वेटिंग पीरियड का हवाला देकर क्लेम ठुकराया, अब 30 हजार रुपए जुर्माना – Jalandhar News

वेटिंग पीरियड का हवाला देकर क्लेम ठुकराया, अब 30 हजार रुपए जुर्माना – Jalandhar News



भास्कर न्यूज | जालंधर स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के तहत हिस्टेरोक्टॉमी (बच्चेदानी ऑपरेशन) का क्लेम 24 माह की वेटिंग पीरियड का हवाला देकर खारिज करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण कमिशन ने बीमा कंपनी को जुर्माना लगाया। कमिशन ने माना कि बीमा कंपनी क्लेम खारिज करने के लिए यह साबित नहीं कर सकी कि बीमित महिला पहले से बीमारी से पीड़ित थी या उसने कोई तथ्य छिपाया था। कपूर गांव निवासी की तरफ से बजाज अलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ शिकायत दायर की थी, जिसमें उपभोक्ता ने बताया कि उन्होंने मई 2023 में स्टार पैकेज हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी, जिसके लिए 17,982 रुपए प्रीमियम जमा कराया गया था। पॉलिसी में परिवार के चार सदस्य शामिल थे। उपभोक्ता को फाइब्रॉइड यूटेरस की समस्या होने पर जून 2023 में आदमपुर स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका हिस्टेरोक्टॉमी ऑपरेशन हुआ। इलाज और अस्पताल खर्च पर करीब दो लाख रुपए खर्च हुए। इसके बाद बीमा कंपनी के पास क्लेम दायर किया गया, लेकिन कंपनी ने 31 अगस्त 2023 को यह कहते हुए क्लेम अस्वीकार कर दिया कि हिस्टेरोक्टॉमी और ट्यूमर, सिस्ट अथवा पॉलीप से संबंधित उपचार पॉलिसी के पहले 24 महीनों में कवर नहीं हैं। कमिशन ने अपने आदेश में कहा कि कंपनी ऐसा कोई मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट या अस्पताल दस्तावेज पेश नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो कि बीमित महिला पॉलिसी लेने से पहले इस बीमारी से पीड़ित थी या उसने कोई तथ्य छिपाया था। आयोग ने यह भी माना कि उपचार पॉलिसी अवधि के दौरान डॉक्टरों की सलाह पर कराया गया और उसकी आवश्यकता मेडिकल रिकॉर्ड से स्पष्ट है। कमिशन अध्यक्ष डॉ. हरवीन भारद्वाज व सदस्य ज्योत्सना और जसवंत सिंह ढिल्लों ने शिकायत आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को उपचार संबंधी खर्चों का भुगतान करने का आदेश दिया। जिसमें कंपनी को चिकित्सा खर्चों की राशि पर क्लेम अस्वीकृति की तारीख से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए 20 हजार व वकील खर्च के रूप में 10 हजार भी अदा करने होंगे। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दावा किया कि यह उपचार वेटिंग पीरियड के दायरे में आता है और क्लेम नियमों के अनुसार खारिज किया गया। वहीं शिकायतकर्ताओं ने तर्क दिया कि पॉलिसी जारी करते समय उन्हें अस्पताल और उपचार संबंधी खर्च कवर होने का भरोसा दिया गया था।



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