पंजाब- 2 परिवारों की 2 पीढ़ियां अकाल तख्त पर तलब: पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, अब पोते संधवां की पेशी; पूर्व CM बादल, उनके बेटे सुखबीर भी पेश हुए – Ludhiana News
पंजाब के 2 दिग्गज राजनीतिक परिवारों को श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होना पड़ा। 42 साल पहले देश के तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह को अकाल तख्त ने तलब किया था। अब उनके भाई के पोते कुलतार सिंह संधवां को श्री अकाल तख्त के सामने पेश होना पड़ा।
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संधवां परिवार के अलावा पंजाब के 5 बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे व शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को अकाल तख्त पर पेश होना पड़ा। ज्ञानी जैल सिंह, प्रकाश सिंह बादल व सुखबीर बादल को अकाल तख्त से बाकायदा धार्मिक सजा भी सुनाई गई।
हालांकि विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को अभी श्री अकाल तख्त साहिब से सिर्फ पेशी के लिए तलब किया गया, पर उन्हें तख्त से अभी कोई सजा नहीं सुनाई गई।
धार्मिक मामलों के जानकार व पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के धार्मिक डिपार्टमेंट के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. हरपाल सिंह पन्नू का कहना है कि अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने बेअदबी कानून में संशोधन के लिए जो आदेश दिए हैं, अगर उन्हें नहीं माना जाता तो कुलतार सिंह संधवां को भी सजा सुनाई जा सकती है।
श्री अकाल तख्त के सामने पेश हुए कुलतार सिंह संधवां। फाइल फोटो
पहले ज्ञानी जैल सिंह, अब कुलतार संधवां, इन्हें क्यों पेश होना पड़ा:-
- राष्ट्रपति पद पर रहते हुए लगी थी ‘तनखाह’: फरीदकोट जिले के संधवां गांव से निकले इस परिवार का भारतीय और पंजाब की राजनीति में बहुत बड़ा कद रहा है। ज्ञानी जैल सिंह देश के राष्ट्रपति बने और अब उनके भाई जंगीर सिंह के पोते कुलतार सिंह संधवां पंजाब विधानसभा के स्पीकर हैं। ज्ञानी जैल सिंह जब देश के राष्ट्रपति थे तो श्री अकाल तख्त साहिब से उन्हें सजा के तौर पर तनखैया घोषित किया गया था।
- ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय तीनों सेना के प्रमुख थे: जून 1984 में अमृतसर के गोल्डन टेंपल परिसर में तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ चलाया था। इस सैन्य कार्रवाई के दौरान सिखों के सर्वोच्च धार्मिक स्थल ‘श्री अकाल तख्त साहिब’ की ऐतिहासिक इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। ज्ञानी जैल सिंह उस समय राष्ट्रपति थे और तीनों सेनाएं उनके अधीन काम करती थी।
- दुनिया भर के सिखों में आक्रोश था: सेना ने यह कार्रवाई की थी, इसलिए दुनिया भर के सिख समुदाय में ज्ञानी जैल सिंह के खिलाफ गहरा आक्रोश था। इसके बाद, केंद्र सरकार ने सिख मर्यादाओं और भावनाओं के खिलाफ जाकर बाबा संता सिंह की अगुवाई में अकाल तख्त का सरकारी तौर पर पुनर्निर्माण शुरू कराया। सिख पंथ इसका कड़ा विरोध कर रहा था। ज्ञानी जैल सिंह पर आरोप लगा कि देश का राष्ट्रपति और एक सिख नेता होने के नाते उन्होंने न तो ऑपरेशन ब्लू स्टार को रोका और न ही इस सरकारी कार सेवा का विरोध किया। इस वजह से सिख मर्यादा का उल्लंघन करने के आरोप में उन्हें ‘तनखैया’ घोषित कर दिया गया।
