सुखबीर बादल बोले- सरकार बनी तो पंजाबियों को आरक्षण: निजी क्षेत्र में भी 70% कोटा, शिक्षकों को स्थायी नौकरी व वेतन वृद्धि का आश्वासन – Patiala News




पटियाला स्थित पंजाबी यूनिवर्सिटी में ‘स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया’ (SOI) द्वारा आयोजित “भविष्य बचाओ मोर्चा” के दौरान शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खिलाफ जमकर हुंकार भरी। उन्होंने ऐलान किया कि यदि पंजाब में अकाली दल की सरकार बनती है, तो सरकारी नौकरियों में राज्य के युवाओं (पंजाबियों) को पहली प्राथमिकता दी जाएगी और निजी क्षेत्र (Private Sector) की कंपनियों में भी 70 प्रतिशत नौकरियां स्थानीय पंजाबियों के लिए आरक्षित की जाएंगी।
आदर्श व मेरिटोरियस स्कूलों के शिक्षकों को पक्का करने का वादा अपनी पिछली अकाली दल-भाजपा सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि उनकी सरकार के दौरान स्थापित किए गए आदर्श (Adarsh) और मेरिटोरियस (Meritorious) स्कूलों की मौजूदा सरकार घोर अनदेखी कर रही है। उन्होंने वादा किया कि अकाली दल की सरकार आते ही इन स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की सेवाओं को तुरंत पक्का (नियमित) किया जाएगा, उनके वेतन में संतोषजनक वृद्धि की जाएगी और उनकी तमाम लंबित मांगों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा। पेपर लीक मामलों पर स्वास्थ्य व शिक्षा मंत्री से मांगा इस्तीफा पंजाब में हाल के दिनों में हुए विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के ‘पेपर लीक’ मामलों को लेकर सुखबीर बादल ने भगवंत मान सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि बार-बार हो रहे पेपर लीक से लाखों बेरोजगार युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। इसके लिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए राज्य के शिक्षा मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को तत्काल अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी धांधलियों के बावजूद सरकार ने कभी अपनी नाकामी स्वीकार नहीं की।
विधानसभा अध्यक्ष के बयान पर साधा निशाना, प्रचार-प्रसार के खर्च पर उठाए सवाल विधानसभा स्पीकर के हालिया बयान की कड़ी आलोचना करते हुए बादल ने उसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना करार दिया, जिसमें कहा गया था कि ‘संगत’ की मौजूदगी में बिल में संशोधन हुआ। बादल ने टिप्पणी की कि संगत का काम परमात्मा का नाम जपना है, न कि विधायी कानूनों पर तकनीकी सलाह देना। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे पंजाब में प्रशासनिक अराजकता व्याप्त है। एक तरफ सरकार अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (DA) की बकाया किश्तें देने से पीछे हट रही है, वहीं दूसरी तरफ अपनी झूठी वाहवाही और विज्ञापनों पर रोजाना करोड़ों रुपये का सरकारी खजाना लुटाया जा रहा है।



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