चंडीगढ़ क्रेस्ट की वेबसाइट पर गिरफ्तार अधिकारी CEO: 17 जून को CBI ने किया था अरेस्ट, घोटाले के आरोप में भेजा जेल – Chandigarh News
चंडीगढ़ क्रेस्ट घोटाले में जांच करती सीबीआई
चंडीगढ़ क्रेस्ट घोटाले में गिरफ्तार आईएफएस अधिकारी नवनीत कुमार श्रीवास्तव को अभी भी वेबसाइट पर क्रेस्ट का सीईओ दिखाया गया है। वहीं असिस्टेंट सीईओ के पद पर भी नवनीत कुमार श्रीवास्तव का ही नाम दर्ज है।
.
गौरतलब है कि 17 जून को CBI ने उन्हें करीब 75 करोड़ रुपए कथित तौर पर शेल कंपनियों को ट्रांसफर किए जाने के मामले में गिरफ्तार किया था। उस समय क्रेस्ट के CEO श्रीवास्तव ही थे। फिलहाल CBI ने श्रीवास्तव को तीन दिन की रिमांड के बाद जेल भेज दिया है। जांच में यह भी सामने आया कि जो राशि एक निजी कंपनी के खाते में ट्रांसफर की गई थी, उसमें उनकी पत्नी और एक करीबी रिश्तेदार भी निदेशक (Director) हैं।
वेबसाइट पर क्रेस्ट का सीईओ श्रीवास्तव
क्या है क्रेस्ट
क्रेस्ट को मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी, भारत सरकार (MNRE) द्वारा चंडीगढ़ को मॉडल सोलर सिटी के रूप में विकसित करने के लिए बनाया था। मॉडल सोलर सिटी के लिए मास्टर प्लान द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) ने तैयार किया था। सोलर सिटी के मास्टर प्लान को MNRE ने जनवरी 2012 में मंजूरी दी थी। यूटी चंडीगढ़ का साइंस एंड टेक्नोलॉजी एंड रिन्यूएबल एनर्जी डिपार्टमेंट क्रेस्ट के माध्यम से यूटी चंडीगढ़ में सोलर, EV पॉलिसी और अन्य प्रोजेक्ट्स को लागू करने की नोडल एजेंसी है।
क्रेस्ट के मुख्य उद्देश्यों में समुदाय में वैज्ञानिक सोच और जागरूकता पैदा करना, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी संस्थाओं और उद्योगों तक विज्ञान संबंधी जानकारी पहुंचाना, को-जनरेशन और वैकल्पिक ईंधन जैसी नई तकनीकों को बढ़ावा देना, पॉलिसी निर्माण के लिए ऊर्जा डेटा एकत्र करना, शहर में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) अपनाने को बढ़ावा देना तथा प्रशासन को योजना संबंधी सुझाव देना शामिल है।
तीन पॉइंट में समझें पूरा घोटाला
- बैंक खातों से फंड का अवैध ट्रांसफर: CREST संस्था चंडीगढ़ में सोलर एनर्जी और सब्सिडी प्रोग्राम को बढ़ावा देने का काम करती है। संस्था के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (सेक्टर-32 शाखा) में तीन मुख्य खाते थे। आरोपियों ने इन खातों में जमा सरकारी धन को अवैध रूप से ट्रांसफर करना शुरू किया। जांच के मुताबिक, इस हेराफेरी को छिपाने के लिए 303 बार अवैध ट्रांजैक्शन किए गए, जिनमें पैसे को कई बार निकालकर और घुमाकर वापस डाला गया ताकि ऑडिट में आसानी से पकड़ में न आए।
- बैंक अधिकारियों और सरकारी स्टाफ की मिलीभगत: यह घोटाला बिना अंदरूनी मदद के संभव नहीं था। इसमें बैंक और CREST के जिम्मेदार अधिकारियों ने मिलकर काम किया। बैंक के तत्कालीन मैनेजर रिभव ऋषि और अन्य स्टाफ (रिलेशनशिप मैनेजर, मेकर और चेकर) ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। क्रेस्ट के तत्कालीन प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर सिंह अबरोल और अकाउंटेंट साहिल कुक्कड़ पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी नियमों को ताक पर रखकर इन अनधिकृत ट्रांजैक्शनों को हरी झंडी दी।
- शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) का इस्तेमाल: घोटाले की रकम को सीधे अपने खातों में लेने के बजाय आरोपियों ने कई शेल एंटिटीज (कागजी कंपनियां) बनाईं। क्रेस्ट के खातों से पैसा पहले इन फर्जी कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया गया और वहां से इसे अलग-अलग निजी लाभार्थियों (Private Beneficiaries) के खातों में भेजा गया।

