पंजाब के फिरोजपुर जिले में फिरौती की धमकियों के बीच बदमाशों के हौसले इतने बुलंद हैं कि सुरक्षा मिलने के बाद भी कारोबारी का घर दोबारा निशाने पर आ गया। ममदोट कस्बे में गुरुवार देर रात बाइक सवार नकाबपोश युवकों ने किराना कारोबारी मुनीश चोपड़ा के घर के मुख्य गेट पर फायरिंग की और फरार हो गए। वारदात के समय कारोबारी का परिवार घर के अंदर मौजूद था। परिवार की सुरक्षा हेतु तैनात पुलिसकर्मी भी मकान के अंदर था, मगर हमलावरों को रोकने हेतु उसकी ओर से कोई जवाबी कार्रवाई नहीं किए जाने की जानकारी सामने आई है। करीब 18 दिन पहले भी इसी घर पर गोलियां चलाई गई थीं। उस समय हमलावरों ने पांच राउंड फायर किए थे। कारोबारी को इससे पहले विदेशी फोन नंबरों से लाखों रुपए की फिरौती मांगने की धमकी मिली थी। शिकायत के पश्चात पुलिस ने उनकी सुरक्षा हेतु सरकारी गनमैन तैनात किया था। इसके बावजूद दूसरी बार घर को निशाना बनाए जाने से पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पहली वारदात में गेट पार कर कार में लगी थीं गोलियां

कारोबारी के घर पर पहली फायरिंग 18 अक्टूबर की रात करीब 10:38 बजे हुई थी। बाइक पर आए हमलावरों ने घर के मुख्य गेट पर पांच गोलियां चलाई थीं। इनमें से गोलियां गेट को पार करते हुए अंदर खड़ी कार में जा लगी थीं। घटना के वक्त परिवार के सदस्य घर के अंदर सो रहे थे। गनीमत रही कि फायरिंग में कोई चोटिल नहीं हुआ।वारदात के पश्चात इलाके में दहशत फैल गई थी। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और गोलियों के खाली खोल बरामद किए थे। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगालने की बात कही गई थी।

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विदेशी नंबरों से कॉल कर मांगे थे लाखों रुपए

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ममदोट में किराना स्टोर चलाने वाले मुनीश चोपड़ा को कुछ दिन पहले विदेशी फोन नंबरों से फिरौती हेतु कॉल आई थी। फोन करने वालों ने उनसे लाखों रुपए की मांग की थी। कथित तौर पर रकम का इंतजाम करने हेतु 20 दिन का वक्त भी दिया गया था। धमकी मिलने के पश्चात कारोबारी ने जिला पुलिस को शिकायत दी थी। इसके पश्चात उनकी सुरक्षा को लेकर पुलिस की ओर से कदम उठाए गए और सरकारी गनमैन तैनात किया गया था। हालांकि, फिरौती मांगने वाले कौन लोग थे और उनका किसी गैंग से संबंध था या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

पहले गनमैन वापस बुलाया, फिर दोबारा मिली सुरक्षा

कहा जा रहा है कि पहली फायरिंग की घटना से कुछ दिन पहले कारोबारी के घर से गनमैन वापस बुला लिया गया था। हालांकि, पहली वारदात के पश्चात उन्हें दोबारा सुरक्षा मुहैया करवाई गई थी। अब दूसरी फायरिंग के बीच सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी घर के अंदर मौजूद था। इसके बावजूद बाइक सवार हमलावर गोलियां चलाकर आसानी से फरार हो गए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पुलिसकर्मी की मौजूदगी के बाद भी हमलावरों को रोकने हेतु कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या पुलिसकर्मी को हमले की आशंका का अंदाजा नहीं लग पाया या हमलावर अचानक वारदात कर निकल गए?

डीएसपी और थाना प्रभारी ने संभाली थी पहली घटना की छानबीन

18 अक्टूबर की फायरिंग के पश्चात डीएसपी फिरोजपुर रूरल करण शर्मा और थाना ममदोट के प्रभारी हरकीरत सिंह समाध पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे थे। पुलिस ने घटनास्थल से गोलियों के खाली खोल बरामद किए थे। इसके अतिरिक्त आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान करने की बात कही गई थी।

दूसरी फायरिंग के पश्चात पुलिस की कार्रवाई पर प्रश्न

एक ही कारोबारी के घर पर दूसरी बार फायरिंग होने से ममदोट के व्यापारियों और स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि फिरौती की शिकायत मिलने और पहली फायरिंग के पश्चात पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने हेतु क्या कार्रवाई की। क्या पहली वारदात में शामिल हमलावर ही दूसरी घटना को अंजाम देने आए थे। क्या कारोबारी को मिली फिरौती की धमकी के पीछे कोई संगठित गिरोह है।

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