- ज्ञानी जैल सिंह बिना प्रोटोकॉल के हुए थे पेश: 1984 में ज्ञानी किरपाल सिंह श्री अकाल तख्त के मुख्य जत्थेदार थे। उन्होंने ही राष्ट्रपति रहते हुए ज्ञानी जैल सिंह को अकाल तख्त पर तलब किया था और उन्हें तनखैया घोषित किया था। 25 सितंबर 1984 को ज्ञानी जैल सिंह अमृतसर जाकर श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में पांच सिंह साहिबान के सामने व्यक्तिगत तौर पर पेश हुए थे। जब वे अकाल तख्त पहुंचे, तो उन्होंने अपनी राष्ट्रपति वाली सुरक्षा और प्रोटोकॉल को परिसर के बाहर ही छोड़ दिया। वे सिर पर साधारण कपड़ा बांधकर, एक विनम्र ‘अमृतधारी सिख’ के रूप में पेश हुए। उन्होंने लिखित स्पष्टीकरण दिया कि सेना की इस बड़ी कार्रवाई और अकाल तख्त पर टैंकों से हमले की रणनीति के बारे में उन्हें अंधेरे में रखा गया था।
- जूते साफ करने व बर्तन मांजने की मिली थी सजा: जत्थेदार ज्ञानी किरपाल सिंह और सिंह साहबान ने उनके माफीनामे को स्वीकार किया। उसके बाद उन्हें धार्मिक सजा के रूप में आदेश दिया गया कि वे स्वर्ण मंदिर के जोड़ा घर में बैठकर श्रद्धालुओं के जूते साफ करने और लंगर के बर्तन मांजने की सेवा करें। साथ ही अरदास में शामिल होकर अपनी भूल के लिए माफी मांगें और अपनी नेक कमाई से देग चढ़ाएं। राष्ट्रपति ने जमीन पर बैठकर यह सेवा पूरी की, जिसके बाद उन्हें दोषमुक्त किया गया।
- कुलतार सिंह संधवां की 42 साल बाद पेशी: ज्ञानी जैल सिंह के भाई जंगीर सिंह के पोते व पंजाब विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को अब अकाल तख्त ने तलब किया। अकाल तख्त के आदेश पर वो दादा की पेशी के करीब 42 साल बाद श्री अकाल तख्त पर पेश हुए। उन्हें बेअदबी कानून को लेकर तलब किया गया। श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने संधवां से कानून के बारे में सवाल जवाब किए। संधवां ने बेहद विनम्रता से अकाल तख्त के सामने शीश नवाया और भरोसा दिया कि वे पंथक मर्यादा के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएंगे। इसके बाद जब सभी सिख मंत्री और विधायक तलब किए गए तो संधवां फिर अकाल तख्त पहुंचे। फिलहाल यह मामला अकाल तख्त की धार्मिक प्रक्रिया के अधीन है और अंतिम धार्मिक दंड या दोषमुक्ति का फैसला जत्थेदार द्वारा आना बाकी है।

श्री अकाल तख्त साहिब से धार्मिक सजा मिलने के बाद सजा काटते हुए सुखबीर बादल। फाइल फोटो
बादल परिवार के अकाल तख्त पर पेश होने की कहानी सिलसिलेवार जानिए..
- बादल परिवार के पिता-पुत्र को होना पड़ा पेश: पंजाब की सियासत में शिरोमणि अकाली दल और बादल परिवार को दशकों तक पंथ का रक्षक माना जाता रहा, लेकिन इस परिवार की भी दो पीढ़ियों को अकाल तख्त की कड़ी धार्मिक अदालत का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल व उनके बेटे सुखबीर बादल को धार्मिक सजा सुनाई गई।
- निरंकारी विवाद के बाद देनी पड़ी थी सफाई: 13 अप्रैल 1978 (वैसाखी के दिन) अमृतसर में सिखों और अकाली निरंकारियों के बीच टकराव हुआ था, जिसमें 13 सिख मारे गए थे। इस घटना के बाद पूरे पंजाब का माहौल गरमा गया था। प्रकाश सिंह बादल उस समय पंजाब के मुख्यमंत्री थे। उन पर आरोप लगा कि मुख्यमंत्री और अकाली दल का बड़ा नेता होने के बावजूद उनकी सरकार ने निरंकारियों के खिलाफ सख्त रुख नहीं अपनाया और सिखों की धार्मिक भावनाओं की रक्षा करने में उनकी प्रशासनिक मशीनरी विफल रही।
- संगत में गुस्सा, बादल को तलब किया: इस प्रशासनिक और राजनीतिक चूक को लेकर सिख संगत में भारी गुस्सा था। उस दौर में श्री अकाल तख्त साहिब के मुख्य जत्थेदार साधु सिंह भौरा थे। 1979 की शुरुआत में स्पष्टीकरण के लिए अकाल तख्त द्वारा तलब किया गया था, जिसके बाद वे पांच सिंह साहबान के सामने पेश हुए।
