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  • A Rare Coincidence Has Occurred Due To The Change In The Amavasya Date; Govardhan Puja And Annakoot Will Be Celebrated On The 10th, And Bhai Dooj On The 11th.

भास्कर न्यूज | अमृतसर दिवाली इस बार 8 नवंबर को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि इसी दिन सुबह 11:29 बजे शुरू होकर अगले दिन दोपहर 12:32 बजे तक रहेगी। इसके कारण 8 नवंबर की शाम प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने और दिवाली रात्रि कालीन पर्व होने की वजह से लक्ष्मी प

वहीं भाई दूज 11 नवंबर को मनाया जाएगा। इसी दिन यम द्वितीया पर कायस्थ समाज में भगवान चित्रगुप्त और कलम-दवात की पूजा होगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक तिथियों के फेरबदल की वजह से अनेक वर्षों बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है। दिवाली स्वाति नक्षत्र, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग के त्रिवेणी संयोग में मनेगी। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों तुला राशि में गोचर करेंगे। दिवाली के दिन सुबह सूर्यदेव को जल अर्पित करना भी लाभकारी माना गया है।

पुजारी ओम प्रकाश के अनुसार दीपावली की रात महालक्ष्मी के साथ विघ्नहर्ता गणेश जी के पूजन का आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व है। बिना विवेक और बुद्धि के धन टिकता नहीं है। लक्ष्मी जहां धन और वैभव देती हैं, वहीं गणपति उस धन के सही उपयोग की बुद्धि देते हैं और विघ्नों का नाश करते हैं।

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इसी कारण दिवाली पर तिजोरी और धन बढ़ोतरी हेतु कुबेर, ज्ञान के लिए मां सरस्वती, पंचदेव, नवग्रह और गणेश-अंबिका की पूजा का विधान है। पंडित गोल्डी शर्मा ने कहा कि दिवाली पर मात्र पारंपरिक मिट्टी के दीपक ही जलाने चाहिए। मिट्टी का दीपक पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, आकाश, वायु और अग्नि) के संतुलन का प्रतीक है। ऐसे दीयों से घर का वास्तु दोष मिटता है, नेगेटिव एनर्जी समाप्त होती है और पारिवारिक सुख-समृद्धि बढ़ती है।

दुर्ग्याणा के पुजारी पंडित ओम प्रकाश के अनुसार 10 नवंबर को श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में गोवर्धन पूजा होगी। इसमें गाय के गोबर से भगवान गोवर्धन की आकृतियां बना पूजा की जाएगी। 10 को सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक पूजा होगी।

शाम को अन्नकूट की परंपरा मुताबिक भगवान को 108 व्यंजनों व ड्राई फ्रूट्स का भोग लगाया जाएगा, जो पुजारियों द्वारा तैयार किया जाएगा। रात को श्रद्धालुओं में महाप्रसाद बांटा जाएगा। वहीं 7 दिनों बाद छठ पूजा होगी, जिसमें व्रती सरोवर व जलाशयों में जाकर पूजा करेंगे।

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