जोबनप्रीत की रिहाई में देरी का मामला हाईकोर्ट पहुंचा: पिता ने याचिका की दायर; अधिकारियों पर अवमानना का लगाया आरोप – Chandigarh News
जोबनप्रीत सिंह की गिरफ्तारी को अवैध घोषित कर तत्काल रिहाई के आदेश दिए जाने के बाद अब यह मामला एक नए कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। जोबनप्रीत के पिता मुखवंत सिंह ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद उनके बेटे को समय पर रिहा नहीं किया गया। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिस अधिकारियों ने उसकी दोबारा गिरफ्तारी की तैयारी कर ली थी। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस संजीव वशिष्ठ की अदालत ने याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं दी। कोर्ट ने अवमानना याचिका को वापस लेने की छूट देते हुए खारिज कर दिया और याची को उचित राहत के लिए संबंधित इलाका मजिस्ट्रेट के समक्ष जाने की सलाह दी। हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी को बताया था अवैध दायर याचिका में कहा गया है कि 3 जून 2026 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान जोबनप्रीत सिंह की गिरफ्तारी और हिरासत को संविधान के अनुच्छेद 21 और 22(1) का उल्लंघन मानते हुए अवैध घोषित किया था। अदालत ने उसकी तत्काल रिहाई के आदेश जारी किए थे। हालांकि, राज्य सरकार को कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने की स्वतंत्रता भी दी गई थी। जेल के बाहर इंतजार करता रहा परिवार याचिकाकर्ता के अनुसार, 4 जून को हाईकोर्ट का आदेश अपलोड होने के बाद परिवार के सदस्य केंद्रीय जेल अमृतसर के बाहर जोबनप्रीत की रिहाई का इंतजार करते रहे। आरोप है कि शाम करीब छह से सात बजे के बीच परिवार के वकील ने जेल प्रशासन को अदालत का आदेश दिखाया, लेकिन जेल सुपरिंटेंडेंट राजीव कुमार अरोड़ा ने यह कहते हुए रिहाई से इनकार कर दिया कि उन्हें आदेश की आधिकारिक प्रति प्राप्त नहीं हुई है। याचिका में कहा गया है कि जेल अधिकारियों से हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध आदेश का सत्यापन करने का अनुरोध भी किया गया, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। परिवार का आरोप है कि अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद जोबनप्रीत को जेल से बाहर नहीं आने दिया गया। दोबारा गिरफ्तारी की कोशिश का आरोप याचिका में पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। दावा किया गया है कि इसी दौरान डीएसपी कमलमीत सिंह के निर्देश पर एसएचओ नरेश कुमार केंद्रीय जेल अमृतसर पहुंचे और जोबनप्रीत सिंह को आर्म्स एक्ट के एक मामले में दोबारा गिरफ्तार करने का प्रयास किया। याचिकाकर्ता का कहना है कि आर्म्स एक्ट की धाराएं बाद में जोड़ी गई थीं और उस समय तक पुलिस रिमांड भी समाप्त हो चुकी थी। ऐसे में बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति और गिरफ्तारी के लिखित आधार उपलब्ध कराए दोबारा गिरफ्तारी का कोई कानूनी आधार नहीं था। तस्वीरें-दस्तावेज भी रिकॉर्ड पर रखने का दावा अवमानना याचिका में यह भी कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों की जेल परिसर में मौजूदगी से संबंधित तस्वीरें और अन्य दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखे गए हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि ये दस्तावेज इस बात की पुष्टि करते हैं कि अदालत के आदेश के बाद भी नई गिरफ्तारी की कार्रवाई की तैयारी की जा रही थी। 3 अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग मुखवंत सिंह ने अपनी याचिका में एसएचओ नरेश कुमार, डीएसपी कमलमीत सिंह और केंद्रीय जेल अमृतसर के सुपरिंटेंडेंट राजीव कुमार अरोड़ा को अवमानना का दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि तीनों अधिकारियों ने मिलकर अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना की, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा प्रभावित हुई। याचिकाकर्ता ने अदालत से संबंधित अधिकारियों को तलब कर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने, जोबनप्रीत सिंह की रिहाई सुनिश्चित करने तथा भविष्य में किसी भी नई गिरफ्तारी से पहले कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक अनुमति का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी करने की मांग की थी।
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