नीतीश कुमार आज मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। कल यानी 15 अप्रैल को भाजपा की सरकार बन जाएगी। 2025 विधानसभा चुनाव में दो तिहाई से अधिक बहुमत से जीते NDA की सरकार बने अभी 5 महीने ही हुए थे कि एक बार फिर सरकार बनने की कवायद की जा रही है। दरअसल, बीते 15 साल से बिहार की यह नियती ही बन गई है। जनता गठबंधन को बहुमत दे रही है, लेकिन हर डेढ़-दो साल पर मुख्यमंत्री सरकार बदल दे रहे। बीते 15 सालों में 4 विधानसभा चुनाव हुए, चारों बार पूर्ण बहुमत मिली, लेकिन मुख्यमंत्री की 9 शपथ हुई। अब कल 10वीं होगी। राज्य में बार-बार मुख्यमंत्री शपथ क्यों ले रहे हैं। इससे बिहार के आम लोगों को क्या हासिल हो रहा है। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। 15 साल में 9 बार मुख्यमंत्री की शपथ, कल 10वीं बार बिहार में बार-बार मुख्यमंत्री क्यों ले रहे शपथ बीते 15 साल में 4 विधानसभा चुनाव हुए। चारों बार जनता ने बहुमत की सरकार बनाई, लेकिन मुख्यमंत्री ने 10 बार शपथ ली। इसका सबसे बड़ा कारण नीतीश कुमार की राजनीतिक महत्वाकांक्षा रही है। मोदी के विरोध में दो बार भाजपा छोड़ी 2013 में नीतीश कुमार ने पहली बार भाजपा का साथ छोड़ा था। तब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और भाजपा ने उनको प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बना दिया था। इससे नीतीश कुमार नाराज थे। पॉलिटिकल एनालिस्ट संजय सिंह कहते हैं, ‘नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए सत्ता का बखूबी इस्तेमाल किया। बहुमत वाली सरकार को भी अस्थिर करते रहे। इससे जनता को फायदा कम, नेताओं को काफी फायदा हुआ। नीतीश कुमार की इस तरह की पॉलिटिक्स की खूब आलोचना हुई।’ सरकारें बदली, लेकिन लोगों की हालत नहीं सुधरी सरकार बदली तो नेताओं की संपत्ति 21 गुना तक बढ़ी पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रियदर्शी रंजन कहते हैं, ‘राज्य में पार्टियों की सरकार बदलने से लोगों को कोई फायदा नहीं है। यह सिर्फ नेताओं की आपसी सत्ता सुख के कारण ऐसा हो रहा है।’
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