट रिक्वेस्ट दिखाई, चंडीगढ़ में बायोमेट्रिक्स करवाए – Mohali News




पंजाब के मोहाली मे उत्तर प्रदेश के युवक से कनाडा के वर्क वीजा दिलाने के नाम पर 13,60 लाख की ठगी हई। पुलिस ने मोहाली के फेज-3ए स्थित कंपनी के मालिक अमरजीत सिंह के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी और इमिग्रेशन एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी है कि ठगी के पास पीड़ित का उसका असली पासपोर्ट भी रख लिया। आरोपियों पर बीएनएस की धारा 316(2) आपराधिक विश्वासघात,3 18(4) धोखाधड़ी और इमिग्रेशन एक्ट 1983 की धारा 24 अवैध रूप से मानव तस्करी/कंसलटेंसी चलान की धारा लगाई है। पांच प्वाइंट में जानिए कैसे युवक को ठगी का शिकार बनाया गया कनाडा वर्क वीजा का झांसा: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले दीपक जायसवाल (हाल निवासी: सनी एनक्लेव, खरड़) ने पुलिस शिकायत दर्ज करवाई है कि उन्होंने कनाडा के वर्क वीजा के लिए मोहाली के सेक्टर-53 (फेज-3ए) स्थित ‘वीजा पैलेस’ कंसलटेंसी से संपर्क किया था। शुरुआत में लिए 7 लाख: कंसलटेंसी ने मुलाकात के बाद बताया कि उसे सही तरीके से बाहर पहुंचा देंगे। उन्हें पूरी तरह सही तरीके से वीजा लगवाने का भरोसा दिया और शुरुआत में ₹7,00,000 वसूल कर लिए। दिखाया जाली पासपोर्ट रिक्वेस्ट (PPR) लेटर: पैसे लेने के बाद आरोपी ने दीपक को एक डॉक्यूमेंट दिखाया और दावा किया कि यह कनाडा अंबेसी से आया ‘पासपोर्ट रिक्वेस्ट’ (PPR) लेटर है। इस झांसे में आकर दीपक ने ₹3,00,000 और दे दिए, जिससे कुल रकम 10 लाख हो गई। सुपर प्रायोरिटी के नाम पर फिर ठगे 3.60 लाख: इसके बाद दीपक का चंडीगढ़ वीएफएस (VFS) ऑफिस में बायोमेट्रिक्स करवाया गया और वीजा स्टैम्पिंग के बहाने उनका ओरिजिनल पासपोर्ट जमा करवा लिया गया। चार दिन बाद आरोपियों ने ‘सुपर प्रायोरिटी वीजा’ के जरिए एक हफ्ते में वीजा दिलाने का दावा करते हुए ₹3,60,000 और ऐंठ लिए। न वीजा मिला और न ही पासपोर्ट : पीड़ित दीपक जायसवाल के मुताबिक, कुल 13.60 लाख रुपए देने और एक महीना बीत जाने के बाद भी उन्हें न तो वीजा मिला और न ही उनका असली पासपोर्ट वापस किया गया। जब उन्होंने ऑफिस से संपर्क करने की कोशिश की, तो कंसलटेंसी के लोग बहाने बनाने लगे और बातचीत बंद कर दी। मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान झेलने के बाद पीड़ित ने इसकी शिकायत पुलिस के उच्चाधिकारियों से की



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