महाराणा प्रताप ने नहीं खायी थी घास की रोटी: अकबर ने ले लिया पसंदीदा हाथी ‘रामप्रसाद’; पढ़िए- वीर शिरोमणि के 5 अनसुने किस्से – Udaipur News
“धरम रहसी-रहसी धरा, खप जासी खुरसाण। . अमर विसम्बर ऊपरे, राख नहच्चो राण।।” इस दोहे का अर्थ है- ‘धर्म और धरती हमेशा बने रहेंगे, लेकिन ये विदेशी आक्रमणकारी (खुरसाण) एक दिन समाप्त हो जाएंगे।’ ये दोहा मुगल सेनापति रहीम खान-ए-खाना (मिर्जा खां) ने मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप के लिए लिखा था। कारण था- हल्दीघाटी…

