बुनियादी सुविधाओं के बिना दिया गया कब्जा अधूरा, उपभोक्ता को न्याय मांगने का अधिकार – Jalandhar News
भास्कर न्यूज | जालंधर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को सेवा में गंभीर कोताही और लापरवाही का दोषी ठहराते हुए एक पीड़ित महिला उपभोक्ता के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने जेआईटी को निर्देश दिया है कि वह इंदिरापुरम (मास्टर गुरबंता सिंह एन्क्लेव) योजना के तहत एलआईजी फ्लैट के लिए शिकायतकर्ता अनीता द्वारा जमा कराई गई कुल 4,37,972 की राशि 9% वार्षिक ब्याज के साथ वापस करे। इसके साथ ही मानसिक प्रताड़ना के एवज में 30,000 का मुआवजा और 10,000 मुकदमा खर्च भी अदा करने का हुक्म दिया गया है। आयोग ने यह पूरी अनुपालना 45 दिनों के भीतर करने को कहा है, ऐसा न करने पर ट्रस्ट को मूल राशि पर 3% अतिरिक्त वार्षिक ब्याज देना होगा। जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने अपनी लिखित दलील में उपभोक्ता के सभी आरोपों को खारिज करते हुए शिकायत का पुरजोर विरोध किया। लिमिटेशन का हवाला : ट्रस्ट का मुख्य तर्क था कि शिकायतकर्ता को 11 मार्च 2011 को ही मौके पर फ्लैट का भौतिक कब्जा सौंप दिया गया था, अब इतने वर्षों बाद दायर की गई यह शिकायत कानूनन समय सीमा से बाहर है। निर्माण पूरा होने का दावा : जेआईटी ने दावा किया कि फ्लैटों का निर्माण आवंटन की शर्तों के अनुसार पूरी तरह से मुकम्मल किया गया था और कब्जा पत्र पर शिकायतकर्ता के संतोषजनक हस्ताक्षर हैं । . रेरा का क्षेत्राधिकार : ट्रस्ट ने यह भी तकनीकी आपत्ति उठाई कि रियल एस्टेट मामलों के लिए अब विशेष रेरा एक्ट 2016 बन चुका है, लिहाजा उपभोक्ता आयोग को इस मामले की सुनवाई का अधिकार ही नहीं है और शिकायतकर्ता को वहां जाना चाहिए। बस्ती दानिशमंदा की रहने वाली अनीता (51) ने आयोग के समक्ष बताया कि उन्होंने 13 जून 2006 को ड्रा के माध्यम से विकास स्कीम इंदिरा पुरम में पहली मंजिल पर एलआईजी फ्लैट नंबर-3 (ब्लॉक-A) अलॉट करवाया था । उन्होंने 18,000 बयाना राशि सहित कुल 4,37,972 की पूरी कीमत किश्तों में चुका दी थी। कागजी कब्जा : जेआईटी अधिकारियों ने 11 मार्च 2011 को दफ्तर बुलाकर केवल कब्जे के मीमो पर दस्तखत करवा लिए, जो सिर्फ कागजी कब्जा था। .घटिया निर्माण और अधूरी सुविधाएं : जब मौके पर जाकर देखा गया तो निर्माण सामग्री आईएसआई मानकों के विपरीत बेहद घटिया थी । फ्लैट में न बिजली की सप्लाई थी, न पानी-सीवरेज का कनेक्शन था और न ही प्रस्तावित 40-45 फीट चौड़ी पहुंच सड़कें बनी थीं । .बिजली के लिए लंबा इंतजार : बिजली ग्रिड और ट्रांसफार्मर के लिए पीएसपीसीएल द्वारा मांगी गई 10,78,711 की राशि भी ट्रस्ट ने समय पर जमा नहीं की, बल्कि तीन साल की देरी से अगस्त 2012 में जमा कराई, जिसके बाद कहीं जाकर बिजली की लाइनें बिछ सकीं। इस वजह से शिकायतकर्ता एक दिन भी उस फ्लैट में नहीं रह सकीं । कंप्लीशन सर्टिफिकेट के बिना कब्जा अवैध आयोग ने स्पष्ट किया कि चूंकि जेआईटी का यह प्रोजेक्ट रेरा में पंजीकृत ही नहीं था, इसलिए उपभोक्ता आयोग में यह सुनवाई पूरी तरह न्यायसंगत है । बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट या ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के खरीदार को फ्लैट का कब्जा देना कानूनन वैध नहीं माना जा सकता। पंजाब अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन एक्ट 1995 के तहत यह सबसे जरूरी दस्तावेज है, जिसे पेश करने में जेआईटी पूरी तरह नाकाम रहा है। बुनियादी सुविधाओं के बिना दिया गया कब्जा अधूरा है।
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