फरीदकोट में AAP सरकार पर भड़के डल्लेवाल: लैंड मॉर्गेज पर धरनों की सुनवाई न होने से रोष, एक जून को चंडीगढ़ में घेराव करेंगे किसान – Faridkot News
फरीदकोट के गांव हरी नौ में करीब 3 महीने पहले कर्ज के बोझ से परेशान दो सगे किसान भाइयों द्वारा ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या करने के मामले ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। भारतीय किसान यूनियन (सिद्धूपुर) की ओर से कृषि कर्ज और बैंकों की कथित ‘धक्काशाही’ के खिलाफ पंजाब भर में मोर्चा खोल दिया गया है। फरीदकोट में बुधवार को हुई प्रांतीय बैठक के बाद संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल ने आंदोलन को और तेज करते हुए 1 जून को चंडीगढ़ में पीएडीबी (लैंड मॉर्गेज) बैंक के रजिस्ट्रार कार्यालय के घेराव का बड़ा ऐलान किया है। 29 मई को जिलों में रणनीति, 1 जून को चंडीगढ़ कूच
किसान नेता डल्लेवाल ने बताया कि पंजाब के कई जिलों में पिछले ढाई महीने से पीएडीबी बैंकों के बाहर लगातार धरने दिए जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन और सरकार की ओर से कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई है। इसी के विरोध में अब आर-पार की लड़ाई की रणनीति तैयार की गई है। डल्लेवाल ने कहा, “29 मई को पंजाब के सभी जिलों के किसान नेता अपने-अपने क्षेत्रों में बैठकें करके आंदोलन की रूपरेखा तय करेंगे। इसके बाद 1 जून को भारी संख्या में किसान मोहाली में इकट्ठा होकर चंडीगढ़ के लिए कूच करेंगे।” किसानों की मुख्य मांगें: कर्ज लेते समय गारंटी के तौर पर लिए गए खाली चेक किसानों को वापस किए जाएं। कर्ज से परेशान किसानों के लिए ‘वन टाइम सेटलमेंट’ (OTS) की व्यवस्था की जाए। संघर्ष के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज किए गए सभी पुलिस मामलों को तुरंत वापस लिया जाए।
“किसानों के हित में बने बैंक ही कर रहे शोषण, हो सीबीआई जांच” बैठक को संबोधित करते हुए जगजीत सिंह डल्लेवाल ने सरकारी तंत्र पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि जो बैंक कभी किसानों की मदद और हित के लिए बनाए गए थे, वे आज किसानों के मानसिक और आर्थिक शोषण का मुख्य केंद्र बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि कर्ज के समय लिए गए चेकों का गलत इस्तेमाल हो रहा है और कई जगहों पर तो कर्ज चुकाने के बाद भी किसानों को फर्जी क्लीयरेंस लेटर थमा दिए गए हैं। डल्लेवाल ने मांग की है कि इन बैंकों की कार्यप्रणाली और इसमें शामिल अधिकारियों की सीबीआई (CBI) जांच कराई जाए ताकि बैंकिंग सिस्टम में चल रहे कथित घोटालों का सच जनता के सामने आ सके। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक बैंकों के बाहर चल रहे पक्के धरने इसी तरह जारी रहेंगे।
Source link

