सड़क हादसे में जान गंवाने वाले ट्रांसपोर्ट इंचार्ज वीर सैनी के परिवार को चंडीगढ़ कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने पनबस की टक्कर से हुई मृत्यु के प्रकरण में परिवार को 75.99 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस राशि पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना

5 साल की बेटी को एक्टिवा पर बैठाकर जा रहे थे वीर सैनी

हादसा 12 मई 2024 को शाम लगभग 7 बजे मोगा के जीटी रोड पर चर्च और मनचंदा मेडिकल शॉप के पास हुआ था। मोगा-गोबिंदगढ़ बस्ती निवासी 39 वर्षीय वीर सैनी अपनी 5 साल की बेटी निमरत सैनी को एक्टिवा पर बैठाकर अमृतसर रोड से जोगिंदर चौक की ओर जा रहे थे। उनके पीछे भाई मुकेश कुमार सैनी भी अपनी अलग एक्टिवा पर चल रहे थे।

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याचिका के अनुसार, इसी दौरान गलत दिशा से तेज रफ्तार में आ रही पनबस (PB-04-AA-7368) ने वीर सैनी की एक्टिवा को टक्कर मार दी। टक्कर लगने से वीर सड़क पर गिर गए और बस के पिछले पहिए के नीचे उनका सिर आ गया। हादसे में उनकी मौके पर ही जान चली गई। बेटी निमरत को भी चोटें आईं।

इस प्रकरण में थाना सिटी मोगा में बस चालक अमनदीप सिंह के खिलाफ IPC की धारा 279, 304-A, 337 और 427 के तहत FIR दर्ज की गई थी।

ITR के आधार पर तय की 39 हजार रुपये मासिक आय

वीर सैनी जीरा स्थित मालब्रोस इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड में ट्रांसपोर्ट इंचार्ज के पद पर कार्यरत थे। परिवार ने उनकी मासिक आय 60 हजार रुपये होने का दावा किया था। हालांकि, अदालत ने साल 2023-24 के आयकर रिटर्न को आधार बनाया। इसमें उनकी सालाना आय 4.90 लाख रुपये दर्ज थी। टैक्स कटौती के पश्चात कोर्ट ने उनकी शुद्ध मासिक आय 39 हजार रुपये मानी।

सुनवाई के बीच बस चालक अमनदीप सिंह ने अदालत में गवाही नहीं दी। ट्रिब्यूनल ने उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर मामले का फैसला किया।

ऐसे तय हुआ 75.99 लाख रुपये का मुआवजा

अदालत ने मृतक की उम्र 39 वर्ष मानते हुए आय में 40 प्रतिशत फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट्स जोड़े और व्यक्तिगत खर्च हेतु एक चौथाई राशि घटाई। इसके पश्चात 15 के मल्टीप्लायर के आधार पर आश्रितों की आय के नुकसान की गणना की गई।

मुआवजे में 73.71 लाख रुपये आय के नुकसान हेतु, 1.92 लाख रुपये चार आश्रितों के कंसोर्टियम, 18 हजार रुपये लॉस ऑफ एस्टेट और 18 हजार रुपये अंतिम संस्कार खर्च के शामिल किए गए। इस तरह कुल मुआवजा 75.99 लाख रुपये तय किया गया।

पत्नी और बच्चों को 30-30%, मां को 10% हिस्सा

वीर सैनी की पत्नी रामा, बेटी निमरत, बेटे लक्ष वीर और मां मनजीत सैनी की ओर से मुआवजे का दावा किया गया था। कोर्ट ने कुल राशि में पत्नी, बेटी और बेटे को 30-30 प्रतिशत और मां को 10 प्रतिशत हिस्सा देने का निर्देश दिया है।

दोनों नाबालिग बच्चों के हिस्से की राशि राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडीआर के रूप में सुरक्षित रखी जाएगी। कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, यह रकम उनके बालिग होने या तीन साल की अवधि पूरी होने, जो भी पश्चात में हो, उसके पश्चात ही निकाली जा सकेगी।

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