देवकीनंदन बोले- जबतक कानून नहीं, हिंदू 4 बच्चे पैदा करें: NEET पर कहा- डिजिटल दौर में इधर-उधर हो जाता है; सरकार मुफ्त की चीजें बंद करे – Bhopal News

देवकीनंदन बोले- जबतक कानून नहीं, हिंदू 4 बच्चे पैदा करें:  NEET पर कहा- डिजिटल दौर में इधर-उधर हो जाता है; सरकार मुफ्त की चीजें बंद करे – Bhopal News




कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा- देश में सभी के लिए समान कानून होना चाहिए। जब तक देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं आता, तब तक हर सनातनी को 4 बच्चे पैदा करना चाहिए। वहीं, NEET पेपर लीक पर कहा- डिजिटल दौर में कई बार इधर-उधर हो जाता है, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। भोपाल में श्रीमद्भागवत कथा के बाद दैनिक भास्कर से बातचीत में देवकीनंदन ठाकुर ने जनसंख्या नियंत्रण कानून, मुफ्त शिक्षा-स्वास्थ्य, महंगाई, रोजगार और सनातन बोर्ड जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। महंगाई के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं वित्त मंत्री नहीं हूं, मैं बस इतना कह सकता हूं कि सरकार को मुफ्त की हर चीज हटा देनी चाहिए। केवल दो चीजें मुफ्त में मिलनी चाहिए, अच्छी शिक्षा और अच्छा इलाज। जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं तो हर सनातनी 4 बच्चे करे देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि जब हम एक देश में रहते हैं तो कानून सबके लिए समान होना चाहिए और सभी के समान अधिकार होने चाहिए। जो इसे मानते हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। अगर सरकार जनसंख्या नियंत्रण नहीं कर रही है तो हिंदुओं को 4-5 बच्चे करने चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं पिछले 5-7 सालों से यही बात कह रहा हूं कि हर सनातनी को तब तक अपनी संतान 4 रखनी चाहिए, जब तक जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं आ जाता। जनसंख्या नियंत्रण कानून बहुत जरूरी है। डिजिटल सिस्टम में इधर-उधर हो जाता है NEET परीक्षा और विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों पर पूछे गए सवाल पर देवकीनंदन ने कहा कि एक युवा बड़ी उम्मीद के साथ परीक्षा की तैयारी करता है, इसलिए परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और व्यवस्थित होनी चाहिए। सरकार ने व्यवस्थाएं बेहतर करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि कई जगह सुरक्षा इंतजाम भी बढ़ाए गए हैं। हालांकि डिजिटल सिस्टम में कई बार इधर-उधर हो जाता है, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। जो युवा योग्य है, उसे उसका अधिकार मिलना चाहिए। परीक्षा अच्छे तरीके से हो और उसके बाद युवाओं को रोजगार भी मिले। युवाओं को चाहिए अच्छी परीक्षा और अच्छी नौकरी देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि देश के युवाओं को दो चीजें सबसे ज्यादा जरूरी हैं। पहली अच्छी और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और दूसरी रोजगार के अवसर। अगर कोई युवा मेहनत करके परीक्षा पास करता है तो उसके लिए नौकरी के अवसर भी उपलब्ध होने चाहिए। युवाओं का भविष्य किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत होता है। उन्होंने कहा कि मैं किसी पार्टी का नहीं हूं और न किसी की वकालत करता हूं। मेरा मानना है कि युवाओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए। सरकार को मुफ्त की हर चीज हटा देनी चाहिए महंगाई और जनकल्याण से जुड़े सवाल पर देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि मैं वित्त मंत्री या रेल मंत्री नहीं हूं। मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि सरकार को ऐसे फैसलों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जिनसे जनता को राहत मिले। सरकार को मुफ्त की हर चीज हटाकर केवल दो चीजें मुफ्त में देनी चाहिए- शिक्षा और मुफ्त चिकित्सा। उन्होंने कहा कि कोई बच्चा जितना पढ़ना चाहता है, उसे उतनी शिक्षा मुफ्त मिलनी चाहिए। कोई व्यक्ति बीमार है तो उसका इलाज भी मुफ्त होना चाहिए। दुनिया के कई देशों में ऐसी व्यवस्थाएं हैं और भारत को अच्छी व्यवस्थाओं को अपनाने में संकोच नहीं करना चाहिए। विदेशों की नकल सिर्फ फटी जींस पहनने में नहीं करें देवकीनंदन ने कहा कि हम विदेशों की नकल फटी जींस पहनने, क्लब जाने और शराब पीने में कर रहे