पंजाब सरकार के 13 अप्रैल को पास किए गए जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब संशोधन कानून के मसले के समाधान हेतु गठित सब कमेटी ने पंजाब सरकार को दो-टूक बताया कि पहले संशोधित कानून के लागू करने पर पाबंदी लगे, फिर तालमेल कमेटी की संयुक्त मीटिंग के कार्यक्रम को ले

रोक से पहले द्विपक्षीय वार्ता नहीं की जाएगी। श्री अकालतख्त की गठित 5 सदस्यीय तालमेल कमेटी ने शनिवार को बैठक में साफ किया कि बिना रोक के वार्ता संभव नहीं है। गौर हो कि संशोधन एक्ट-2026 को लेकर सरकारी को-ऑर्डिनेशन कमेटी के नोडल ऑफिसर ने 23 अक्टूबर को श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय को भेजे पत्र में कमेटी से बातचीत का दौर आरंभ करने की अपील की थी, जिसके मद्देनजर निर्णय लिया गया है। गठित कमेटी ने सरकार को पत्र भेजकर फैसले की जानकारी दी है।

मीटिंग में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, रिटायर्ड जस्टिस रूपिंदर सिंह सोढ़ी, रिटायर्ड जस्टिस मोहिंदर मोहन सिंह बेदी, सीनियर एडवोकेट पूरन सिंह हुंदल, सिख स्कॉलर डॉ. केहर सिंह और प्रो. जगमोहन सिंह शामिल थे। कोऑर्डिनेशन कमेटी के नोडल ऑफिसर की तरफ से कानून के बारे में श्री अकाल तख्त साहिब की एक्सपर्ट कमेटी से बात करने हेतु लिखे गए पत्र पर चर्चा हुई।

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कमेटी ने फैसला किया कि बातचीत आगे बढ़ाने से पहले सरकार श्री अकाल तख्त साहिब के 29 जून को जारी ऑर्डर के अनुसार अमेंडमेंट एक्ट को लागू करने पर पूरी प्रकार रोक लगाए और ऑर्डर के अनुसार अब तक कार्रवाई की सूचना भेजे।

उन्होंने कहा कि पहले एक्सपर्ट कमेटी ने भी बैठक की थी और 7 अगस्त को प्रेस स्टेटमेंट के जरिए सरकार से श्री अकाल तख्त साहिब के 29 जून के आदेशों पर कम्प्लायंस रिपोर्ट देने को बताया था, परंतु अब तक सरकार ने ऐसा नहीं किया है।

उन्होंने बताया कि जब तक श्री अकाल तख्त साहिब से इस पर सहमत नहीं हो जाती, तब तक एक्ट को लागू नहीं किया जाना चाहिए। कमेटी मेंबर्स ने बताया कि विधानसभा स्पीकर कुलतार संधवां द्वारा 8 मई और बाद में 29 जून को श्री अकाल तख्त साहिब से सरकार के कैबिनेट मंत्रियों और विधायकों को दिए गए आदेशों के बाद भी यह सरकार की गलत नीयत का नतीजा है।

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