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विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के मौके पर दिल्ली के सफदरजंग का मकबरे को बुधवार शाम नीली रोशनी से सजाया गया। यह पहल गुरुग्राम स्थित ऑटिज्म सेंटर फॉर एक्सीलेंस (ACE) की ओर से की गई।
ये आयोजन दुनिया भर में चल रहे लाइट इट अप ब्लू (LightItUpBlue) अभियान के तहत किया गया, जिसमें दुनिया भर के प्रमुख स्मारकों को नीले रंग में रोशन किया जाता है। इसका उद्देश्य ऑटिज्म से जुड़े लोगों के प्रति जागरूकता और स्वीकृति बढ़ाना है।
इस पहल में सब्यता फाउंडेशन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी सहयोग किया।
‘हर जीवन का महत्व’ थीम पर आयोजन
हर साल 2 अप्रैल को मनाए जाने वाले इस दिन की थीम इस बार ‘ऑटिज्म और मानवता-हर जीवन का मूल्य’ रखी गई थी। नीली रोशनी, जो ऑटिज्म जागरूकता का वैश्विक प्रतीक मानी जाती है, शांति, स्वीकृति और समझ का संदेश देती है।
स्मारक की नीली रोशनी ने समाज को यह संदेश दिया कि ऑटिज्म से जुड़े लोगों को समझना, स्वीकार करना और उन्हें समान अवसर देना जरूरी है।
11 साल से काम कर रहा है ACE

ACE पिछले 11 साल से ऑटिज्म से जुड़े बच्चों और युवाओं के लिए काम कर रहा है। यह संस्था व्यक्तिगत और वैज्ञानिक तरीकों से शिक्षा और जीवन कौशल विकसित करने में मदद करती है।
आयोजन पर संस्था की संस्थापक डॉ. अर्चना नायर ने कहा कि हर व्यक्ति में समाज का हिस्सा बनने की क्षमता होती है और ऑटिज्म से जुड़े लोग जीवन में खुशी और संतुलन लाते हैं।
इस आयोजन में शिक्षकों, परिवारों, समर्थकों और समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया। इस तरह की पहल के जरिए समाज में जागरूकता बढ़ाने और ऑटिज्म से जुड़े लोगों को मुख्यधारा में लाने की कोशिश की जा रही है।
क्या है ऑटिज्म?
ऑटिज्म एक दिमागी स्थिति है जो बचपन से विकसित होती है और पूरी उम्र रहती है। इसमें व्यक्ति को दूसरों से बातचीत करने, अपनी बात समझाने और सामाजिक रिश्ते बनाने में कठिनाई होती है। ऑटिज्म से प्रभावित व्यक्ति अक्सर एक ही काम या व्यवहार को बार-बार दोहराते हैं।
भारत में लगभग 1.8 से 2 करोड़ लोग ऑटिज्म से प्रभावित हैं। दुनिया भर में हर 100 में से 1 बच्चा ऑटिज्म स्पेक्ट्रम पर है।
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