सरकार ने 16 दवा कॉम्बिनेशन पर रोक लगाई: स्किन और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट भी शामिल, कहा- इनसे इलाज में फायदे से ज्यादा जोखिम

सरकार ने 16 दवा कॉम्बिनेशन पर रोक लगाई:  स्किन और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट भी शामिल, कहा- इनसे इलाज में फायदे से ज्यादा जोखिम


नई दिल्ली17 मिनट पहले

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केंद्र सरकार ने देशभर में 16 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेश (FDC) दवाएं बनाने, वितरण, बिक्री और सप्लाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि इन दवाओं से फायदे की अपेक्षा जोखिम ज्यादा हैं। इन दवाओं में इलाज के लिहाज से कुछ नहीं मिला।

मंत्रालय ने कहा कि यह कदम लोगों की सुरक्षा बढ़ाने और दवाओं के सही इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है, ताकि केवल वैज्ञानिक रूप से सही और असरदार दवाएं ही बाजार में उपलब्ध रहें।

न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और FDC दवाओं की समीक्षा के आधार पर लिया गया। इसके लिए ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) ने विशेषज्ञ समिति बनाई थी। समिति ने कई दवा कॉम्बिनेशन की जांच की और कुछ को अवैज्ञानिक, इलाज के लिहाज से गैर-जरूरी और मरीजों के लिए संभावित रूप से नुकसानदायक पाया।

FDC यानी ऐसी दवाएं, जिनमें दो या उससे ज्यादा एक्टिव फॉर्माम्युटिकल इनग्रेडिएंट्स (API) तय अनुपात में मिलाए जाते हैं।

मंत्रालय ने यह प्रतिबंध ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26A के तहत जारी अधिसूचनाओं के जरिए लगाया है।

राज्यों को दिए गए सख्त निर्देश

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि इससे पहले भी वैज्ञानिक समीक्षा के बाद कई गैर-तर्कसंगत FDC दवाओं पर रोक लगाई जा चुकी है।

सभी राज्यों के ड्रग कंट्रोलर, नियामक संस्थाओं और प्रवर्तन एजेंसियों को इन आदेशों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही दवा निर्माता, आयातक, वितरक और अन्य संबंधित पक्षों को कानून के मुताबिक जरूरी कदम उठाने के लिए कहा गया है।

क्या होती हैं FDC दवाएं

फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) ऐसी दवाएं होती हैं, जिनमें दो या उससे ज्यादा एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (API) तय अनुपात में एक ही टैबलेट, कैप्सूल या सिरप में मिलाए जाते हैं। कई बीमारियों में ऐसे कॉम्बिनेशन मरीज के लिए फायदेमंद होते हैं, क्योंकि इससे दवाओं की संख्या कम होती है और इलाज आसान बनता है।

हालांकि, हर कॉम्बिनेशन वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होता। अगर अलग-अलग दवाओं को बिना पर्याप्त रिसर्च या मेडिकल जरूरत के एक साथ मिला दिया जाए, तो मरीज को अनावश्यक दवाएं भी लेनी पड़ती हैं। इससे साइड इफेक्ट का खतरा बढ़ सकता है, दवा का असर घट सकता है और डॉक्टर के लिए यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि समस्या किस दवा से हुई।

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