जालंधर में 500 में गिरवी रखी ₹18,000 की वाशिंग मशीन: आरोपी कबाड़ व्यापारी मुकरा, पीड़ित परिवार पुलिस थानों के काट रहा चक्कर – Jalandhar News

जालंधर में 500 में गिरवी रखी ₹18,000 की वाशिंग मशीन:  आरोपी कबाड़ व्यापारी मुकरा, पीड़ित परिवार पुलिस थानों के काट रहा चक्कर – Jalandhar News




जालंधर के अबादपुरा में आर्थिक तंगी के कारण एक युवक ने अपनी करीब 18,000 रुपये की वाशिंग मशीन को एक कबाड़ व्यापारी के पास मात्र 500 रुपये में गिरवी रख दिया। जब एक-डेढ़ घंटे बाद ही परिवार पैसे वापस कर अपनी मशीन छुड़ाने गया, तो आरोपी दुकानदार मुकर गया और उसने मशीन देने से साफ इंकार कर दिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस भी उनकी शिकायत दर्ज नहीं कर रही है और उन्हें क्षेत्राधिकार (थाना क्षेत्र) के नाम पर एक जगह से दूसरी जगह भटका रही है। अब पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। पैसे की जरूरत में गिरवी रखी थी मशीन पीड़ित अमरीक सिंह ने बताया कि उनके भाई को अचानक पैसों की सख्त जरूरत पड़ गई थी। इस मजबूरी के कारण वह गत 21 तारीख को अपने घर की कबाड़ हो चुकी नहीं, बल्कि एक अच्छी-भली 17-18 हजार रुपये की कड़े कपड़ों वाली वाशिंग मशीन को सोनू नामक एक स्थानीय कबाड़ व्यापारी (टींड कबाड़िया) के पास सिर्फ 500 रुपये में गिरवी रखकर आ गया। एक घंटे में ही मुकर गया आरोपी दुकानदार अमरीक के अनुसार, जब भाई ने अपनी मां को बताया तो मां ने तुरंत पैसों का इंतजाम किया। इसके महज एक से डेढ़ घंटे बाद ही जब वे लोग दुकानदार सोनू को उसके 500 रुपये लौटाकर अपनी मशीन वापस लेने पहुंचे, तो आरोपी अपनी बात से पूरी तरह मुकर गया। उसने साफ कह दिया कि उसके पास ऐसी कोई मशीन नहीं आई है। विरोध करने पर गाली-गलौज और धमकी पीड़ित परिवार ने जब विरोध किया तो आरोपी कभी कहने लगा कि उसने मशीन आगे किसी को बेच दी है, तो कभी कहने लगा कि मशीन टूट-फूट गई है। पीड़ित महिला ने बताया कि जब वह दोबारा अपनी मशीन मांगने गईं, तो आरोपी सोनू और उसकी पत्नी उनके साथ गाली-गलौज और लड़ाई-झगड़ा करने लगे। आरोपी ने खुलेआम चुनौती दी कि ‘जाओ, जहां मर्जी, चाहे डीसी या एसपी के पास शिकायत कर दो, मैं मशीन वापस नहीं दूंगा।’ पुलिसिया कार्रवाई से परेशान पीड़ित परिवार इस मामले में स। पीड़ितों का आरोप है कि घटना के तीन-चार दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रही है। जब वे मॉडल टाउन थाने गए, तो उन्हें भारत कैंप थाना जाने को कह दिया गया। वहीं, जब वे अपने मूल क्षेत्र के थाने (बादपुरा) गए, तो वहां भी उनकी ‘जीरो एफआईआर’ तक दर्ज नहीं की गई।



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