पठानकोट में रावी का रौद्र रूप, उफान पर सुए: सैलाब की मार से 30 गांवों के संपर्क टूटने का खतरा; सरना-फरीदानगर मुख्य मार्ग में बिगड़े हालात – Pathankot News
पठानकोट जिला प्रशासन की लापरवाही और सिंचाई विभाग की कुंभकर्णी नींद के कारण गांव सरना, जमालपुर और फरीदानगर क्षेत्र पर भारी तबाही का संकट मंडरा रहा है। उफनते सूए के पानी के तेज बहाव ने फरीदानगर को जाने वाली मुख्य सड़क को नीचे से खोखला करना शुरू कर दिया है। सुए और नहर किनारे बनी दुकानों और घरों में रहने वाले लोगों की नींद उड़ चुकी है। दिन-रात किसी बड़े खतरे के अंदेशे से लोग हर वक्त डर के साए में रहने को मजबूर हैं। पिछले साल अगस्त में आई भीषण बाढ़ के घाव अभी भरे भी नहीं थे कि अब इस मुख्य मार्ग, स्थानीय दुकानों और खोखों के नहर के तेज सैलाब में बह जाने का सीधा खतरा पैदा हो गया है। हालात इतने बदतर हैं कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है और करीब 30 गांवों का आपस में संपर्क पूरी तरह टूट सकता है। पानी सब बहा ले जाएगा, हम गरीब कहां जाएंगे?
दुकानदार और पीड़ित जसवंत सिंह निवासी गांव जमालपुर ने हाथ जोड़ते हुए प्रशासन के खिलाफ अपना भारी गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा कि हम गरीब और दिहाड़ीदार लोग हैं। यहां हमारी दुकानें हैं, जिससे हमारे परिवारों का पेट पलता है। नहर के पानी की रफ्तार इतनी तेज है कि देखते ही डर लगता है। पानी सड़क को नीचे से काट चुका है। अगर ये दुकानें और सड़क बह गई, तो हम कहां जाएंगे? हमारा कारोबार ठप हो जाएगा। हम सरकार और सिंचाई विभाग के आगे हाथ जोड़कर थक चुके हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। अधिकारी झाड़ रहे पल्ला-ग्रामीण
ग्रामीणों का आरोप है कि पानी का स्तर बढ़ता जा रहा है। पानी का बहाव तेज होता जा रहा है। जब वे इस गंभीर समस्या को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों के पास जाते हैं, उन्हें कहा जाता है कि पानी कम करवाया जाए तो अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि यह हमारे हाथ में नहीं है, पीछे से अफसरों ने पानी छोड़ना है। परेशान लोगों का कहना है कि अगर सरकार ने हमारी सुध नहीं लेनी, तो हमें भी इस पानी में ही बहा दे, ताकि रोज-रोज के इस खौफ से मुक्ति मिले। तबाही का मंजर: ऐतिहासिक घराट बहे, पानी में तैर रहे पेड़
स्थानीय निवासी सतपाल ने बताया कि पानी का तांडव इस कदर जारी है कि इस रास्ते में जो ऐतिहासिक घराट (पनचक्की) हुआ करते थे, वे पूरी तरह से पानी के तेज बहाव में बह चुके हैं। अब वहां उनका नामो-निशान तक नहीं बचा है। यही नहीं, नहर के पानी में पेड़ टूटकर बह रहे हैं, जिन्हें निकालने की जहमत तक विभाग नहीं उठा रहा। ये पेड़ पानी के बहाव को रोकते हैं, जिससे पानी ओवरफ्लो होकर सड़क और गांवों की तरफ मार कर रहा है। महिलाओं और राहगीरों के लिए नरक बनी सड़क
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, फरीदानगर को जाने वाली यह मुख्य सड़क इलाके की लाइफलाइन है। इसके साथ 30 के करीब गावों की कनेक्टिविटी है। पिछले साल की बाढ़ के बाद जो अस्थाई ‘डंगा’ (सुरक्षा दीवार) लगाया गया था, वह भी इस तेज बहाव में बहने की कगार पर है। सड़क पर घुटनों से ऊपर तक पानी जमा हो जाता है, जिसके कारण राहगीरों, विशेषकर महिलाओं को कपड़े ऊपर उठाकर बेहद दयनीय और असुरक्षित स्थिति में इस गंदे पानी से गुजरना पड़ता है।ॉ मुख्य मांगें: प्रशासन तुरंत नींद से जागे
तबाही के मुहाने पर खड़े 30 गांवों के लोगों ने सरकार और प्रशासन से सीधे तौर पर निम्नलिखित मांगें की हैं:
बहाव पर नियंत्रण: नहर (सूए) के पीछे से आ रहे पानी की रफ्तार को तुरंत नियंत्रित और कम किया जाए।
पुख्ता सड़क और सुरक्षा दीवार: खोखली हो चुकी फरीदा नगर रोड का तुरंत नए सिरे से निर्माण किया जाए और पक्का डंगा (कंक्रीट की दीवार) लगाकर पानी का रास्ता रोका जाए।
मलबे और पेड़ों की सफाई: नहर के बीच फंसे हुए पेड़ों और मलबे को तुरंत क्रेन के जरिए बाहर निकाला जाए ताकि पानी का प्राकृतिक बहाव सुचारू हो सके। ग्रामीणों ने अधिकारियों को दी चेतावनी
पिछले साल की बाढ़ के बाद भी सरकार ने कोई सबक नहीं लिया। अगर इस बार हमारी दुकानें, घर या यह मुख्य मार्ग ढह गया, तो पूरी दुनिया रुड़ (बह) जाएगी और यहां ढूंढने से भी कुछ नहीं मिलेगा। अगर प्रशासन ने तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए, तो इलाके के हजारों लोग सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। जेई की ड्यूटी लगाई, कल रिपोर्ट लेकर करेंगे हल
नहरी विभाग से एसडीओ मोहित सिंह ने कहा कि उनके ध्यान में ये मामला आया है। जेई की ड्यूटी लगाई है। वो बुधवार को मौके पर जाकर रिपोर्ट बनाएंगे। फिर काम शुरू करवा दिया जाएगा। जल्द ही नया डंगा बनवाया जाएगा।
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