2.5 लाख तक के बिल विवाद का निपटारा डिवीजन दफ्तर में होगा, अदालत जाने की जरूरत नहीं – Jalandhar News
प्रवीण पर्व | जालंधर बिजली उपभोक्ताओं की ताकत बढ़ेगी। बिजली बिलों के विवादों की सुनवाई के पैट्रन में पावरकॉम ने बदलाव के लिए पंजाब के रेगुलेटरी कमिशन में याचिका दायर करके मंजूरी मांगी है। इसके तहत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में बिलों के विवादों की रकम का दायरा 5 गुना तक बढ़ाया जाएगा। अब तक 50,000 से ऊपर के बिल विवाद के लिए उपभोक्ताओं को सर्कल या जोनल स्तर के चक्कर काटने पड़ते थे। अब नए प्रस्ताव के तहत अब 2.5 लाख तक के मामलों की सुनवाई सीधे आपके नजदीकी डिवीजनल फोरम में ही हो सकेगी। इसे आम बोलचाल में एक्सईएन दफ्तर कहा जाता है। अब पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन अपने पुराने रेगुलेशन 2.9 में संशोधन करेगा। इसी कारण उक्त याचिका दायर कर दी गई है। वित्तीय सीमा कम होने की वजह से कई बार 60,000 या 1 लाख के बिल विवाद वाले उपभोक्ताओं को भी सीधे जिला उपभोक्ता अदालतों का रुख करना पड़ता था। वर्तमान सीमाओं को बदलने की जरूरत क्यों हुई विवादों के निवारण के लिए मौजूदा व्यवस्था साल 2021 में तय की गई थीं। पिछले 5 वर्षों में बिजली की दरों व खपत में बदलाव के कारण विवादित रकमें बड़ी हो गई हैं। वित्तीय सीमा कम होने की वजह से कई बार 60,000 या 1 लाख के बिल विवाद वाले उपभोक्ताओं को भी सीधे जिला उपभोक्ता अदालतों का रुख करना पड़ता था। इससे अदालतों और पॉवरकाम दोनों पर कानूनी मुकदमों का बोझ बढ़ रहा था और मामलों का निपटारा होने में लंबा समय लग रहा था। क्या यह नियम तुरंत लागू हो गया है नहीं। पावरकॉम के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने इसे पास कर दिया है। चूंकि यह मामला पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन रेगुलेशंस, 2016 के नियमों से जुड़ा है, इसलिए इसमें कोई भी संशोधन करने का अंतिम अधिकार सिर्फ रेगुलेटरी कमीशन के पास है । कमीशन से अंतिम मंजूरी (नोटिफिकेशन) मिलते ही इसे पूरे पंजाब में लागू कर दिया जाएगा। उपभोक्ता मामलों की सुनवाई के लिए विभिन्न स्तरों पर फोरम का गठन किया गया है, जिसके तहत कॉर्पोरेट फोरम में 5 लाख रुपये से अधिक के सभी मामलों और 25 लाख रुपये से अधिक के सभी मामलों की सुनवाई होती है। वहीं, जोनल फोरम के अंतर्गत 2 लाख रुपये से अधिक और 5 लाख रुपये तक के मामले तथा 10 लाख रुपये से अधिक और ₹25 लाख तक के मामले आते हैं। इसके अलावा, सर्कल फोरम में 50,000 रुपये से अधिक और 2 लाख रुपये तक के मामले और 2.5 लाख रुपये से अधिक और ₹10 लाख तक के मामलों का निपटारा किया जाता है। अंत में, डिवीजनल फोरम को 50,000 रुपये तक के सभी मामलों और 2.5 लाख रुपये तक के सभी मामलों की सुनवाई का अधिकार है। विवाद निवारण फोरम क्या है और यह बिजली उपभोक्ताओं के लिए क्यों जरूरी जवाब : बिजली बिल में गड़बड़ी, गलत टैरिफ लगाने, मीटर खराब होने या मीटरिंग में किसी तरह के विवाद के निपटारे के लिए पीएसपीसीएल के भीतर ही एक विभागीय अदालत जैसी व्यवस्था होती है। इसे कंज्यूमर ग्रीवेंस रिड्रेसल फोरम कहा जाता है । यह चार स्तरों (डिवीजन, सर्कल, जोन और कॉर्पोरेट) पर काम करती है। उपभोक्ता को कोर्ट जाने से पहले यहां अपनी शिकायत दर्ज कराने का अधिकार होता है । बदलाव से आम उपभोक्ता को क्या सीधा फायदा मिलेगा सबसे बड़ा फायदा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और तेजी से न्याय होगा। अब 2.5 लाख तक के बिलिंग फ्रॉड या गलत बिल के मामलों की सुनवाई सीधे आपके शहर/कस्बे के डिवीजनल दफ्तर में ही हो जाएगी। उपभोक्ताओं को पटियाला में पावरकाम के मुख्य दफ्तर या फिर जोनल दफ्तर के चक्कर नहीं काटने होंगे। इससे समय और पैसा दोनों बचेंगे।
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