उत्तराखंड में ‘खेलोक’ पोर्टल से जुड़ेंगे खिलाड़ी: उदीयमान खिलाड़ियों को साल में दो बार होगा P-SAT; हर शनिवार मिलेगी 2 घंटे की वर्चुअल ट्रेनिंग – Dehradun News

उत्तराखंड में ‘खेलोक’ पोर्टल से जुड़ेंगे खिलाड़ी:  उदीयमान खिलाड़ियों को साल में दो बार होगा P-SAT; हर शनिवार मिलेगी 2 घंटे की वर्चुअल ट्रेनिंग – Dehradun News

उत्तराखंड में खेल प्रतिभाओं को निखारने और उनकी फिटनेस पर पैनी नजर रखने के लिए राज्य सरकार ने अहम बदलाव किए हैं। ‘मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना’ के तहत अब खिलाड़ियों का ‘फिजिकल स्टैंडर्ड एप्टीट्यूड टेस्ट’ (P-SAT) साल में दो बार लिया जाएगा।

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साल में दो बार दर्ज होगा P-SAT स्कोर

खेल मंत्री ने बताया कि विभाग का मुख्य फोकस खिलाड़ियों की वास्तविक प्रगति की निगरानी करना है। इसी वजह से प्रदेश के बालक-बालिकाओं का P-SAT स्कोर अब साल में दो बार अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाएगा। इससे खिलाड़ियों की शारीरिक दक्षता और खेल क्षमता का वैज्ञानिक तरीके से मूल्यांकन हो सकेगा।

हर शनिवार मिलेगी एक्सपर्ट्स की वर्चुअल ट्रेनिंग

खिलाड़ियों को आधुनिक खेल तकनीकों और प्रशिक्षण पद्धतियों से अपडेट रखने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लिया जा रहा है। इसके लिए हर शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘खेलोक’ पोर्टल पर 2 घंटे का वर्चुअल प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाएगा। इस व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि इससे खिलाड़ियों को बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के विशेषज्ञों का सीधा मार्गदर्शन मिल सकेगा।

योजना में संशोधन का प्रस्ताव शासन में लंबित

रेखा आर्या ने स्पष्ट किया कि ‘मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना’ को और ज्यादा प्रभावी व आधुनिक बनाने के लिए नियमों और चयन प्रक्रिया में संशोधन का एक प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह फिलहाल शासन स्तर पर विचाराधीन है। जब तक नए प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक चयन और बाकी सभी प्रक्रियाएं पुरानी व्यवस्था के तहत ही बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी।

जिला क्रीड़ा अधिकारियों को सख्त निर्देश

जमीनी स्तर पर खेलों का बेहतर माहौल तैयार करने के लिए सभी जिलों के क्रीड़ा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। उन्हें खेल प्रशिक्षकों और पीटीआई के साथ सक्रिय तालमेल बिठाकर काम करना होगा। खेल मंत्री ने इन सभी नए दिशा-निर्देशों का तत्काल और कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के आदेश जारी कर दिए हैं, ताकि प्रदेश की कोई भी प्रतिभा आगे बढ़ने के अवसर से वंचित न रहे।



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