राइटर मधु किश्वर को हाईकोर्ट से झटका: अग्रिम जमानत याचिका खारिज, कोर्ट बोला- दो बार नोटिस भेजा, नहीं हुई जांच में शामिल – Chandigarh News
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका मधु किश्वर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि कई बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद मधु किश्वर जांच में शामिल नहीं हुईं और जांच एजेंसियों का पूरा सहयोग नहीं किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह भी रखा गया कि मधु किश्वर की सोशल मीडिया पर बड़ी पहुंच है। कोर्ट में कहा गया कि कथित फर्जी वीडियो को लेकर मधु किश्वर द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट के बाद यह वीडियो और ज्यादा लोगों तक पहुंच गया। कोर्ट ने कहा कि किसी संवैधानिक पद या संस्था पर बिना पुख्ता सबूत के आरोप लगाने से समाज में तनाव पैदा हो सकता है। इससे पहले 8 मई 2026 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) की अदालत भी मधु किश्वर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुकी थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। आपराधिक जिम्मेदारी को नकारा नहीं जा सकता कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच अभी शुरुआती दौर में है और पुलिस कई पहलुओं की पड़ताल कर रही है। ऐसे में इस समय यह नहीं कहा जा सकता कि याचिकाकर्ता की इस मामले में कोई भूमिका नहीं है। अदालत ने माना कि जांच पूरी होने से पहले उनके खिलाफ लगे आरोपों को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी को मामले की निष्पक्ष जांच का पूरा अवसर मिलना चाहिए। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने मधु किश्वर को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया और उनकी याचिका खारिज कर दी। जानिए पूरा मामला पुलिस के अनुसार इंटरनेट मीडिया पर PM मोदी से संबंधित एक कथित भ्रामक और आपत्तिजनक वीडियो साझा किया गया था। इसी मामले में मधु पूर्णिमा किश्वर को आरोपी बनाया गया है। इससे पहले चंडीगढ़ की जिला अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने अब हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। AI से तैयार कंटेंट होने की आशंका जताई याचिका में मधु किश्वर ने दावा किया कि उन्होंने खुद सार्वजनिक रूप से यह आशंका जताई थी कि संबंधित वीडियो संभवतः आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक की मदद से तैयार किया गया भ्रामक कंटेंट हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर में खुद उल्लेख है कि वीडियो मूल रूप से परदीप कौर ढिल्लों नामक व्यक्ति द्वारा पोस्ट किया गया था। चयनात्मक कार्रवाई का आरोप याचिका में कहा गया है कि शिकायत में कई अन्य इंटरनेट मीडिया लिंक और व्यक्तियों के नामों का भी जिक्र है, लेकिन इसके बावजूद केवल उन्हें ही आरोपी बनाया गया। मधु किश्वर ने जांच एजेंसियों पर चयनात्मक कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल एक व्यक्ति को निशाना बनाया गया है। उन्होंने अदालत से गिरफ्तारी से संरक्षण देते हुए अग्रिम जमानत देने की मांग की है।
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