चंडीगढ़ मेयर बोले- हमसे ज्यादा ताकत चपरासी: चुनाव-5 साल के कार्यकाल की मांग, ऋषिकेश में राष्ट्रीय सम्मेलन में उठी नगर निगमों को अधिकार की मांग – Chandigarh News
उत्तराखंड के ऋषिकेश में आयोजित अखिल भारतीय महापौर परिषद के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने मेयरों की सीमित शक्तियों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। देशभर के करीब 60 शहरों के मेयरों की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि कई बार मेयर की स्थिति ऐसी होती है कि उससे ज्यादा प्रभावी तो कार्यालय का चपरासी होता है, क्योंकि वह काम करवा सकता है, जबकि मेयर के पास पर्याप्त अधिकार नहीं होते। जोशी ने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों में मेयरों का कार्यकाल अलग-अलग है। कहीं एक साल, कहीं ढाई साल और कहीं पांच साल का कार्यकाल है। इससे नगर निगमों के कामकाज और विकास योजनाओं पर असर पड़ता है। उन्होंने मांग की कि पूरे देश में मेयर का कार्यकाल पांच साल तय किया जाए और मेयर का चुनाव सीधे जनता द्वारा कराया जाए। साथ ही सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल भी पांच साल का होना चाहिए। नगर निगमों को मिले ज्यादा अधिकार और फंड सम्मेलन में जोशी ने कहा कि जब तक संवैधानिक स्तर पर बदलाव नहीं होंगे, तब तक स्थानीय निकायों में राज्य सरकारों का हस्तक्षेप बना रहेगा। उन्होंने मांग की कि वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार राजस्व का एक निश्चित हिस्सा सीधे नगर निगमों और स्थानीय निकायों को दिया जाए, ताकि वे विकास कार्यों को बेहतर तरीके से कर सकें। सौरभ जोशी ने देशभर के मेयरों के लिए नेशनल अर्बन पार्लियामेंट बनाने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा कि साल में दो बार देश के मेयरों की प्रधानमंत्री या गृह मंत्री के साथ सीधी बैठक होनी चाहिए, ताकि शहरों की समस्याओं और जरूरतों पर चर्चा की जा सके। ‘वन सिटी, वन कमांड’ की वकालत जोशी ने ‘वन सिटी, वन कमांड’ का विजन रखते हुए कहा कि किसी भी शहर में एक ही निर्वाचित प्राधिकरण होना चाहिए और उसकी जवाबदेही सीधे मेयर के प्रति तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शहरों के विकास के लिए सिर्फ समय नहीं, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति और अधिकार भी जरूरी हैं। बिना दांत वाले शेर जैसे हैं मेयर मेयर ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में मेयर “बिना दांत वाले शेर” की तरह हैं, क्योंकि उनके पास वास्तविक प्रशासनिक शक्तियां नहीं हैं। कई मामलों में उनकी बात तक नहीं सुनी जाती। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में फंड और प्रशासनिक अधिकारों पर आईएएस अधिकारियों का नियंत्रण रहता है, जिससे मेयर लोगों के काम और विकास परियोजनाओं को अपेक्षित गति नहीं दे पाते। जोशी ने यह भी कहा कि चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा दोनों की राजधानी है, लेकिन इसके बावजूद शहर को दोनों राज्यों से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिलती। ऐसे में स्थानीय निकायों को मजबूत किए बिना शहरी विकास को गति देना मुश्किल है।
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