PSPCL को जल्दी मिलेगा नया डायरेक्टर जेनरेशन: 25 लोगों ने किया आवेदन, चीफ सेक्रेटरी की अगुआई वाली कमेटी करेगी मीटिंग, चार नवंबर से पद खाली – Chandigarh News
पंजाब में पावरकॉम को जल्दी ही नया डायरेक्टर जेनरेशन मिल जाएगा। इसके लिए सरकार स्ट्रेटजी से जुट गई है। इस मामले को लेकर सरकार की आज (27 मई) मीटिंग होने वाली है, जिसमें इस पर तैनात किए जाने वाले व्यक्तियों के नाम को फाइनल किया जा सकता है। इसके बाद सीएम
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पद काफी अहम है
यह पद बिजली विभाग का काफी अहम है। एक तो इस समय गर्मी का मौसम चल रहा है। दूसरा धान का सीजन शुरू होने वाला है। पता चला है कि आज मीटिंग चीफ सेक्रेटरी की लीडरशिप में बनी कमेटी की मीटिंग होगी। मीटिंग में जो नाम तय किया जाएगा, उसे सीएम पंजाब को भेजा जाएगा। उसके बाद उनकी तरफ से सरकार द्वारा आखिरी फैसला लिया जाएगा।
17 के पास अनुभव नहीं
पता चला है कि इस पद के लिए कई लोग दौड़ में हैं। आवेदक आठ इंजीनियरों के पास बिजली उत्पादन का कोई अनुभव नहीं है। आवेदन करने वाले 17 इंजीनियर ऐसे भी हैं, जिनके पास संबंधित क्षेत्र का अच्छा अनुभव है। इस पद के लिए 30 मार्च 2026 को विज्ञापन प्रकाशित किया गया था,
लेकिन उससे पहले पंजाब कैबिनेट ने निदेशक (जेनरेशन) पद के लिए योग्यताओं और शर्तों में बदलाव कर दिया था। कमेटी में मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा के अलावा बिजली विभाग के सचिव बसंत गर्ग और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन की चेयरपर्सन भी शामिल हैं। ध्यान रहे कि पंजाब बिजली विभाग पर ईडी की भी नजर लगी हुई है।
पांच चीजों पर फोकस कर पद्रर्शन सुधारा
पंजाब पावरकॉम (PSPCL) ने पिछले तीन वर्षों में अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार कर रहा है। केंद्रीय बिजली मंत्रालय और पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) की ओर से जारी एकीकृत रेटिंग और रैंकिंग रिपोर्ट के अनुसार पावरकॉम का स्कोर लगातार बेहतर हुआ है। पावरकॉम ने वर्ष 2022-23 में ‘बी’ रेटिंग हासिल की थी। इसके बाद 2023-24 में कंपनी ‘ए’ रेटिंग में पहुंच गई, जबकि अब 2024-25 में पावरकॉम को ‘ए प्लस’ रेटिंग मिली है। इसी दौरान पावरकॉम का स्कोर 76.99 से बढ़कर 89.22 तक पहुंच गया है। इस सुधार के पीछे कई अहम तकनीकी कारण हैं। इसमें बिजली सप्लाई व्यवस्था में सुधार, लाइन लॉस में कमी, बिलिंग और कलेक्शन सिस्टम को मजबूत करना, वित्तीय प्रबंधन में सुधार और उपभोक्ता सेवाओं को बेहतर बनाना शामिल है। इसके अलावा बिजली वितरण व्यवस्था में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और संचालन क्षमता बढ़ाने का भी असर देखने को मिला है।

