अमृतसर में चुनाव एजेंट गिरफ्तारी पर थाने के बाहर हंगामा: मजीठिया व पुलिस में झड़प, अकाली दल-किसान यूनियन ने लगाया धरना – Amritsar News
पंजाब के मजीठा में अकाली दल के चुनाव एजेंट जोबनप्रीत सिंह को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद इलाके का सियासी माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। इस कार्रवाई के विरोध में किरती किसान यूनियन के नेताओं, परिजनों और शिरोमणि अकाली दल के कार्यकर्ताओं ने मजीठा थाने के बाहर जोरदार प्रदर्शन करते हुए धरना शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों और अकाली नेतृत्व ने पुलिस पर सत्ताधारी दल के राजनीतिक दबाव में काम करने का गंभीर आरोप लगाया है। मौके पर पहुंचे पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने पुलिस पर झूठा फंसाने और गलत टिप्पणी करने का आरोप लगाया है। वहीं पुलिस ने एफआईआर के आधार पर कार्रवाई करने की बात कही है। परिजनों का आरोप- दीवार फांदकर घर में घुसी पुलिस किरती किसान यूनियन के नेताओं और जोबनप्रीत के परिवार ने बताया कि पुलिसकर्मी तड़के सुबह करीब 5 बजे उनके घर पहुंचे। परिवार का आरोप है कि पुलिस कर्मी घर की दीवार फांदकर अंदर दाखिल हुए और बिना किसी कानूनी दस्तावेज या वारंट के जोबनप्रीत को अपने साथ ले गए। परिजनों ने कहा कि उन्हें शुरुआत में गिरफ्तारी का कारण या उन्हें ले जाने की जगह के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई, जो पूरी तरह गैरकानूनी है। यूनियन नेताओं के मुताबिक, जोबनप्रीत सिंह नगर काउंसिल चुनाव में अकाली दल के उम्मीदवार के चुनाव एजेंट थे और यह कार्रवाई विशुद्ध रूप से राजनीतिक रंजिश का परिणाम है। पुलिस की सफाई: राजनीतिक दबाव नहीं, FIR के तहत हुई कार्रवाई दूसरी ओर, मजीठा के डीएसपी ने विपक्ष और किसान यूनियनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गिरफ्तारी किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण नहीं, बल्कि पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। डीएसपी ने बताया कि नगर काउंसिल चुनाव के दौरान हुए एक हिंसक झगड़े के संबंध में पुलिस थाने में एफआईआर नंबर 90 दर्ज की गई थी। इसी मामले की चल रही जांच, बयानों और पुख्ता सबूतों के आधार पर जोबनप्रीत सिंह को हिरासत में लिया गया है। थाने पहुंचे बिक्रम मजीठिया, झूठा फंसाने का आरोप मामले की भनक लगते ही अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया भी तुरंत मजीठा थाना पहुंचे। उन्होंने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जोबनप्रीत सिंह को एक सोची-समझी साजिश के तहत झूठे मामले में फंसाया जा रहा है। मजीठिया ने दावा किया कि इससे पहले भी जोबनप्रीत के खिलाफ एक झूठा मामला दर्ज किया गया था जिसे माननीय अदालत ने रद्द कर दिया था और अब फिर से उसी तरह की दमनकारी नीति अपनाई जा रही है। पुलिस पर धार्मिक और जातिगत टिप्पणी का आरोप बिक्रम मजीठिया ने एक और बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि कार्रवाई के दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर धार्मिक और जातिगत टिप्पणियां भी की गई हैं, जिसकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने अपना तानाशाही रवैया नहीं बदला और जोबनप्रीत को तुरंत रिहा नहीं किया, तो अकाली दल और किसान संगठन मिलकर इस आंदोलन को और उग्र करेंगे। फिलहाल थाने के बाहर तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और पुलिस तथा अकाली दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
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