1980-2000 के दौर की सच्चाई सामने लाने की मांग: भाजपा नेता जगमोहन सिंह राजू ने पंजाब सत्य, जवाबदेही आयोग बनाने की उठाई मांग – Amritsar News
पंजाब के पूर्व आईएएस अधिकारी और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. जगमोहन सिंह राजू ने राज्यपाल को एक अहम पत्र लिखकर पंजाब में पंजाब सत्य, जवाबदेही एवं मेल-मिलाप आयोग गठित करने की मांग की है। यह मांग ऐसे समय में सामने आई है, जब फिल्म “सतलुज” के रिलीज होने और बाद में अचानक वापस लिए जाने के बाद एक बार फिर पंजाब के 1980 से 2000 के दौर को लेकर बहस तेज हो गई है। डॉ. राजू ने अपने पत्र में कहा है कि चार दशक बीत जाने के बावजूद पंजाब आज भी उस दौर की घटनाओं को लेकर अलग-अलग और परस्पर विरोधी धारणाओं में बंटा हुआ है। उनका कहना है कि जब तक उस समय की सच्चाई निष्पक्ष और विश्वसनीय तरीके से सामने नहीं आएगी, तब तक स्थायी शांति और सामाजिक मेल-मिलाप संभव नहीं होगा। पीड़ितों को मिलेगा अपनी बात रखने का मंच पत्र में राज्यपाल से आग्रह किया गया है कि वे पंजाब सरकार को एक स्वतंत्र और निष्पक्ष आयोग बनाने के लिए प्रेरित करें। प्रस्तावित आयोग का उद्देश्य वर्ष 1980 से 2000 के बीच पंजाब में उग्रवाद और हिंसा से जुड़े घटनाक्रमों का प्रामाणिक रिकॉर्ड तैयार करना होगा। साथ ही उस दौर के पीड़ितों, उनके परिवारों और अन्य संबंधित पक्षों को अपनी बात और साक्ष्य रखने का अवसर भी दिया जाए। डॉ. राजू ने यह भी सुझाव दिया है कि आयोग आतंकवाद के पीड़ितों, मानवाधिकार उल्लंघनों से प्रभावित लोगों और अन्य सभी प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे, पुनर्वास और राहत संबंधी सिफारिशें करे। इसके अलावा आयोग राजनीतिक जवाबदेही तय करने, संवैधानिक संस्थाओं को मजबूत करने, मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानून के शासन को और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कानूनी व प्रशासनिक सुधारों की भी अनुशंसा करे। अतीत से सीख, भविष्य की राह अपने पत्र के अंत में डॉ. जगमोहन सिंह राजू ने कहा कि पंजाब अपने अतीत को बदल नहीं सकता, लेकिन उसे ईमानदारी से समझकर उससे सीख अवश्य ले सकता है। उनका मानना है कि सच्चाई, जवाबदेही और मेल-मिलाप के रास्ते पर आगे बढ़कर ही पंजाब आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक शांतिपूर्ण, एकजुट और विश्वास से भरा भविष्य तैयार कर सकता है।
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