- चेतावनी के बाद दी थी माफी: प्रकाश सिंह बादल ने जत्थेदार साधु सिंह भौरा और सिंह साहिबान के सामने पेश होकर बेहद संवेदनशील माहौल में अपनी सरकार की प्रशासनिक मजबूरियों और कानून-व्यवस्था की स्थिति का ब्यौरा दिया। उन्होंने अकाल तख्त के सामने पूरी तरह सरेंडर करते हुए स्पष्ट किया कि उनका मकसद पंथ को ठेस पहुंचाना नहीं था। उनके लिखित और मौखिक स्पष्टीकरण को अकाल तख्त ने स्वीकार कर लिया। चूंकि उन्होंने अपनी गलती मान ली थी और पूरा सहयोग किया, इसलिए उन्हें कोई कड़ा या सार्वजनिक धार्मिक दंड नहीं दिया गया और चेतावनी व अरदास के बाद मामला समाप्त कर दिया गया।
- बेअदबी व राम रहीम को माफी दिलाने का आरोप: प्रकाश सिंह बादल के बेटे व शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर अकाली दल की सरकार (साल 2007 से 2017) के दौरान कई गंभीर पंथक भूलें करने के आरोप लगे। सबसे बड़ा आरोप साल 2015 में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बिना अकाल तख्त आए ही एक विवादास्पद माफीनामा दिलवाने में राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करना था। इसके अलावा साल 2015 के बरगाड़ी बेअदबी कांड और बहबल कलां गोलीकांड की जांच में ढिलाई बरतने के गंभीर आरोप उन पर मढ़े गए। बागी अकालियों की शिकायत पर अकाल तख्त ने उन्हें गंभीर धार्मिक कोताही का दोषी पाया। अकाल तख्त ने उन्हें 30 अगस्त 2024 को ‘तनखैया’ घोषित किया था। इसके बाद वे अपनी भूल स्वीकारने के लिए अकाल तख्त पहुंचे। लंबी धार्मिक सुनवाइयों के बाद, दिसंबर 2024 की शुरुआत में उन्हें अकाल तख्त साहिब के सामने पेश होकर सजा सुनने का आदेश दिया गया।
- कठोर धार्मिक सजा दी गई: अकाल तख्त ने सुखबीर सिंह बादल को बेहद सख्त और ऐतिहासिक ‘तनखाह’ यानि धार्मिक सजा सुनाई। उन्हें आदेश दिया गया कि वे एक आम सेवादार की तरह श्री हरिमंदिर साहिब के जोड़ा घर में बैठकर श्रद्धालुओं के जूते साफ करें। पैर में फ्रैक्चर होने के बावजूद वे व्हीलचेयर पर बैठकर गले में तख्ती लटकाकर बैठे, जिस पर उनकी भूलें लिखी थीं। इसके अलावा उन्हें लंगर हॉल में जाकर संगत के झूठे बर्तन साफ करने की सजा दी गई। उन्हें स्वर्ण मंदिर परिसर के साथ-साथ अपने पैतृक गांव बादल के स्थानीय गुरुद्वारे में भी जाकर कड़ाही मांजने और झाड़ू लगाने की सेवा करनी पड़ी। सुखबीर सिंह बादल ने कई दिनों तक इस कड़ी धार्मिक सजा को भुगता, जिसके बाद ही उन्हें पंथक तौर पर राहत मिल सकी।
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कल अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब में सिख मंत्रियों-विधायकों की पेशी के बाद ये साफ हो गया कि सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो, वह पंथ को नजरअंदाज नहीं कर सकती। जत्थेदार के सवालों के आगे बेअदबी कानून को विधायकों की बिना पढ़े मंजूरी से जहां AAP सरकार एक्सपोज हुई। वहीं जत्थेदार ने सरकार को पंजाब में पंथ की अहमियत का भी पाठ पढ़ाया। पेशी के दौरान ही मीडिया मैनेजमेंट तक को लेकर जत्थेदार ने सरकार घेर ली (पढ़ें पूरी खबर)
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श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को बेअदबी कानून जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 में एक महीने में संशोधन करने का आदेश दिया है। सोमवार (29 जून) को हुई सुनवाई के दौरान अकाल तख्त जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने कानून पर 6 एतराज जताए।
उन्होंने कहा कि सरकार बेअदबी करने वालों को सजा देने के लिए कानून बनाए, इस पर कोई एतराज नहीं है, लेकिन सिख शब्दावली, मर्यादा और पंथ से जुड़े मामलों में विधानसभा फैसला नहीं कर सकती। तब तक इस कानून को होल्ड किया जाए। (पढ़ें पूरी खबर)