हैं, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में नहीं कर रहे। वहां के बच्चों को बराबर की शिक्षा मिलती है, उसकी नकल नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वहां गरीब आदमी का इलाज पहले होता है। अगर किसी के पास पैसा नहीं है तो भी उसका इलाज हो जाता है। ऐसी व्यवस्था भारत में क्यों नहीं हो सकती? अच्छी चीजों की नकल कहीं से भी करो और बुरी चीजों की नकल अपने घर से भी मत करो। मंदिरों में इतना पैसा है कोई बच्चा बीमारी से नहीं मरेगा सनातन बोर्ड के सवाल पर देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि हमारे पास मंदिर हैं, लेकिन ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि मंदिरों में आने वाले पैसे का सही उपयोग हो सके। हम गायों की सेवा कर सकते हैं और बच्चों को शिक्षा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर मंदिरों के पैसे से हर शहर में एक-एक अस्पताल बन जाए तो सभी को मुफ्त इलाज मिल सकता है और कोई बच्चा इलाज के अभाव में अपने प्राण नहीं त्यागेगा। देवकीनंदन ने कहा कि जो गरीब लोग अपनी बहन-बेटियों का भरण-पोषण नहीं कर सकते और मजबूरी में धर्म परिवर्तन कर लेते हैं, उनकी रक्षा राम, कृष्ण, शिव और देवी-देवताओं के पैसे से की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मंदिरों का पैसा किसी व्यक्ति का नहीं है। वह ठाकुर जी का है और ठाकुर जी के लोगों के काम आ जाए, इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। इसलिए सनातन बोर्ड होना चाहिए। अब देवकी नंदन ठाकुर से सिद्ध कथावाचक बनने की कहानी पढ़िए 6 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर देवकीनंदन ठाकुर का जन्म 12 सितंबर 1978 को उत्तर प्रदेश के मथुरा में हुआ था। वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा के ओहावा गांव के एक ब्राह्मण परिवार से हैं। पिता राजवीर शर्मा तथा माता का श्रीमति अनसुईया देवी ने उनका नाम देवकीप्रसाद शर्मा रखा था। देवकी नंदन ने बताया, जब वो थोड़े बड़े हुए तब उनके गांव तक टेंपो तक नहीं जाती थी। बस पकड़ने के लिए उन्हें और उनके परिवार को 6 किमी तक पैदल चलकर जाना पड़ता था। देवकी नंदन की मां श्रीमद्भगवद्गीता में काफी विश्वास रखती थींं। उनके अलावा उनके 4 भाई और 2 बहनें भी हैं। 6 साल की उम्र में वह घर छोड़कर वृंदावन पहुंचे और ब्रज के रासलीला संस्थान ने उन्हें अपने साथ शामिल कर लिया। रासलीला उन्होंने भगवान कृष्ण और भगवान राम की भूमिका निभाई। श्रीकृष्ण यानी ठाकुरजी की भूमिका निभाने के बाद उन्होंने खूब चर्चाएं बटोरीं। 13 साल में कंठस्थ कर ली श्रीमद्भागवत पुराण, गुरु ने दिया नाम मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देवकी नंदन को 13 साल की उम्र में ही श्रीमद्भागवतपुराण कंठस्थ हो गई थी। इसके साथ ही उन्होंने निंबार्क संप्रदाय के अनुयायी के रूप में गुरु-शिष्य की परंपरा के तौर पर दीक्षा ली। देवकीनंदन ठाकुर महाराज गुरु आचार्य पुरुषोत्तम शरण शास्त्री जी ने इनका नाम देवकीनंदन ठाकुर महाराज रखा। उनकी प्रतिभा और बोलने की कला के कारण इन्हें श्रीमद्भागवत पुराण के वाचन का कार्य सौंपा गया। 18 साल की उम्र में उन्होंने दिल्ली के शाहदरा में श्रीराम मंदिर में श्रीमद्भागवत महापुराण के उपदेश दिए। इसके बाद उन्होंने कई जगहों पर श्रीकृष्ण और राम कथा का वाचन किया। धीरे-धीरे उनके फॉलोअर्स की संख्या बढ़ने लगी। साल 2001 के बाद से वह मलेशिया, थाईलैंड, डेनमार्क, स्वीडन, नार्वे, हॉन्ग-कॉन्ग जैसे देशों में भी वह प्रवचन कर चुके हैं। उनका विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट भी है। वेबसाइट के मुताबिक, उनके आश्रम में संस्कृत छात्र विकास, गौशाला, वृद्धाश्रम, अनाथों को प्रश्रय और समुदाय के बीच एकता स्थापित करने जैसे काम किए जाते हैं। 2015 में योगी ने यूपी रत्न अवार्ड दिया, सोशल मीडिया पर मिलियन्स में फॉलोवर देवकी नंदन के धर्मार्थ कार्यों के लिए साल 2015 में उन्हें उत्तर प्रदेश रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया था। CM योगी आदित्यनाथ ने खुद ये अवॉर्ड उन्हें दिया था। श्री ब्राह्मण महासंघ ने उन्हें अचार्यिंद्र के पद के साथ सम्मानित किया है। इसके साथ ही उन्हें कई तरह के अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। सोशल मीडिया पर पर भी देवकीनंदन के फॉलोअर्स लाखों में हैं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *