फरीदकोट में किसानों ने ट्रंप का पुतला फूंका: इंडो यूएस व्यापार समझौते को लेकर विरोध , नायब तहसीलदार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा – Faridkot News
फरीदकोट के मिनी सचिवालय में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के आह्वान पर किसानों ने केंद्र सरकार और प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) सिद्धूपुर के प्रांतीय अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में जमा हुए किसानों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पुतला फूंका। इसके बाद, अपनी मांगों को लेकर नायब तहसीलदार के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। किसान नेताओं ने भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। किसानों ने इस समझौते पर सवाल उठाए और इसे किसानों के लिए नुकसानदेह बताया।
किसानों की इन पॉइंट पर जताई आपत्ति कृषि, डेयरी और पोल्ट्री को मिले छूट: किसानों ने मांग की है कि कृषि, डेयरी और पोल्ट्री (मुर्गी पालन) क्षेत्रों को इस व्यापार समझौते के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जाए। आयात शुल्क रहे बरकरार: विदेशी कृषि और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) को जारी रखा जाना चाहिए, ताकि देश के किसानों के हितों की रक्षा हो सके। इतिहास से सबक लेने की जरूरत: कहा कि पूर्व में कई व्यापारिक समझौतों से देश को भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। इस नए समझौते से देश की पूरी कृषि व्यवस्था चरमरा सकती है।
बढ़ती लागत से किसान पहले ही आर्थिक संकट में: डल्लेवाल प्रांतीय अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय किसान पहले से ही खेती की बढ़ती लागत और फसलों का लाभकारी मूल्य न मिलने के कारण गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कृषि, डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र को इस मुक्त व्यापार समझौते के तहत लाया गया,तो भारी सब्सिडी वाले विदेशी उत्पादों के सामने भारतीय किसान टिक नहीं पाएंगे। इन्होंने कहा कि ऐसी हालत में उनकी स्थिति और ज्यादा कमजोर हो जाएगी। केंद्र सरकार आम लोगों और किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है। किसानों ने साफ किया कि यदि देश के कृषि क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो किसान अपने इस विरोध प्रदर्शन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।
पुरानी लंबित मांगों पर भी घेरा प्रदर्शन के दौरान जगजीत सिंह डल्लेवाल, जिलाध्यक्ष बोहड़ सिंह रुपयावाला और जिला महासचिव इंद्रजीत सिंह समेत अन्य किसान नेताओं ने याद दिलाया कि केंद्र सरकार ने अभी तक उनके पुराने वादे पूरे नहीं किए हैं। सरकार अगर अपने वादों को पूरा नहीं करती है तो किसान फिर से बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। किसान बोले- ये मांगे तुरंत पूरी हों एमएसपी की कानूनी गारंटी: सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की खरीद की कानूनी गारंटी दी जाए। स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू हो: डॉ. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार $C2 + 50\%$ फॉर्मूले के आधार पर फसलों के दाम तय किए जाएं। कर्जमाफी: देश के किसानों और खेत-मजदूरों का पूरा कर्ज माफ किया जाए। किसान आंदोलन के वादे: पिछले किसान आंदोलनों के दौरान सरकार द्वारा किसानों से किए गए सभी वादों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
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