चंडीगढ़ ₹116 करोड़ घोटाला,नलिनी के हस्ताक्षर-हैंडराइटिंग सैंपल की मंजूरी: CBI कोर्ट-बैंक खातों से जुड़ी फाइलों-नोटशीट से मिलान, बनेगी सरकारी गवाह:CBI कोर्ट में दी अर्जी – Chandigarh News
चंडीगढ़ में स्मार्ट सिटी कंपनी लिमिटेड (SCCL) के 116 करोड़ रुपए के फंड घोटाले मामले में सीबीआई जांच तेज हो गई है। सीबीआई कोर्ट ने पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नलिनी मलिक के हस्ताक्षर और हैंडराइटिंग सैंपल लेने की सीबीआई की अर्जी मंजूर कर ली है। नलिनी मलिक फिलहाल इस मामले में सीबीआई रिमांड पर हैं। यह मामला पहले सेक्टर-17 स्थित आर्थिक अपराध शाखा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था, जिसे बाद में यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की सिफारिश पर सीबीआई को सौंप दिया गया था। सीबीआई ने अदालत में कहा कि आगे की जांच के लिए आरोपी के हस्ताक्षर और हैंडराइटिंग सैंपल जरूरी हैं। मामले की सुनवाई के दौरान विशेष सीबीआई जज ने कहा कि आरोपी ने अपने सैंपल देने पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। इस संबंध में उनका बयान अलग से दर्ज किया गया। बैंक खातों से जुड़ी फाइलों से होगा मिलान जांच एजेंसी अब सभी आरोपियों की हैंडराइटिंग और हस्ताक्षरों का मिलान मूल नोटशीट, फाइलों और बैंक दस्तावेजों से कर रही है। इनमें चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और अन्य बैंकों में खोले गए खातों के संचालन और बंद किए जाने से संबंधित रिकॉर्ड शामिल हैं। सीबीआई का मानना है कि इन दस्तावेजों के मिलान से घोटाले में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी। नलिनी की सीबीआई कोर्ट में अर्जी गिरफ्तार पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नलिनी मलिक अब सरकारी गवाह बनने की तैयारी में है। बुड़ैल जेल में बंद नलिनी ने वार्डर के जरिए सीबीआई कोर्ट को अर्जी भेजकर जांच में शामिल होने की इच्छा जताई। अर्जी में नलिनी ने कहा है कि यदि उसे सरकारी गवाह बनाया जाता है तो वह स्मार्ट सिटी घोटाले से जुड़े कई अहम खुलासे कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, वह नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े कई बड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी जानकारी देने को तैयार है। सीबीआई कोर्ट ने इस अर्जी पर जांच एजेंसी से जवाब मांगा है। अब देखना होगा कि नलिनी मलिक को सरकारी गवाह बनाने पर सहमत होती है या नहीं। जानिए क्या है पूरा स्कैम प्रोजेक्ट के पैसे शेल कंपनियों से निवेश किएः जांच के अनुसार, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद बैंक खाते में जमा रकम नगर निगम के खाते में ट्रांसफर होनी थी। लेकिन आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने रकम निकालकर शेल कंपनियों के जरिए रियल एस्टेट में निवेश कर दिया। नगर निगम को लगाई चपतः जहां नगर निगम के खाते में करोड़ों रुपए आने थे, वहां केवल 81.20 रुपए ही ट्रांसफर हुए। बाकी रकम कथित तौर पर आरोपियों ने आपस में बांट ली। नलिनी मलिक ने फर्जी एफडी तैयार कीः सीबीआई जांच में यह भी सामने आया है कि नलिनी मलिक समेत अन्य अधिकारियों और बैंक कर्मियों ने मिलकर 11 फर्जी एफडी तैयार की थीं, ताकि किसी को गड़बड़ी का शक न हो। बाद में इन्हीं एफडी के जरिए रकम को अलग-अलग कंपनियों में निवेश किया गया।
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