लुधियाना सेंट्रल जेल सुपरिंटेंडेंट को चेतावनी: डॉक्टरों से अभद्र व्यवहार जांच में खामियां उजागर,स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने के आदेश – Ludhiana News
लुधियाना सेंट्रल जेल के सुपरिंटेंडेंट कुलवंत सिंह पर चार मेडिकल अधिकारियों द्वारा लगाए गए उत्पीड़न और अभद्र व्यवहार के आरोपों की पंजाब सरकार की जांच में जेल प्रशासन और मेडिकल स्टाफ के बीच गंभीर टकराव सामने आया है। जांच के बाद पंजाब सरकार ने सुपरिंटेंडेंट को सख्त चेतावनी जारी करते हुए भविष्य में डॉक्टरों, जेल कर्मचारियों और कैदियों के साथ शिष्ट व्यवहार करने के निर्देश दिए हैं। पंजाब जेल विभाग की प्रधान सचिव भावना गर्ग द्वारा जारी आदेशों में स्वास्थ्य विभाग को भी लुधियाना सेंट्रल जेल में मेडिकल स्टाफ, ड्यूटी रोस्टर और स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने कहा कि जेलों में स्वास्थ्य सेवाएं समन्वित और प्रभावी ढंग से संचालित होनी चाहिए ताकि कैदियों के स्वास्थ्य, सम्मान और जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। डॉक्टरों ने लगाए थे उत्पीड़न के आरोप
विवाद तब शुरू हुआ जब जेल में तैनात चार मेडिकल अधिकारियों ने सुपरिंटेंडेंट कुलवंत सिंह पर अभद्र व्यवहार, उत्पीड़न और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल के आरोप लगाए। आरोपों के बाद जेल विभाग ने सुपरिंटेंडेंट से जवाब मांगा था। अपने जवाब में कुलवंत सिंह ने आरोपों से इनकार किया, लेकिन यह स्वीकार किया कि ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण उनकी भाषा कभी-कभी कठोर हो सकती है। उन्होंने किसी भी अनुचित व्यवहार पर खेद भी जताया। हाइपोग्लाइसीमिया मरीज के मामले में विवाद
9 जून को हुई व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान मेडिकल अधिकारियों ने अपनी शिकायतें विस्तार से रखीं। डॉ. हिमांशु गुप्ता ने बताया कि एक कैदी की गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया स्थिति की जानकारी देने पर सुपरिंटेंडेंट ने नाराजगी जताते हुए अपमानजनक लहजे में पूछा कि उन्हें क्यों बुलाया गया। डॉ. गुप्ता ने सम्मानजनक व्यवहार की मांग करते हुए व्हाट्सएप संदेश भी भेजा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। डॉक्टर बोले- झूठे मामलों का डर
डॉ. अमित अरोड़ा ने जांच में कहा कि जेल के डॉक्टर लगातार झूठे मामलों में फंसाए जाने के डर में काम कर रहे हैं। उन्होंने डॉ. प्रिंस के मामले का जिक्र किया, जिन पर जेल में नशीले पदार्थ पहुंचाने का आरोप लगा था। बाद में पर्याप्त सबूत न मिलने पर उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन इस घटना ने मेडिकल स्टाफ में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी। मेडिकल फैसलों में दखल के आरोप
मनोचिकित्सक डॉ. अरविंद गोयल ने आरोप लगाया कि सितंबर 2025 में सुपरिंटेंडेंट ने सभी मरीजों को बुप्रेनॉर्फिन दवा शुरू करने का दबाव बनाया था, जबकि यह स्वीकृत चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं था। सुपरिंटेंडेंट ने भी उठाए डॉक्टरों पर सवाल
जांच के दौरान कुलवंत सिंह ने मेडिकल अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने उपस्थिति रिकॉर्ड पेश करते हुए दावा किया कि करीब 4,500 कैदियों वाली जेल में डॉक्टर अक्सर केवल एक से डेढ़ घंटे के लिए ही आते हैं। चार मेडिकल अधिकारियों की तैनाती के बावजूद आमतौर पर केवल एक डॉक्टर सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक ओपीडी संभालता है, जबकि शाम की ओपीडी नहीं होती। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डॉक्टर बड़ी संख्या में कैदियों को बाहरी अस्पतालों में रेफर कर देते हैं, जिससे सुरक्षा और प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ती हैं। जेल में 10 मिनट की टेलीमेडिसिन सुविधा
जांच रिपोर्ट में लुधियाना सेंट्रल जेल की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर ढांचागत कमियां भी सामने आईं। सरकार ने पाया कि पंजाब की सबसे बड़ी जेलों में शामिल इस जेल को प्रतिदिन केवल 10 मिनट की टेलीमेडिसिन सुविधा मिल रही है, जिसे तत्काल मजबूत करने की जरूरत है। सुपरिंटेंडेंट ने विभाग को यह भी जानकारी दी कि जुलाई 2025 से अप्रैल 2026 के बीच जेल में 10 कैदियों की मौत हुई है। रिपोर्ट में जेल की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने और जेल प्रशासन तथा मेडिकल स्टाफ के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया गया है।
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